'और लास्ट में मुंह की खानी पड़ी', SEBI चीफ की सैलरी पर ICICI के जवाब पर BJP ने कांग्रेस को घेरा
Sebi Chief Salary Row: हिंडनबर्ग की हालिया नई रिपोर्ट में अडानी ग्रुप और मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) चीफ माधबी पुरी बुच के पति को लेकर किए गए खुलासे के बाद कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर है। एक दिन पहले कांग्रेस ने ICICI से जवाब मांगते हुए माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) की सैलरी का मुद्दा उठाया, जिस पर बैंक ने स्पष्टीकरण देते हुए साफ कहा है कि रिटायरमेंट के बाद बैंक या इसकी अन्य यूनिट ने उन्हें कोई सैलरी या ईएसओपी (कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना) नहीं दी।
अब आईसीआईसीआई बैंक की प्रतिक्रिया पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए जमकर घेरा है। भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि वो "फर्जी एजेंडा" फैला रही है। कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया था कि SEBI चीफ तीन जगह ICICI बैंक, ICICI प्रुडेंशियल और SEBI से एक साथ सैलरी ले रही थीं।

कांग्रेस के आरोप निराधार-BJP
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "कांग्रेस ने वहीं से शुरुआत की जहां हिंडनबर्ग रिसर्च ने की थी, सेबी प्रमुख को निशाना बनाया और अंत में मुंह की खानी पड़ी।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस के आरोप निराधार हैं और उनका मसकद जनता को गुमराह करना है।
अमित मालवीय ने तंज कसते हुए आगे कहा कि क्या यह संयोग है कि जब भी कांग्रेस कोई फर्जी एजेंडा चलाने का फैसला करती है, तो या तो खड़गे या खेड़ा को आगे कर दिया जाता है?
कांग्रेस के बयानों पर मालवीय का सवाल
मालवीय ने कांग्रेस के बयानों के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट किया, "अजीब बात है। कांग्रेस ने हिंडनबर्ग रिसर्च की लंबी और मनगढ़ंत रिपोर्ट पर लगभग तुरंत ही प्रेस बयान जारी कर दिया, वह भी आधी रात के आसपास। लेकिन आईसीआईसीआई बैंक के छोटे से नोट पर बयान देने के लिए रात 9:27 बजे देर हो चुकी है? इस बार हिंडनबर्ग के एसोसिएट्स से कोई मदद नहीं मिली?"
जानिए क्या है पूरा मामला?
बता दें कि एक दिन पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दावा किया कि माधबी पुरी बुच, SEBI की मेंबर थीं, उसके बाद 2 मार्च 2022 को चेयरपर्सन बनीं, उस वक्त SEBI चीफ साथ तीन जगहों से सैलरी ले रही थीं। खेड़ा ने कहा कि बुच ICICI बैंक, ICICI प्रुडेंशियल और SEBI से एक साथ सैलरी ले रही थीं।
जिसके जवाब में बैंक ने अपना स्पष्टीकरण में कहा कि सेबी चीफ के रिटायरमेंट के बाद उनके सेवानिवृत्ति लाभों के अलावा किसी भी तरह का कोई वेतन या कोई ईएसओपी नहीं दिया गया है।












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