बिहार चुनाव: बाहूबलियों, अपराधियों के क्षेत्र से आ रही शांति अमन की गूंज
पटना( मुकुन्द सिहं)। विधानसभा चुनाव के दौरान बेहद संवेदनशील और बाहुबलियों का गढ़ माना जाने वाला मोकामा विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है। इस बार चर्चा की वजह है बाहुबली अनंत सिंह का यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना। जेडीयू ने इस बार मोकामा सीट से अनंत सिंह का टिकट काटकर अपने प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज को मैदान में उतार कर मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है। मौजूदा विधायक अनंत सिंह और नीरज एक ही जाति से हैं और इस वजह से मुकाबला और भी टक्कर का हो गया है। यह मुकाबला यहीं खत्म नहीं होता है, इस सीट के तीसरे दावेदार हैं एलजेपी के कन्हैया कुमार सिंह जो पूर्व सांसद और बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के भाई हैं।

राजनीति के मैदान में कोई किसी का नहीं है और इस कहावत को सही साबित करते हुए ललन सिंह, पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी से मैदान में उतर गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे वर्तमान बाहुबली विधायक अनंत सिंह का सीधा मुकाबला जेडीयू प्रत्याशी नीरज से है। जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार नीतीश कुमार के 10 सालों के कामकाज पर वोट मांग रहे हैं। हालांकि कुमार अनंत सिंह पर निशाना साधते हुए मोकामा को बाहुबलियों से मुक्त कराने की बात कहने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
मोकामा और इसके आस पास के इलाकों में लोगों के बीच छोटे सरकार के नाम से पुकारे जाने वाले बाहुबली विधायक अनंत सिंह कुछ समय पहले तक जेडीयू में काफी कद्दावर माने जा रहे थे, लेकिन बिहार के बदलते राजनीतिक समीकरण ने समय के साथ अनंत सिंह को जेल की हवा खाने के लिए मजबूर कर दिया। अपने क्षेत्र में अजेय माने जाने वाले अनंत सिंह ने गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा दे दिया और कई आपराधिक मामलों के तहत फिलहाल पटना की बेउर जेल में बंद हैं। 2005 और 2010 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू के टिकट पर मोकामा से विधायक चुने गए अनंत सिंह को अदालत ने चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी है।
इससे पहले मोकामा सीट से अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी नीलम सिंह ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा था, लेकिन बाद में उन्होंने नामांकन वापस ले लिया और फिलहाल नीलम सिंह अपने पति अनंत सिंह के लिए चुनाव प्रचार का काम संभाल रही हैं। हालांकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सभी उम्मीदवार इलाके में कानून व्यवस्था कायम रखने का वादा कर रहे हैं। इस चुनाव में विधायक अनंत सिंह ने पोस्टर के जरिए लिखा है, शांति, विकास व भाईचारा, यही है छोटे सरकार का नारा। वहीं एक और बाहुबली एनडीए उम्मीदवार कन्हैया सिंह का नारा है, मोकामा में शांति हमने लाई है, इसके लिए हमने जान की बाजी लगाई है।
वहीं जेडीयू उम्मीदवार और बेदाग छवि के नेता नीरज कुमार का कहना है कि कलम और बंदूक की जंग, आप रहेंगे किसके संग। इस विधानसभा सीट की संवंदनशीलता को इस बात से समझा जा सकता है कि प्रमंडलीय आयुक्त ने विशेष निगरानी बरतने के आदेश के साथ किसी भी स्थिति में निर्धारित खर्च सीमा से अधिक खर्च न किए जाने देने का आदेश जारी किया गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि एक सीट पर इतने बाहुबली उम्मीदवारों की उपस्थिति में चुनावी परिणाम को धनबल से प्रभावित किया जा सकता है। प्रशासन ने इस स्थिति को रोकने के लिए उड़नदस्ता और निगरानी दल का गठन किया है।
फिलहाल ऐसा नहीं है कि मोकामा का यह स्टेज पहली बार बाहुबली उम्मीदवारों से सजा है, इस सीट का इतिहास ही कुछ ऐसा ही रहा है। इतिहास पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि मोकामा सीट पर 1990 और 95 में आरजेडी के टिकट पर बाहुबली दिलीप सिंह विधायक चुने गए थे। 2000 में बाहुबली नेता सूरजभान सिंह मोकामा से विधायक बने और बाद में 2005 और 2010 में अनंत सिंह इस सीट से चुने गए। लेकिन इस बार परिस्थितियां बदल चुकी हैं। बेदाग छवि के नीरज कुमार ने बाहुबलियों को सीधी टक्कर दी है। वैसे जिस समाज का मोकामा में बोलबाला है, उसका सामाजिक चरित्र हमेशा से संदिग्ध रहा है। लिहाजा यह 8 नवंबर को ही तय होगा कि मोकामा पर बाहुबलियों के राज का सिलसिला चलेगा या फ़िर एक नयी परंपरा की शुरुआत होगी।












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