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बिहार चुनाव 2020: कोसी-सीमांचल-मिथिला तय करेंगे अगली सरकार की दिशा, NDA के लिए बेहद खास ये चरण

पटना। Bihar Assembly Elections 2020: तीसरे चरण में कोसी, मिथिला और सीमांचल की सीटों पर मतदान के साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान सम्पन्न हो गया है। इस चरण में 78 सीटों पर मतदान हुआ जिनमें सीमांचल की 24, कोसी इलाके की 13 और मिथिलांचल की 10 सीटें बिहार में अगली सरकार की दिशा तय करने वाली हैं। इसके साथ ही इस चरण में एनडीए के 11 मंत्रियों की किस्मत का फैसला भी ईवीएम में कैद हो गया है।

Voting

सरकार बनाने में होगी अहम भूमिका
तीसरे चरण के कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल की सीटों की सरकार बनाने में अहम भूमिका होती है। जो भी गठबंधन इस चरण की 78 में से लगभग 50 सीटें जीतने में सफल होगा सरकार बनाने की उसकी संभावना अधिक हो जाएगी। इस इलाके में पिछली बार जेडीयू का दबदबा रहा था लेकिन पिछली बार के समीकरण भी अलग थे। 2015 के चुनाव में जेडीयू ने आजेडी के साथ हाथ मिलाकर विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन इस बार वोटिंग का समीकरण फिर से बदला हुआ है। इस इलाके में सबसे महत्वपूर्ण अतिपिछड़ी जातियों के वोट को साधना रहा है। राजनीतिक रूप से कम मुखर रहे अति पिछड़ों की इस इलाके में काफी संख्या है।

अति पिछड़ा समुदाय में धानुक, तेली, सहानी (मल्लाह), नोनिया, लोहार, नाई, बिंद, चंद्रवंशी और केवट समेत लगभग 100 जातियां शामिल हैं। मधुबनी, दरभंगा और कोशी क्षेत्र के सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में इनके वोट काफी निर्णायक हैं। अतिपिछड़ी जातियां कोसी में यादव और मिथिलांचल में ब्राह्मण वोटबैंक को बैलेंस करती रही हैं। कोसी इलाके में इन्हें पचफोरना के नाम से जाना जाता है। 1990 में लालू यादव के उभार के समय ये जातियां लालू के साथ थीं। लेकिन पिछले 15 वर्षों के अपने कार्यकाल में नीतीश कुमार अतिपिछड़ी जातियों के वोटर को सफलतापूर्वक अपने करीब ले आए हैं।

मुस्लिम वोट भी निर्णायक
अतिपिछड़ा वर्ग की तरह सीमांचल इलाके में मुस्लिम मतदाता कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। यही वजह है कि सीमांचल के इलाके पर असदुद्दीन ओवैसी की पूरी नजर जमा रखी है। ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कुल 19 सीटों पर चुनाव लड़ा है। इनमें 13 प्रत्याशी अल्पसंख्यक खड़े किए हैं। किशनगंज जिला जहां किशनगंज सीट पर उपचुनाव में ओवैसी की पार्टी ने जीत दर्ज की थी, मुस्लिम आबादी 70 प्रतिशत है। मुस्लिम आबादी परंपरागत रूप से लालू की आरजेडी के साथ रही है लेकिन इस बार औवैसी इसमें सेंध लगाने की कोशिश में हैं। अगर ऐसा हुआ तो आरजेडी के लिए मुश्किल होगी।

11 मंत्रियों की किस्मत EVM में कैद
तीसरे चरण में जो 11 मंत्री चुनाव मैदान में थे उनमें ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव सुपौल सीट से, विनोद नारायण झा बेनीपट्टी सीट, कृष्ण कुमार ऋषि बनमनखी विधानसभा, रमेश ऋषिदेव सिंहेश्वर विधानसभा से चुनाव मैदान में थे। वहीं मुजफ्फरपुर विधानसभा से नगर मंत्री सुरेश शर्मा, सिकटा विधानसभा से खुर्शीद अहमद, लौकहा विधानसभा से लक्ष्मेश्वर राय, रुपौली विधानसभा से बीमा भारती, बहादुरपुर से मदन सहनी, कल्याणपुर विधानसभा से महेश्वर कल्याण और मोतिहारी विधानसभा से प्रमोद कुमार ने चुनाव लड़ा है।

चार प्रमुख महिलाएं भी रहीं मैदान में
तीसरे चरण में चार प्रमुख महिलाओं के राजनीतिक भविष्य भी मतदाताओं ने तय कर दिया है जिसके नतीजे 10 नवम्बर को आएंगे। इनमें सहरसा सीट से बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद मैदान में हैं। बिहारीगंज में शरद यादव की बेटी के भाग्य का फैसला होना है। शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा है। गायघाट सीट से लोजपा की कोमल सिंह ने चुनाव लड़ा है तो परिहार विधानसभा से राजद की रितु जायसवाल चुनावी मैदान में थीं।

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