असम में बीजेपी को चुनाव से पहले बड़ा झटका, पार्टी के पहले मुस्लिम MLA कांग्रेस में शामिल, क्या ये रही वजह?

Assam Lok Sabha Election 2024: असम में लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। इसके पहले मुस्लिम एमएलए अमीनुल हक लस्कर ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।

लस्कर पहले असम विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रह चुके हैं। उन्होंने यह आरोप लगाते हुए भाजपा छोड़ी है कि इसने अपनी राजनीतिक विचारधारा खो दी है। 2016 से 2021 के बीच यह राज्य में अकेले मुस्लिम विधायक थे।

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2021 में भाजपा के टिकट पर चुनाव हार गए थे अमीनुल हक लस्कर
2021 के विधानसभा चुनाव में एआईयूडीएफ के करीमुद्दीन बरभुइया ने इन्हें सोनाई विधानसभा सीट से पराजित कर दिया था। लस्कर अभी असम प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरपर्सन हैं।

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भाजपा पर सांप्रदायिक कार्ड खेलने का लगाया आरोप
उन्होंने भाजपा छोड़ने की वजह बताते हुए कहा है, 'जब पहले 2011 में हम बीजेपी में शामिल हुए थे, तब इसकी कुछ विचारधारा थी, लेकिन आज यह एआईयूडीएफ की तरह ही सांप्रदायिक कार्ड खेलती है।'

उन्होंने दावा किया है कि 'आज हमने देखा है कि एआईयूडीएफ के विधायक सिलचर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे हैं, यह मंजूर नहीं है।'

बीजेपी-एजीपी को एक जैसा बताया
लस्कर के मुताबिक बीजेपी और असम गण परिषद (एजीपी) दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और सोनाई इलाके के लोग चाहते हैं कि वे ऐसी पार्टियों से दूर रहें। उन्होंने कहा है कि वह अपने क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए काम करते रहेंगे।

लस्कर पहले एजीपी में थे और वहां से भाजपा में शामिल हुए थे। बुधवार को उन्होंने असम में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी महासचिव जीतेंद्र सिंह अलवर की मौजदूगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। असम में उनके अलावा एआईयूडीएफ के कुछ और नेता भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

कछार में विरोध के बावजूद कांग्रेस में शामिल!
वैसे लस्कर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें कई महीनों से चल रही थीं। लेकिन, कछार में कांग्रेस को अंदर से ही इसको लेकर भारी विरोध का सामना भी करना पड़ रहा था। कांग्रेस के कछार अल्पसंख्यक विभाग की ओर से ऐसा होने पर सामूहिक इस्तीफे तक की धमकी मिलने की चर्चा हो रही थी।

परिसीमन की वजह से बदला पाला?
माना जा रहा है कि लस्कर ने परिसीमन की वजह से पाला बदलने का फैसला किया है। इसकी वजह से सिलचर इलाके में कई चुनाव क्षेत्रों का गणित बदल चुका है और नेता सुरक्षित सीटों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।

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