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Bhimrao Ambedkar: बेटी के पिता बनना चाहते थे बाबा साहेब, डॉक्टर बीवी के गर्भपात से टूट गया सपना

Bhimrao Ambedkar की पहचान एक पहचान भारत रत्न से भी होती है। निधन के 34 साल बाद 1990 में इन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला। हालांकि, इनके कई ऐसे सपने भी हैं, जो पूरे ही नहीं हुए। जानिए मार्मिक कहानी

Bhimrao Ambedkar

Bhimrao Ambedkar एक ऐसा किरदार हैं, जिनके बारे में आम जनमानस के बीच बेहद सीमित जानकारी है। इनकी लिखी किताबों में कई बातें ऐसी हैं, जिनसे आज भी समाज का मार्गदर्शन होता है।

बाबा साहेब के अलावा उनसे जुड़े लोगों ने भी कई जरूरी किताबों को कलमबद्ध किया है। शोध करने वाले लोगों ने भी भीमराव के जीवन से जुड़ी अहम बातों को 20वीं और 21वीं सदी की पीढ़ी के सामने रखा है।

ऐसी ही एक किताब है भीमराव की दूसरी पत्नी डॉ सविता की आत्मकथा। मराठी भाषा में 1990 में प्रकाशित हुई इस किताब को करीब 50 साल से अंग्रेजी पढ़ा रहे नदीम खान ने अंग्रेजी भाषा के पाठकों के लिए तैयार किया है।

नदीम बताते हैं कि उन्हें जब बाबा साहेब से जुड़ी इस किताब बेहद जरूरी किताब की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने का फैसला लिया। उन्होंने र्जनभर से अधिक मराठी किताबों का अनुवाद किया है।

Bhimrao Ambedkar

सविता शादी के पांच साल बाद 1953 की घटना का जिक्र भी करती हैं। भीमराव एक बेटी के पिता बनना चाहते थे। सविता बताती हैं कि बहन की बेटी को गोद लेने का सुझाव दिया, लेकिन भीमराव गोद लेने के बदले जैविक रूप से बेटी के पिता बनना चाहते थे।

1953 में सविता गर्भवती हुईं। भीमराव उत्साहित थे। दोनों कश्मीर दौरे पर गए थे। शेख अब्दुल्ला के न्योते पर स्पेशल डिनर पर पहुंची दंपती को उस समय झटका लगा जब माई साहेब की तबीयत बिगड़ने लगी।

स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली लौटे भीमराव दिल्ली एयरपोर्ट से सीधा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन दंपती की खुशियों को ग्रहण लग गया। सविता के बच्चे को नहीं बचाया जा सका। गर्भपात के कारण डिप्रेशन में गए भीमराव को एक बार फिर बेटी गोद लेने का सुझाव दिया।

हालांकि, सविता की बहन की बेटी को गोद लेने का सपना भी अधूरा रह गया। बाबा साहेब इस दुनिया को अलविदा कह गए। बाबा साहेब की लाइफ में एक ऐसा समय भी आया था, जब सविता उनकी सिक्योरिटी को लेकर बेहद चिंतित रहीं। ये कहानी अगली कड़ी में

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