बिहार चुनाव- जीवन की सबसे बड़ी गलती कर रहे नीतीश कुमार
[अजय मोहन] वर्ल्ड बैंक ने जब उद्योग लगाने के लिये सबसे सुलभ राज्य घोषित किया, तो नीतीश कुमार फूले नहीं समा रहे थे। उन्हें खुशी इस बात की थी, कि उनकी विकास यात्रा सफलता की ओर बढ़ रही है। महज एक महीने पहले तक सिर्फ विकास की बात करने वाले नीतीश कुमार के सुर बदल गये हैं। ऐसा लगता है नीतीश की विचारधारा अब विकास की जगह जातिवादी विचारधारा हो गई है। सच पूछिए तो यह नीतीश के जीवन की सबसे बड़ी गलती है।
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इस नई विचारधारा पर मुहर तब लग गई जब बुधवार को महागठबंधन की सूची जारी करते वक्त नतीतीश ने जातिगत समीकरणों का बखान दिल खोल कर किया। नीतीश ने बड़े गर्व से कहा, "हमने सामान्य वर्ग को 16 %, पिछड़ा वर्ग को 55 %, एससी-एसटी को 16%, मुसलमानों को 14% और महिलाओं को 10% सीटें दी हैं।"
इससे साफ हो गया कि अब नीतीश के लिये बिहार के विकास से ज्यादा जातिगत राजनीति है और जातिवाद के बल पर ही वो वोट बटोरना चाहते हैं। सच पूछिए तो ऐसा करके नीतीश कुमार अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। क्योंकि नीतीश कुमार का रिपोर्ट कार्ड कई मायनों में बहुत अच्छा है, जिसे दिखाकर उन्हें अच्छे वोट मिल सकते हैं। [बिहार स्पेशल पेज]
नीतीश का रिपोर्ट कार्ड स्लाइडर में-

नीतीश कुमार
नीतीश के राज में बिहार लगभग हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है।

कृषि
खाद्यान्न उत्पादन 2005-06 में 8,587 हजार टन था, जबकि 2014-15 में यह बढ़कर 13,054 हजार टन हो गया।

सड़क निर्माण
2005 में 120,000 किलोमीटर बनायी गई, जब 2015 में 180,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ।

बिजली की सप्लाई
2005-06 में 1,095 मेगावाट थी, जबकि 2014-15 में बिजली की सप्लाई 2,829 मेगावाट हो गई है।

बिना बिजली के गरीबी रेखा से नीचे वाले लोग
2002 में 38.3 लाख थे जबकि 2012 में 16.09 लाख हो गये।

टेलीफोन कनेक्शन
2005-06 में 41.1 लाख थे। वहीं 2013-14 में बढ़ कर 603.6 लाख हो गये।

किसान कार्ड
2005-06 में 318,603 लोगों के पास किसान कार्ड था, 2013-14 में 2,514,763 लोगों के पास हो गया।

फैक्ट्री संख्या
बिहार में फैक्ट्रियों की संख्या 2005-06 में 1418 थी, जबकि 2011-12 में 2,872 हो गई।

फैक्ट्रियों में काम करने वाले
फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों की संख्या 2005-06 में 67447 थी, 2011-12 में 126,592 हो गई।

बिहार एक मात्र राज्य
बिहार एक मात्र राज्य ऐसा है जहां एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की। वहीं महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश के हालात बहुत खराब हैं।












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