Bengaluru to Hyderabad HSR: बेंगलुरु से हैदराबाद महज 2 घंटे में, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर कब होगा शुरू?
Hyderabad-Bengaluru High-Speed Rail: देश में हाई-स्पीड रेल (HSR) नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को तेजी से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। HSR कॉरिडोर प्रोजेक्ट के पहले फेज को लेकर सेट्रल रेलवे के अधिकारियों ने कर्नाटक पहुंचकर राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (IDD) के साथ औपचारिक चर्चा की।
यह बैठक दक्षिण भारत की सबसे महत्वाकांक्षी पारगमन प्राेजेक्ट में से एक के लिए जमीनी स्तर पर समन्वय की दिशा में पहला कदम है। केंद्रीय बजट में इस Bullet Train संबंधी प्राेजेक्ट के ऐलान के बाद ये बैठक बहुत अहम मानी जा रही है।

महज दो घंटे में बेंगलुरू से हैदराबाद
इस कॉरिडोर का उद्देश्य इन बेंगलुरू और हैदराबाद दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी को बदलना है और कनेक्टिविटी बेहतर करनी है। वर्तमान में, 606 किलोमीटर की यह यात्रा एक्सप्रेस ट्रेन से लगभग 8.5 घंटे में पूरी होती है। HSR परियोजना का लक्ष्य यात्रा समय को घटाकर मात्र 2 घंटे करना है। 350 किमी/घंटा की स्पीड से ये ये ट्रेन दौड़ेगी।
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दोनों प्रमुख आईटी शहरों के बीच यात्रा समय घटकर लगभग 2 घंटे रह जाएगा, जो फिलहाल ट्रेन से 8-10 घंटे और सड़क मार्ग से 9-12 घंटे तक लगता है।
हाई स्पीड रेल कॉरिडोर कर्नाटक में कहां होगा?
हालांकि इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का अधिकांश हिस्सा पड़ोसी राज्यों से होकर गुजरेगा, फिर भी लगभग 100 किलोमीटर ट्रैक कर्नाटक राज्य से होकर गुजरेगा। यह लाइन तुमकुरु जिले से राज्य में प्रवेश करेगी और यहां तीन रणनीतिक स्टेशनों की योजना बनाई गई है, जो क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
कर्नाटक में होंगे ये तीन स्टेशन?
इनमें चिकबल्लापुर में अलीपुर पहला प्रवेश बिंदु बनेगा। देवनहल्ली स्टेशन केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (KIA) जाने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करेगा। वहीं, कोडिहल्ली को भविष्य के मेगा-जंक्शन के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो अंततः बेंगलुरु-चेन्नई HSR और नम्मा मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेगा।
गेगचेंजर साबित होगा ये हाई स्पीड हाई रेल कॉरिडोर
बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर देश में प्रस्तावित नए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बड़े आर्थिक और टेक्नोलॉजी हब शहरों को तेज रफ्तार रेल सेवाओं से जोड़ना है, ताकि बिजनेस ट्रैवल आसान हो और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिले।
उद्योग को होगा बड़ा फायदा
बेंगलुरु और हैदराबाद देश के दो बड़े आईटी और स्टार्टअप हब हैं। हाई-स्पीड रेल शुरू होने से दोनों शहरों के बीच बिजनेस यात्रा आसान होगी, हवाई यात्रा पर निर्भरता कम हो सकती है और औद्योगिक व निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे दक्षिण भारत में एक मजबूत आर्थिक कॉरिडोर विकसित होने की संभावना है।
कब तक शुरू हो सकती है सर्विस?
परियोजना की आधिकारिक समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार हाई-स्पीड रेल जैसी बड़ी परियोजनाओं को पूरा होने में आमतौर पर 8 से 12 वर्ष का समय लग सकता है, क्योंकि इसमें तकनीकी डिजाइन, फंडिंग और निर्माण कार्य के कई चरण शामिल होते हैं
कर्नाटक में 176 हेक्टेयर भूमि का हुआ अधिग्रहण
कर्नाटक में 176 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण आवश्यक है, जिसमें बेंगलुरु ग्रामीण जिलों जैसे चोकनहल्ली और नल्लाला के वन क्षेत्र शामिल हैं। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए, दक्षिण मध्य रेलवे ने राज्य सरकार से समर्पित नोडल अधिकारी की नियुक्ति का आग्रह किया है। यह अधिकारी अंतर-विभागीय सहयोग की देखरेख करेगा, ताकि भूमि अधिग्रहण में कानूनी या प्रशासनिक देरी न हो।
राज्य नेतृत्व परियोजना की क्षमता पर मुखर रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री एम.बी. पाटिल ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए 'ग्रोथ कनेक्टर' बताया है। कोडिहल्ली स्टेशन को अंततः चेन्नई HSR लाइन से जोड़कर, सरकार का लक्ष्य 'हाई-स्पीड ट्रायंगल' बनाना है। यह नेटवर्क दक्षिण भारत की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ेगा, जो सेवाओं, प्रतिभा और औद्योगिक वस्तुओं का त्वरित आदान-प्रदान सुगम बनाएगा।












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