मोदीफेस्टो में 'एक वादा' गायब है साहब!
बिहार की जनता से मोदी ने चाय-चर्चा व अन्य कार्यक्रमों में विशेष दर्जा दिलाने की बात कही थी। कई अन्य भाजपा नेता भी राज्य को विशेष दर्जे के रंग में रंगने की कसमें खाते रहे हैं। सोमवार को जारी हुए बीजेपी के घोषणा-पत्र में राम मन्दिर मुद्दा, धारा 370 व समान नागरिक कानून का मसला तो छाया रहा पर सीटों के गणित में अव्व्ल क्षेत्र बिहार को पार्टी ने नजरंदाज कर दिया।
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मोदी ने बिहार में रैलियों के दौरान नीतीश को मौकापरस्त कहते हुए विकास में बाधक बताया था। उन्होंने क्षेत्र की लगभग सभी जनसभाओं में राज्य को विशेष दर्ज व विकास के लिए आकषर्क पैकेज दिलाने के वादे भी किए थे। राजनैतिक जानकार इसकी वजह देरी से जारी हुए घोषणा-पत्र को मान रहे हैं वहीं भाजपा व नरेंद्र मोदी, बिहार से किए वादे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं।
वजहें और परिस्थितियां जो भी हों, पर किसी भी राजनैतिक दल के लिए उत्तर प्रदेश की 80 व बिहार की ४० सीटें बेहद अहमियत रखती हैं। इन दो राज्यों में किए वादों को दरकिनार करना किसी भी दल को पीएम की गद्दी से दूर सकता है।
गठबंधन की गांठ में बंधी सियासत भले ही अपने बलबूते नई सरकार के सपने बुन रही हो, पर यूपी-बिहार वालों की भावनाओं को नजरंदाज करने का नुकसान भाजपा को उठाना पड सकता है। मोदी के विरोधी व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि - ''मोदी बिहार आए और सस्ती लोकप्रियता बंटोरने वाली राजनीति कर गए।''
विशेष राज्य का दर्जा दिलवाने के वादे को घोषणा-पत्र में शामिल ना करना कहीं ना कहीं भाजपा के खिलाफ माहौल बना सकता है।
बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को वाराणसी से चुनाव मैदान में उतार कर पूर्वांचल कार्ड भले ही चला हो, पर बिहार को विशेष दर्जे जैसे महत्वपूर्ण पहलू को घोषणा-पत्र में जगह ना देना वाराणसी में भी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है।













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