BJP ने बंगाल की इस सीट से पूर्व IPS अफसर देबाशीष को दिया था टिकट, अब चुनाव आयोग ने रद्द किया नामांकन, क्यों?
Debasish Dhar (Ex IPS): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पश्चिम बंगाल के बीरभूम लोकसभा सीट के उम्मीदवार और पूर्व IPS अधिकारी देबाशीष धर का नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया है। वो अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
चुनाव आयोग ने देबाशीष धर का नामांकन पत्र जांच के दौरान तकनीकी आधार पर रद्द किया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी देबाशीष धर राज्य सरकार से 'नो ड्यूज' प्रमाणपत्र चुनाव आयोग के सामने को नहीं दे पाए थे।

अब देबाशीष धर की जगह बीरभूम से देबतनु भट्टाचार्य लड़ेंगे चुनाव
भाजपा नेतृत्व को पिछले कुछ दिनों से देबाशीष धर के नामांकन में कुछ गड़बड़ी का अहसास हुआ था। चौथे चरण के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के आखिरी दिन पार्टी के वरिष्ठ नेता देबतनु भट्टाचार्य ने बीरभूम लोकसभा से चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
निर्वाचन क्षेत्र बीरभूम में 13 मई को मतदान होना है। संभावना है कि देबतनु भट्टाचार्य पूर्व आईपीएस अधिकारी की जगह भाजपा के उम्मीदवार होंगे। देबाशीष धर ने पार्टी द्वारा उनकी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद से बड़े पैमाने पर प्रचार किया था। ये पूरा घटनाक्रम भाजपा के लिए शर्मिंदगी की वजह बन गई है।

उम्मीदवारी रद्द होने पर क्या बोले
उम्मीदवारी रद्द होने पर देबाशीष धर ने कहा, ''कुछ तकनीकी कारणों से, मेरी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है। मैं अपनी पार्टी के नेताओं से परामर्श करने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा। मुझे लगता है कि बताए गए कारण निराधार हैं।''
देबाशीष धर ने यह भी कहा कि नो ड्यूज सर्टिफिकेट उनकी अयोग्यता के लिए कोई मुद्दा नहीं हो सकता है और उन्होंने अपना नामांकन दाखिल करने से पहले इस्तीफा दे दिया था।
देबाशीष धर की याचिका को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष अनुमति दी गई थी लेकिन कोर्ट तत्काल सुनवाई के लिए सहमत नहीं हुआ।
क्यों ममता सरकार के खिलाफ हैं देबाशीष धर?
देबाशीष धर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कूच बिहार के पुलिस अधीक्षक थे, जब केंद्रीय बलों ने मतदान के दिन जिले के सीतलकुची में एक पोलिंग बूथ के अंदर भीड़ पर गोलीबारी की थी।
इस घटना में चार लोगों की जान चली गई थी। उसके बाद से ही देबाशीष धर का राज्य सरकार के साथ मतभेद हो गया। उन्हें निलंबित कर दिया गया और बाद में अनिवार्य प्रतीक्षा में डाल दिया गया था।












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