Lok Sabha Elections: अन्नामलाई की वजह से तमिलनाडु में चर्चा में है बीजेपी, क्या है उनका पूरा रोडमैप? जानिए

Lok Sabha Elections 2024 News: के अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी का अध्यक्ष बने तकरीबन ढाई साल ही हुए हैं। लेकिन, इतने कम समय में ही राज्य में बीजेपी अन्नाद्रमुक की पिछलग्गू की छवि से बाहर निकल चुकी है। अन्नामलाई तमिलनाडु में बीजेपी को जिस तरह से मुख्यधारा की पार्टी बनाने की कोशिश कर रहे है, उससे लगता है कि उनके पास पार्टी के लिए पूरा रोडमैप तैयार है।

फरवरी में जब उनकी करीब 6 महीने की पदयात्रा 'एन मन, एन मक्कल' (मेरी भूमि, मेरे लोग) अंतिम दौर से गुजर रही थी, तभी उनको स्थानीय स्तर पर मिल रहे समर्थन से लग रहा था कि वे जिस मकसद से आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरे हैं, उसमें उन्हें कामयाबी मिल सकती है।

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बहुत तेजी से 'जननायक' के रूप में उभरे अन्नामलाई
भले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' की तरह उनकी तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों की यात्रा को राष्ट्रीय या क्षेत्रीय मीडिया कवरेज भी नहीं मिली हो, लेकिन वेल्लोर के मुस्लिम बहुल इलाकों में भी जिस तरह से लोग उनके समर्थन में निकल आए, उसने उन्हें प्रदेश का नया 'मक्कल थलाइवर' (जननायक) बना दिया।

तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई बीजेपी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्नामलाई की जुगलबंदी देखकर तमिलनाडु का कोई भी आम आदमी भी समझ सकता है कि देश का शीर्ष नेतृत्व उनपर किस हद तक भरोसा करने लगा है। जब, 11 जुलाई, 2021 को वे भाजपा के सबसे युवा प्रदेश अध्यक्ष बने थे, तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि अन्नामलाई की वजह से तमिलनाडु में भी भारतीय जनता पार्टी किसी भी उत्तर भारतीय राज्यों की तरह बहस का मुद्दा बन जाएगी।

मौजूदा लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में बीजेपी का अन्नामलाई के भरोसे काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है। उनके आने के बाद जिस तरह से राज्य में अन्नाद्रमुक और बीजेपी का गठबंधन टूटा है, उससे अब लग रहा है कि यह अन्नामलाई की ओर से तय की गई रणनीति का ही हिस्सा है।

अन्नामलाई का पहला लक्ष्य तमिलनाडु में बीजेपी को नंबर-2 स्थान पर लाना!
आज लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी दक्षिण के इस राज्य में जिस मोड़ पर खड़ी है, उससे लग रहा है कि उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के आशीर्वाद से इसे अपने दम पर ही आगे बढ़ाने की सोची-समझी तैयारी की है। उनका पहला मिशन यह है कि इस बार राज्य में पार्टी को अपने दम पर कुछ सीटें मिल जाएं और लोकसभा में तमिलनाडु से भाजपा आधिकारिक रूप से दूसरे नंबर की पार्टी बन जाए।

विरोधियों को पूरी रणनीति के तहत बनाया निशाना
इसके लिए अन्नामलाई ने काफी पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। पहले उन्होंने 'डीएमके फाइल्स' के जरिए सत्ताधारी दल को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरना शुरू किया। फिर उसे वंशवादी राजनीति का आरोप लगाकर लपेटने लगे। उन्होंने अन्नाद्रमुक के भी कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने का संकेत देना शुरू किया, जिससे वह बीजेपी से और दूर होती चली गई।

हिंदुत्व का मुद्दा भाजपा के लिए साबित हो सकता है वरदान!
आखिरकार उन्होंने डीएमके को 'हिंदुओं की धार्मिक भावना को आहत' करने का आरोप लगाकर निशाना साधना शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को सलेम की रैली में डीएमके और उसकी सहयोगी कांग्रेस पर हिंदुओं को अपमानित करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि ये दोनों पार्टियां हिंदू धर्म को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं, लेकिन, अन्य धर्मों के बारे में कुछ भी नहीं कहतीं। उन्होंने आरोप लगाया, 'इंडी अलायंस लगातार और जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान करता है। वह हिंदू धर्म को लेकर विचार थोपती हैं....हम इसे कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं, हम यह कैसे होने दे सकते हैं?'

अब मीडिया भी अन्नामलाई की उपेक्षा नहीं कर पा रही
अन्नामलाई ने अपने दम पर ऐसे हालात तैयार किए हैं कि अब मीडिया भी उन्हें उपेक्षित नहीं छोड़ पा रही। वह तेजी से मीडिया के लिए भी पसंदीदा बनकर उभरे हैं।

गठबंधन की राजनीति में पलानीस्वामी जैसे दिग्गजों को पछाड़ा
दूसरी तरफ गठबंधन के विस्तार में उन्होंने एआईएडीएमके के ईके के पलानीस्वामी (ईपीएस) जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ रखा है। सलेम की सभा में पीएमके के एस रामदॉस और उनके बेटे अंबुमणि रामदॉस की उपस्थिति अन्नामलाई की राजनीतिक दूरदर्शिता का सटीक उदाहरण है।

पीएमके के साथ गठबंधन के लिए जयललिता की पार्टी भी छटपटा रही थी, लेकिन अन्नामलाई के बढ़ते कद को देखकर बुजुर्ग रामदॉस भी बेटे के सामने सरेंडर कर गए। सिर्फ पीएमके ही नहीं दिनाकरण की एएमएमके, तमिल मानिला कांग्रेस और ओ पन्नीरसेल्वम भी आज भाजपा के साथ हैं, तो इसकी वजह पार्टी के यही युवा नेता हैं।

अन्नामलाई की लोकप्रियता से अन्नाद्रमुक की बढ़ रही है चिंता
गठबंधन में ईपीएस की नाकामी पर एआईएडीएमके के एक नेता का कहना है, 'अगर आप को कुछ छोटे सहयोगी को भी साथ लेने में सक्षम नहीं हैं, तो आपकी शुरुआत ही खराब है।' बीजेपी के नेताओं को लगता है कि अगर पार्टी तमिलनाडु में इस बार डबल डिजिट वाला प्रदर्शन भी कर पाई तो अन्नामलाई पार्टी को 2026 के विधानसभा चुनावों में प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उतारने में सफल हो सकते हैं।

अन्नामलाई की जमीनी राजनीति को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ अन्नाद्रमुक के दिग्गजों ने भी शुरू में ही भांप लिया था। शायद यही वजह है कि 2023 के सितंबर में ही ईपीएस के समर्थक और प्रदेश के पूर्व मंत्री सेल्लुर के राजू ने कहा था कि वे चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार भी पीएम बनें। लेकिन, वे चाहते हैं कि भाजपा 2026 के लिए अभी से ही ईपीएस को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करना शुरू कर दे।

बहरहाल, अन्नामलाई अपने मिशन में जुटे हुए हैं। उन्होंने जिस तरह से राज्य में भाजपा की अगुवाई में बगैरे एआईएडीएमके के एनडीए का विस्तार किया है, उससे पार्टी के पक्ष में डीएमके के खिलाफ मुख्य विपक्षी पार्टी वाली धारणा तो जरूर बना दी है। अब देखना ये है कि वह इस सियासी धारणा को वोट के माध्यम से साबित कर पाते हैं या नहीं!

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