Lok Sabha election 2024: झटके में गई 25,000 शिक्षकों की नौकरी, चुनावों में TMC को कितना बड़ा झटका?
West Bengal Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण से पहले शिक्षक भर्ती घोटाले के चलते एक झटके में 25 हजार से ज्यादा लोगों की नौकरियां जाना पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका है।
तथ्य यह है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए 2016 में ममता बनर्जी सरकार की ओर से की गई नियुक्तियों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद 25,753 लोगों की नौकरियां एक झटके में चली गई हैं और उन्हें अबतक प्राप्त वेतन भी 12% ब्याज के साथ लौटाना पड़ेगा।

25,753 स्कूल टीचरों की गैर-कानूनी नियुक्तियां हाई कोर्ट ने की रद्द
कलकत्ता हाई कोर्ट ने जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वह चार हफ्तों के अंदर इन शिक्षकों से पैसों की भरपाई करें। कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस देवांग्शु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने कहा है कि स्कूल टीचरों की नियुक्ति गैर-कानूनी तरीके से की गई थी।
अदालत का आदेश, सत्ताधारी टीएमसी के लिए बड़ा झटका
अदालत ने अपवाद के तहत सिर्फ सोमा दास की नियुक्ति को मानवीय आधार पर कायम रखा है, जो कैंसर पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। टीएमसी की राजनीति के लिए यह आदेश कई मायने में बहुत ही बड़ा झटका माना जा रहा है।
सीबीआई नियुक्ति प्रक्रिया की जांच करके तीन महीने के भीतर देगी रिपोर्ट
कलकत्ता हाई कोर्ट की जिस बेंच ने यह आदेश दिया है, वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हुआ था। अब अदालत ने सीबीआई से यह भी कहा कि वह नियुक्ति प्रक्रिया की आगे जांच करे और तीन महीनों के भीतर रिपोर्ट जमा करे। अदालत ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) को नियुक्ति के लिए ताजा प्रक्रिया शुरू करने को भी कहा है।
टीचर भर्ती घोटाले के आरोप में टीएमसी के कई नेता पूर्व मंत्री जेल में
वैसे आयोग के चेयरमैन सिद्धार्थ मजुमदार ने कहा कि वे हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। तथ्य यह भी है कि इस घोटाले के सिलसिले में कई पूर्व अधिकारियों के अलावा तृणमूल के कुछ बड़े नेता भी जेल में हैं, जिनमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी शामिल हैं।
'न्यायपालिका और निर्णयों को प्रभावित' कर रहे हैं बीजेपी नेता- ममता बनर्जी
मामला करीब 26 हजारों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा है। जाहिर है कि टीएमसी की प्रतिक्रिया उनकी सहानुभूति बटोरने की लग रही है। क्योंकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां तक आरोप लगा दिया है कि बीजेपी के नेता, 'न्यायपालिका और निर्णयों को प्रभावित' कर रहे हैं।
इसके लिए उन्होंने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पिछले हफ्ते के राजनीतिक 'विस्फोट' वाले बयान का हवाला दिया है। ममता का कहना है, 'उन्होंने एक विस्फोट की भविष्यवाणी की। क्या विस्फोट है? 26,000 लोगों की नौकरियां छीनना और उन्हें मरने के लिए छोड़ देना। अगर उन्होंने फैसला नहीं लिखा तो उन्हें कैसे पता चला कि अदालत क्या फैसला सुनाएगी।'
हजारों नौकरियां गईं, लाखों की उम्मीद जगी
ममता के चुनावी बयान का दूसरा पहलू ये है कि 2016 में प्रदेश स्तर पर जो परीक्षा हुई थी, उसमें 23 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे। कुछ याचिकाकर्ताओं के वकीलों के मुताबिक तब पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग ने 24,640 खाली पदों के बदले उससे कहीं ज्यादा 25,753 लोगों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया था।
सक्षम उम्मीदवारों के चेहरों पर एक मुस्कुराहट आ गई-बीजेपी
मतलब, अगर हजारों लोगों पर लगी-लगाई नौकरियां गई हैं, तो लाखों को नई परीक्षा के बाद निष्पक्ष परीक्षा के माध्यम से नई नौकरियां मिलने की एक उम्मीद भी जगी है।
यही वजह है कि बीजेपी को टीएमसी पर मजे लेने का मौका मिल गया है। बंगाल बीजेपी ने टीएमसी सुप्रीमो और उनके भतीजे और पार्टी के नंबर-2 नेता अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा है, 'हाई कोर्ट ने 2016 में हुई एसएससी भर्तियों में से करीब 24,000 रद्द कर दिए हैं...सीबीआई किसी को भी हिरासत में ले सकती है। सक्षम उम्मीदवारों के चेहरों पर एक मुस्कुराहट आ गई है। अब भतीजे और बुआ के जाने की बारी है। टीएमसी बेनकाब।'












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