नीतीश कुमार के बयान को सदन की कार्यवाही से हटाया क्यों नहीं जा रहा? 'सेक्स ज्ञान' पर खुद मांग चुके हैं माफी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले विधानसभा में और फिर विधान परिषद में अनावश्यक रूप से जो 'सेक्स ज्ञान' दिया था, उसपर उन्हें दूसरे दिन ही शर्म महसूस होने लगी थी। उन्होंने सदन के बाहर और फिर सदन के भीतर बार-बार माफी मांगी और अपने शब्दों को वापस लेने की बात कही।
तथ्य यह है कि नीतीश ने जो कुछ भी कहा वह लोकतंत्र के मंदिर के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। उसे सदन की कार्यवाही से हटाने का अधिकार विधानसभा के मामले में स्पीकर और विधान परिषद के मामले सभापति के पास है। लेकिन, अभी तक इसे हटाए जाने की सूचना पब्लिक डोमेन में नहीं है।

नीतीश अपने बयान के लिए मांग चुके हैं माफी
दरअसल, नीतीश ने वह अमर्यादित बयान 7 नवंबर को दिए थे। 8 नवंबर को उन्होंने माफी भी मांगी थी और उसी दिन राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से बिहार विधासभा के स्पीकर अवध बिहार चौधरी के नाम एक चिट्ठी लिखी गई थी। इसमें महिला अधिकारों की रक्षा के मैनडेट होने के नाते इसने देश भर की महिलाओं की ओर से बिहार के सीएम के अश्लील बयान की निंदा की थी।
महिला आयोग ने की थी नीतीश के बयान को रिकॉर्ड से बाहर करने की मांग
आयोग ने स्पीकर से यह भी अनुरोध किया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और उनके बयान को सदन के रिकॉर्ड से बाहर करें। नीतीश ने सदन में जिस तरह की बातें की थीं, अगर वे किसी सार्वजनिक मंच पर महिलाओं के बीच ऐसी हरकत करते तो क्या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती थी? यह सवाल हमने कानून के एक जानकार से किया तो उन्होंने कहा कि उनपर आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई का मामला बन सकता था। फिर सवाल है कि उनके बयान को रिकॉर्ड से हटाया क्यों नहीं जा रहा?
मुख्यमंत्रीजी यह आपका बड़प्पन है- स्पीकर
जब विधानसभा में नीतीश ने अपनी हरकत के लिए माफी मांगी थी, तो स्पीकर अवध बिहारी चौधरी ने उनकी तारीफ में कहा था, 'मुख्यमंत्रीजी यह आपका बड़प्पन है, कोई मुख्यमंत्री स्वयं इस तरह से अपना निंदा नहीं किया है....ये लोग निंदनीय हो गए, इसलिए आप (विपक्षी सदस्यों को) स्थान ग्रहण कीजिए....।'
मैं न सिर्फ शर्म कर रहा हूं, बल्कि दुख भी प्रकट कर रहा हूं.. नीतीश
इससे पहले नीतीश ने मीडिया के सामने और फिर सदन के अंदर कहा, 'मैं माफी मांगता हूं....मैं उन शब्दों को वापस करता हूं....इतनी निंदा हो रही है....मेरी कोई बात कहना गलत था तो मैं माफी मांगता हूं...इसको वापस करते हैं....कोई निंदा करता है तो हम भी निंदा कर लेते हैं.....मैं न सिर्फ शर्म कर रहा हूं, बल्कि दुख भी प्रकट कर रहा हूं......।'
सवाल है कि जब सीएम खुद मान चुके हैं कि उनका रवैया मर्यादा के खिलाफ था। वह उसे अपनी इच्छा से वापस लेने को तैयार हो चुके हैं। फिर, स्पीकर को रिकॉर्ड से हटाने में क्या आपत्ति है?
नीतीश के पक्ष में उनकी पार्टी के कुछ नेता एनसीईआरटी की किताबों का हवाला देते हैं। तो प्रश्न ये है कि क्या विधानसभा और लोकसभा यौन शिक्षा का केंद्र है? क्या चिकित्सा शास्त्र में छात्र-छात्राओं को जो पढ़ाया जाता है, उसका सार्वजनिक विश्लेषण किया जा सकता है? नीतीश के बयान को सही ठहारने वाले नेता क्या इसी तरह की शिक्षा अपने परिवार के सदस्यों के बीच में पाना या देना पसंद करेंगे?
विपक्ष स्पीकर पर लगा रहा है पक्षपात का आरोप
वैसे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष पर अब विपक्ष सत्ताधारी दलों के पक्ष में फैसले करने का आरोप भी लगा रहा है। उनपर सदस्यों के साथ सम्मानजनक रवैया नहीं रखने के भी आरोप लग चुके हैं। पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, 'लगता है कि माननीय अध्यक्ष महोदय अपना सारा निर्णय सत्तापक्ष के पक्ष में दे रहे हैं....जो इस जनतंत्र के लिए, संविधान के लिए घातक है....इसीलिए आज मैं कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री तो दोषी हैं ही (मांझी के साथ तुम-तड़ाम करने के मामले को लेकर), उनसे कम दोषी हमारे अध्यक्ष भी नही हैं...'












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