Bengal Political Row: बंगाल में फिर 'केंद्र बनाम दीदी', ED रेड के खिलाफ TMC ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा
Bengal Political Row: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। I-PAC ऑफिस पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सीधे कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख कर लिया है।
इसे महज़ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीति की सीधी टकराहट के रूप में देखा जा रहा है। ममता बनर्जी का आरोप है कि बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ उसकी आक्रामक राजनीतिक मुहिम से केंद्र सरकार असहज है।

पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल से पहले विपक्ष को दबाने और डराने के मकसद से केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
TMC ने याचिका में क्या कहा?
TMC की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि पार्टी लगातार बंगाल में SIR के खिलाफ आवाज़ उठा रही है और इसी कारण उसे निशाना बनाया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ED ने राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और उसके को-फाउंडर के आवास पर छापेमारी कर जानबूझकर पार्टी के कामकाज को बाधित करने की कोशिश की।
गोपनीय डेटा जब्त करने का आरोप
TMC ने अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ED ने छापेमारी के दौरान पार्टी से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किए हैं, जो पूरी तरह अवैध है। पार्टी का दावा है कि इन दस्तावेजों में चुनावी रणनीति, संगठनात्मक जानकारी और आंतरिक राजनीतिक डेटा शामिल है, जिसे कानून के दायरे से बाहर जाकर कब्जे में लिया गया। TMC ने कोर्ट को बताया कि यह सिर्फ एक जांच एजेंसी की कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विपक्षी दल की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
याचिका में कहा गया है कि I-PAC, जो एक राजनीतिक रणनीति और कंसल्टेंसी संस्था है, का कार्यालय पूरी तरह पेशेवर तरीके से काम करता है। इसके बावजूद ED ने इसे "राजनीतिक रणनीति कार्यालय" बताकर छापा मारा और वहां मौजूद डेटा को जब्त कर लिया। TMC का कहना है कि इससे न केवल पार्टी बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।
कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता हाई कोर्ट से ED की इस कार्रवाई पर रोक लगाने और जब्त किए गए सभी दस्तावेज व डेटा को वापस करने की मांग की है। पार्टी ने यह भी आग्रह किया है कि कोर्ट यह स्पष्ट करे कि जांच एजेंसियां राजनीतिक दलों और उनके रणनीतिक सहयोगियों को डराने या दबाव बनाने के लिए इस तरह की कार्रवाई नहीं कर सकतीं।
ED की इस कार्रवाई के बाद बंगाल की राजनीति और गरमा गई है। TMC पहले ही इसे केंद्र सरकार की "राजनीतिक बदले की राजनीति" करार दे चुकी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। अब सभी की नजरें कोलकाता हाई कोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस मामले की सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि ED की कार्रवाई को वैध माना जाएगा या TMC के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एजेंसी पर सवाल खड़े किए जाएंगे।
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