महाराष्ट्र में भाजपा की एक गलती ने शरद पवार को बना दिया 'बिग बॉस'
नई दिल्ली। अमित शाह, जिन्हें देश की राजनीति में चाणक्य की संज्ञा दी जाती हैं, उन्हें भाजपा के सबसे बड़े रणनीतिकार के तौर पर जाना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए जिस तरह अमित शाह को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई और उन्होंने यहां पार्टी के लिए इतिहास बना दिया उसके बाद हर किसी ने अमित शाह के नाम का लोहा माना। यूपी की सफलता के बाद अमित शाह ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, इसके बाद उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और एक के बाद एक तमाम राज्यों में भाजपा की सरकार बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

कटघरे में अमित शाह की चाणक्य नीति
अमित शाह को पार्टी का बड़ा रणनीतिकार इसलिए भी माना जाता है क्योंकि उन्होंने उन राज्यों में भी भाजपा की सरकार बाने में सफलता हासिल की जहां पार्टी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। लेकिन महाराष्ट्र के सियासी मैदान में शायद यह पहली बार है जब व्यक्तिगत तौर पर अमित शाह की रणनीति पर सवाल खड़ा हुआ है। दरअसल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद जिस तरह से अचानक से फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली उसने हर किसी को चौंका दिया और इसका श्रेय अमित शाह को दिया गया।

भाजपा की साख पर बट्टा
लेकिन इन सबके के बीच सवाल यह खड़ा होता है क्या पार्टी ने सिर्फ अजित पवार के महज उस पत्र के भरोसे सरकार का गठन कर लिया जिसे एनसीपी विधायकों के समर्थन के तौर पर पेश किया गया है। अमित शाह को मंझा हुआ रणनीतिकार माना जाता है, ऐसे में महाराष्ट्र का विफल दांव ना सिर्फ शाह की साख पर सवाल खड़ा किया बल्कि पार्टी की छवि को भी बट्टा लगाने का काम किया है।

भाजपा के खिलाफ हुई जनभावना
महाराष्ट्र में चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद जिस तरह से शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की जिद पकड़ी उसके बाद लोगों की भावना भाजपा के पक्ष में थी। लेकिन अजित पवार के साथ गुपचुप तरीके से सरकार का गठन करके पार्टी की छवि को काफी नुकसान हुआ। पार्टी की इस भूल से ना सिर्फ भाजपा की साख को बट्टा लगा बल्कि उन तमाम तमाम नेताओं को
आगे आने का मौका दे दिया जो फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने से पहले बैकफुट पर थे।

शरद पवार राष्ट्रीय स्तर पर उभरे
चुनाव के नतीजे आने के बाद खुद शरद पवार ने कहा था कि प्रदेश की जनता ने हमे विपक्ष में बैठने का जनमत दिया है, सरकार बनाने की जिम्मेदारी भाजपा-शिवसेना की है। लेकिन फडणवीस सरकार गिरने के बाद शरद पवार ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि देश के बड़े नेता के तौर पर उभरे। इसकी बड़ी वजह यह है कि उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ऐलान किया कि वह फ्लोर टेस्ट के दिन खुद 162 विधायकों को लेकर सदन में आएंगे। शरद पवार की इस ललकार ने उन्हें एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर के नेता के तौर पर स्थापित किया।
-
Samrat Choudhary:'बिहार के सम्राट' बनने तक की इनसाइड स्टोरी, राजनीतिक सफर से फैमिली बैकग्राउंड तक जानें सबकुछ -
Bihar New CM: सम्राट चौधरी के घर पहुंचे राज्यपाल के सचिव, 'कागज' लेकर राजभवन लौटे, तय हो गया नए CM का नाम? -
Balen Shah India Visit: भारत दौरे से पहले बालेन शाह ने रखी कई शर्तें, कहा- सिर्फ फोटो खिंचवाने नहीं आऊंगा -
Samrat Choudhary: 'तू जहां-जहां चलेगा मेरा साया साथ होगा', कौन हैं सम्राट चौधरी की पत्नी? क्या करती हैं? -
Tamil Nadu: धमकी से मुस्लिम महिला की सुरक्षा तक—हजीना सैयद के आरोपों से हिली कांग्रेस, चुनाव से पहले फोड़ा बम -
कौन हैं 24 साल के प्रफुल हिंगे? IPL डेब्यू मैच के पहले ओवर में झटके 3 विकेट, तोड़ दी राजस्थान रॉयल्स की कमर -
Gold Rate Today: सोना खरीदारों की मौज! हफ्ते के पहले ही दिन धड़ाम से गिरे दाम, चेक करें अपने शहर का नया रेट -
MP CM Kisan Kalyan Yojana: 82 लाख किसानों को बड़ा तोहफा! 14-15 अप्रैल को खाते में आ सकती है किस्त -
Balen Shah Government: नेपाली गृह मंत्री के बयान ने उड़ा दी भारत की नींद, चीन को लेकर क्या कहा? -
Nitish Kumar ने इस्तीफा देते वक्त क्या कहा आखिरी पोस्ट में? जाति को लेकर कही दिल की बात -
युवराज सिंह के शिष्य की दुखद मौत, 3 दिन के बाद मिली लाश, IPL में आने से पहले ही चली गई जान -
मुस्लिम पति फरमान खान को छोड़कर कहां गईं Monalisa? क्या सच में हुईं गायब? वीडियो की सच्चाई आई सामने












Click it and Unblock the Notifications