'...उस वक्त किसी को शिकायत नहीं थी', अब हिजाब विवाद में सामने आया भारत बायोटेक की को-फाउंडर का बयान
नई दिल्ली, 11 फरवरी: कर्नाटक में हिजाब को लेकर शुरु हुए विवाद को लेकर अब दुनियाभर में बहस हो रही है। भारत के चुनावी राज्यों में भी नेता इसको लेकर जमकर सियासत कर रहे। फिलहाल कर्नाटक हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक प्रतीक पहनने पर रोक लगा दी है, लेकिन इस पर अभी बहस जारी है। अब कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक की को-फाउंडर ने भी इस मुद्दे पर अपना विचार रखा है। उनकी ये प्रतिक्रिया काफी वायरल हो रही।

भारत बायोटेक की को-फाउंडर सुचित्रा एला ने ट्वीट कर लिखा कि साल 1960/70/80 में केंद्रीय विद्यालय में मेरे टीचर श्रीमती हिगिंस, मिस्टर फारूक, मिस्टर शास्त्री थे। अल्पसंख्यक संस्थानों में पढ़े सभी ने यूनिफॉर्म पहनी, उस वक्त किसी को शिकायत नहीं थी। उन्होंने बताया कि उनके सबसे अच्छे दोस्त और शिक्षक देश के विभिन्न राज्यों, क्षेत्रों और धर्मों से थे। कभी किसी में कोई दिक्कत नहीं हुई। ऐसे में सभी पढ़ें, जिएं, प्यार करें और आगे बढ़ें। उन्होंने ट्वीट के अंत में 15 से 18 आयुवर्ग से वैक्सीन लेने की भी अपील की।
ये है अब तक का अपडेट
कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पहनकर जाने वाली छात्राओं की एंट्री रोक दी गई थी। जिसको लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए। इसके अलावा कर्नाटक हाईकोर्ट में मामले में कई याचिकाएं डाली गई थीं, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। उस दौरान कोर्ट ने अंतिम फैसला तो नहीं सुनाया, लेकिन अगले आदेश तक स्कूल-कॉलेज में धार्मिक प्रतीक पहनने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि हम ये देखेंगे कि क्या हिजाब पहनना लोगों का मौलिक अधिकार है या नहीं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका डाली गई थी, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि पहले हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने दीजिए फिर हम करेंगे।












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