भारतीय किसानों की बड़ी जीत: अमेरिकी कंपनी PepsiCo का आलू पर पेटेंट रद्द, किया था मुकदमा
नई दिल्ली। देश के किसानों को गर्व का अहसास दिलाने वाली बड़ी खबर है। दरअसल, अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी 'पेप्सिको' के आलू की विशेष किस्म से जुड़े पेटेंट को भारत ने रद्द कर दिया है। 'पेप्सिको' के मालिकों ने एक खास किस्म के आलू भारत में उगाने पर यहां के किसानों पर मुकदमा दर्ज करा दिया था। उनका कहना था कि, पेप्सिको इंक के लोकप्रिय 'ले'आलू के चिप्स के लिए उगाने का अधिकार सिर्फ उनके पास है। जिसका उन्होंने पेटेंट भी करा रखा था। हालांकि, भारत ने उसके उस तरह के आलू की किस्म के पेटेंट को रद्द कर दिया है। अब इसे हमारे यहां के किसान एक बड़ी जीत मान रहे हैं।

अमेरिकी कंपनी 'पेप्सिको' से जीते भारतीय किसान
अमेरिकी कंपनी 'पेप्सिको' का आलू से जुड़ा पेटेंट रद्द होने का फायदा यह होगा कि कोई भी किसान अब ये फसल उगा सकेगा। इस बारे में जानकारी देते हुए भारत सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि, शुक्रवार को जारी एक आदेश के अनुसार, भारत ने पेप्सिको इंक के लोकप्रिय ले के आलू चिप्स के लिए विशेष रूप से उगाई जाने वाली आलू की किस्म के पेटेंट को रद्द कर दिया है। जिससे जुड़े आदेश पौधे की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण (पीपीवीएफआर) प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए।

गुजरात के किसानों पर हुआ था मुकदमा
बता दें कि, वर्ष 2019 में, पेप्सिको ने पश्चिमी राज्य गुजरात में स्थित कुछ भारतीय किसानों पर FC5 आलू की किस्म की खेती के लिए मुकदमा दर्ज करा दिया था। कंपनी के मालिकों ने कहा था कि, ऐसे आलू सिर्फ हम ही उगा सकते हैं..और इस पर हमारा पेटेंट है (एक तरह का कॉपीराइट)।' चूंकि, इस तरह की किस्म में आलू के चिप्स जैसे स्नैक्स बनाने के लिए नमी की मात्रा कम होती है।
उस साल किसानों पर मुकदमा किए जाने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन समेत कई किसान संगठन प्रदर्शन करने लगे। यह मामला अदालत पहुंच गया था। यहां तक कि, भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी प्रदर्शन हुए।

वनइंडिया की खबर से भी उठा मुद्दा
उस साल वनइंडिया ने भी किसानों के प्रदर्शन की खबरें प्रकाशित कीं। यूपी में भारतीय किसान यूनियन के सैकड़ों सदस्यों ने शामली-कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना-दिया था। जहां प्रदर्शनकारियों ने 3 गुजराती किसानों द्वारा आलू की वो किस्म उगाने पर 'पेप्सिको' के केस को लेकर नाराज जताई। किसान-प्रदर्शनकारियों का कहना था कि, एक विदेशी कंपनी ने अहमदाबाद कोर्ट में कॉपीराइट उल्लंघन का केस करके जिन किसानों से एक करोड़ रुपए की क्षति-पूर्ति की मांग की है, वह नाजायज है। आलू तो कोई भी किसान उगा सकता है, उसमें कोई कॉपीराइट उल्लंघन कैसे हो सकता है।'

आखिर में पीछे हटी 'पेप्सिको'
भारत में विरोध तेज होते देख अमेरिकी कंपनी 'पेप्सिको' ने पीछे हटने की तैयारी कर ली। उसने मुकदमों को वापस लेते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहती है। उधर, किसानों के अधिकारों की आवाज उठाने वाली एक सोशल एक्टिविस्ट कविता कुरुगंती ने पेप्सिको की FC5 आलू की किस्म के पेटेंट को रद्द करवाने के लिए PPVFR में याचिका दायर की और कहा कि भारत के नियम बीज की किस्मों पर पेटेंट की अनुमति नहीं देते हैं। पीपीवीएफआर प्राधिकरण कुरुगंती के इस तर्क से सहमत था कि पेप्सी एक बीज की किस्म पर पेटेंट का दावा नहीं कर सकता।

भारत सरकार ने रद्द किया पेटेंट
हाल ही में पीपीवीएफआर प्राधिकरण के अध्यक्ष के वी प्रभु ने कहा, "पंजीकरण का प्रमाण पत्र... एतद्द्वारा तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।" वहीं, इस दौरान पेप्सिको इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, "हम पीपीवीएफआर प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश से अवगत हैं और इसकी समीक्षा करने की प्रक्रिया में हैं।" हालांकि, पेप्सिको के तर्क हैं कि उसने आलू की FC5 किस्म विकसित की है, और 2016 में इसका पेटेंट भी करा लिया था।

न्यूयॉर्क में है पेप्सिको का हेडक्वार्टर
बता दें कि, पेप्सिको का हेडक्वार्टर अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है। इस कंपनी ने 1989 में भारत में अपना पहला आलू चिप्स संयंत्र स्थापित किया था। वह यहां किसानों के एक समूह को FC5 किस्म के बीज की आपूर्ति करती है, जो बदले में कंपनी को एक निश्चित मूल्य पर अपनी उपज बेचते हैं। जब गुजरात के कुछ किसानों ने उसी तरह के आलू की खेती की तो न्यूयॉर्क स्थित कंपनी ने उन किसानों पर मुकदमा करा दिया था।

मुकदमा झेलने वाले किसान क्या बोले?
हालांकि, अब गुजरात के आलू किसानों ने पीपीवीएफआर प्राधिकरण के फैसले की सराहना करते हुए इसे उत्पादकों की जीत बताया है। वर्ष 2019 में मुकदमा झेलने वाले गुजरात के उन किसानों में से एक बिपिन पटेल ने कहा, "यह आदेश भारत के किसानों के लिए एक बड़ी जीत है, और किसी भी फसल की खेती करने के उनके अधिकार की पुष्टि करता है।"
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