बिहार में घटीं JDU की सीटें तो दिग्विजय सिंह ने दिया नीतीश कुमार को ये ऑफर
बिहार चुनाव परिणाम के बाद दिग्विजय सिंह ने नीतीश कुमार को एक बड़ा ऑफर दिया है।
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। हालांकि जेडीयू को बिहार में भाजपा से कम सीटें मिली हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार ही राज्य के सीएम होंगे। बिहार में एनडीए को कुल 125 सीटों पर जीत मिली है, जिनमें से 74 भाजपा और 43 जेडीयू के खाते में गई हैं। 8 सीटों पर हम और वीआईपी के प्रत्याशी जीते हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने नीतीश कुमार से अपील की है कि वो संघ का साथ छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बनें।
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'तेजस्वी को आशीर्वाद दे दीजिए'
बिहार चुनाव नतीजों के एक दिन बाद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'नीतीश जी, बिहार आपके लिए छोटा हो गया है, आप भारत की राजनीति में आ जाएं। सभी समाजवादी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में विश्वास रखने वाले लोगों को एकमत करने में मदद करते हुए संघ की अंग्रेजों के द्वारा पनपाई 'फूट डालो और राज करो' की नीति ना पनपने दें। विचार जरूर करें। भाजपा/संघ अमरबेल के समान हैं, अमरबेल जिस पेड़ पर लिपट जाती है, वह पेड़ सूख जाता है और वह पनप जाती है। नीतीश जी, लालू जी ने आपके साथ संघर्ष किया है, आंदोलनों मे जेल गए हैं। भाजपा/संघ की विचारधारा को छोड़कर तेजस्वी को आशीर्वाद दे दीजिए। इस 'अमरबेल' रूपी भाजपा/संघ को बिहार में मत पनपाओ। नीतीश जी को बड़ा दिल करके तेजस्वी के लिए मुख्यमंत्री पद की अनुशंसा कर देनी चाहिए और जदयू के जितने भी लोग हैं वो फॉर्मुला बना लें डिप्टी सीएम... जो भी पद उनको ठीक लगे।'

'भाजपा ने नीतीश का कद छोटा कर दिया'
एक साथ कई ट्वीट करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, 'बिहार चुनावों में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन को मिली सफलता के लिए में बधाई देता हूं। एक बार फिर औवेसी जी की MIM ने चुनाव लड़कर भाजपा को अंदरूनी तौर पर मदद कर दी। देखना है कि वे बिहार में भाजपा व जदयू की सरकार बनाने में NDA का सहयोग करेंगे या महागठबंधन का। भाजपा ने अपनी कूटनीति से नीतीश का कद छोटा कर दिया और रामविलास पासवान जी की विरासत को समाप्त कर दिया। सन 67 से लेकर आज तक जनसंघ/भाजपा ने हर गठबंधन सरकारों में अपना कद बढ़ाया है और सभी समाजवादी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले राजनैतिक संघटनों को कमजोर किया है।'

'विचारधारा के लिए NDA का साथ छोड़ें सहयोगी दल'
अपने ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मुझे इस बात का दुख है कि भारत की आजादी के बाद के राजनैतिक इतिहास में राजनेताओं की अपनी महत्वकांक्षाओं के कारण विचारधारा गौण हो जाती रही है। कांग्रेस ही एक मात्रदल है, जिसने संघ की विचारधारा के साथ ना कभी समझौता किया और ना ही जनसंघ/भाजपा के साथ मिल कर कभी सरकार बनाई। आज देश में एक मात्र नेता राहुल गांधी हैं, जो विचारधारा की लड़ाई लड़ रहे हैं। NDA के सहयोगी दलों को समझना चाहिए कि राजनीति विचारधारा की होती है। जो भी व्यक्ति अपनी महत्वाकांक्षा के कारण विचारधारा को छोड़कर अपने स्वार्थ के लिए समझौता करता है, वह अधिक समय तक राजनीति में ज़िंदा नहीं रहता।'

'भाजपा-संघ को छोड़िए नीतीश जी'
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, 'मैं संघ की विचारधारा का घोर विरोधी हूं, क्योंकि वह भारत की सनातनी परंपराओं व सनातन धर्म की मूल भावना के विपरीत है। यह देश सबका है। लेकिन फिर भी मैं उनकी इस बात की प्रशंसा भी करता हूं कि वे अपने लक्ष्य और अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं करते। केवल समाज को बांटकर राजनीति करते हैं। नीतीश जी, यही महात्मा गांधी जी व जयप्रकाश नारायण जी के प्रति सही श्रद्धांजलि होगी। आप उन्हीं की विरासत से निकले राजनेता हैं वहीं आ जाइए। आपको याद दिलाना चाहूंगा कि जनता पार्टी संघ की Dual Membership के आधार पर ही टूटी थी। भाजपा/संघ को छोड़िए। देश को बर्बादी से बचाइए।'












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