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जासूसी कांड की आंच रिलायंस के आला अधिकारियों तक पहुंची

नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी कांड की लपटे देश के बड़े कॉर्पोर्ट घरानों तक पहुंच गयी है। बीती रात क्राइम ब्रांच ने कई बड़ी कंपनियों के अधिकारियो को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस मामले में अबतक कुल 12 गिरफ्तारियां हो चुकी है।

corporate espionage

पढ़े-रिपोर्टिंग नहीं चोरी करते थे पत्रकार

रिलायंस से लेकर एस्सार तक पर लटक रही तलवार

पेट्रोलियम मंत्रालय जासूसी केस में रिलायंस इंडिया लिमिटेड के शैलेश सक्सेना, एस्सार के विनय कुमार, केयर्न्स के केके नाईक, जुबलिएंट एनर्जी के सुभाष चंद्र और अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप रिलायंस के ऋषि आनंद को क्राइम ब्रांच ने बीती रात गिरफ्तार किया है।

इस जांच में सबसे बड़ी बात ये सामने आयी है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट से संबंधित भाषण के अंश को भी जासूसों के पास से पाया गया है। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को शांतनु सैकिया को गिरफ्तार किया जो कई साल तक आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिग कर चुके हैं और फिलहाल वह एक वेब पोर्टल चलाते हैं।

ऐसे हुई जासूसों की धरपकड़
पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी की भनक सरकार को बहुत पहले ही लग चुकी थी। इसके बाद इन जासूसों की धरपकड़ के लिए सरकार ने पूरा जाल बिछाया। दरअसल पिछले साल 2014 मे पेट्रोलियम मंत्रालय में फोटो कापी मशीन के पास एक अहम दस्तावेज पाया गया। जिससे साफ हो गया था कि जासूसी करने वाले ने दस्तावेजों की फोटो कापी करने के बाद एक पेपर मशीन पर ही भूल गया था।

इस घटना के बाद इसकी जानकारी तुरंत एनएसए को दी गयी साथ ही सुरक्षा एजेंसी की भी इससे अवगत कराया गया। इस घटना के बाद आईबी ने इस पूरे प्रकरण पर तकरीबन 45 दिनों तक कड़ी निगरानी रखी।

फर्जी आईडी के जरिए मंत्रालय में दाखिल होते थे जासूस

साथ ही सुरक्षा अधिकारियों ने पाया कि तीन व्यक्ति रोजाना मंत्रालय के भीतर गलत फर्जी आईडी कार्ड के जरिए मंत्रालय में दाखिल होते थे। ते तीनों व्यक्ति सफेद रंग की इंडिगो से मंत्रालय में दाखिल होते थे। इस कार पर फर्जी स्टीकर भी इन लोगों ने लगा रखा था

मंत्रालय के अंदर से बंद कर दिया जाता था सीसीटीवी कैमरा

इन तीन सदस्यों में से दो सदस्य मंत्रालय के भीतर जाते थे जबकि एक व्यक्ति कार के भीतर ही बैठा रहता था। आईबी ने इस निगरानी के दौरान पाया कि जब ये व्यक्ति मंत्रालय में दाखिल होते थे तो मंत्रालय का कोई अधिकारी सीसीटीवी कैमरों को बंद कर देता था।

इस पूरी गतिविधि पर कड़ी निगरानी के कुछ दिनों बाद जब सुरक्षा अधिकारी पूरे प्रकरण से आश्वस्त हो गये तो उन्होंने चोरी की इस वारदात को अंजाम देने वालों को पुलिस के हवाले करने का फैसला लिया जिसके बाद मंत्रालय में पुलिस को बुलाया गया।

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