Bengal Election 2026: TMC ने भरी हुंकार! 1 महीने तक बंगाल मथने निकलेंगे अभिषेक बनर्जी, 'दीदी' को कितना फायदा?
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल 2026 विधानसभा चुनावों (Bengal Assembly Election 2026) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि संभवतः अप्रैल महीने में राज्य में कई चरणों में मतदान कराए जा सकते हैं।
चुनावी बिगुल बजने से पहले ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां भाजपा सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं टीएमसी लगातार चौथी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुकी है।

इस बीच ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे और TMC के बड़े चेहरे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने चुनावी बिगुल फूंक दिया है और एक बार फिर अपनी जीत की ताल ठोकने के लिए मैदान में उतर रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी का चुनावी शंखनाद
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बड़ी चुनावी पहल की है। अभिषेक बनर्जी आज से एक महीने लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं, जिसके तहत वह पश्चिम बंगाल के सभी जिलों का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान कहीं रोड शो आयोजित किए जाएंगे तो कहीं बड़ी जनसभाएं होंगी।
पार्टी इसे एक मेगा जनसंपर्क अभियान के तौर पर देख रही है, जो सीधे तौर पर 2026 विधानसभा चुनाव की नींव रखेगा। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान पार्टी जनता को बताएगी कि पिछले तीन कार्यकालों में उसने राज्य के लिए क्या-क्या काम किए हैं और आने वाले समय में उसकी क्या योजनाएं हैं। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान का फोकस 'बांग्ला अस्मिता' पर रहेगा।
'बांग्ली अस्मिता कार्ड' पर टीएमसी का बड़ा दांव
टीएमसी इस चुनाव को बांग्ला संस्कृति, भाषा और पहचान से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि बंगाल की अस्मिता का मुद्दा उसे राजनीतिक बढ़त दिला सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चुनाव आयोग जैसी केंद्रीय संस्थाओं के कथित हस्तक्षेप को भी मुद्दा बनाया जा सकता है। इस यात्रा का नारा रखा गया है 'जोतोई करो हमला, आबार जितबे बांग्ला', जिसका अर्थ है कितना भी हमला कर लो, एक बार फिर बंगाल ही जीतेगा। यह नारा साफ तौर पर टीएमसी की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह खुद को बंगाल की पहचान का रक्षक बताने की कोशिश कर रही है।
टिकट बंटवारे पर भी होगा मंथन
अभिषेक बनर्जी की यह यात्रा सिर्फ जनसंपर्क तक सीमित नहीं है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस दौरान वह टीएमसी विधायकों को लेकर जनता से सीधा फीडबैक भी लेंगे। यही फीडबैक आगे चलकर टिकट बंटवारे में अहम भूमिका निभाएगा। जिन सीटों पर स्थानीय स्तर पर ऐंटी-इनकम्बेंसी सामने आएगी, वहां मौजूदा विधायकों को बदले जाने की भी संभावना है।
इतना ही नहीं, जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक हैं, वहां भी अभिषेक बनर्जी कार्यकर्ताओं और आम जनता से संवाद करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि उन सीटों पर टीएमसी की स्थिति कैसे मजबूत की जाए। पार्टी नहीं चाहती कि किसी एक विधायक या नेता के खिलाफ नाराजगी का खामियाजा पूरे चुनाव में भुगतना पड़े।
लगातार बढ़ती अभिषेक बनर्जी की साख
इस यात्रा को अभिषेक बनर्जी के बढ़ते राजनीतिक कद से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि उन्हें पार्टी में 'नंबर दो' माना जाता है, लेकिन उनकी राय को अब खुद ममता बनर्जी भी गंभीरता से लेती हैं। अभिषेक बनर्जी इससे पहले भी यात्राएं निकाल चुके हैं। साल 2023 में उनकी यात्रा का फायदा पार्टी को पंचायत चुनावों में मिला था और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में भी टीएमसी की स्थिति मजबूत हुई।
कहा जाता है कि लोकसभा चुनाव में कई उम्मीदवारों के चयन में अभिषेक बनर्जी की अहम भूमिका रही। युसूफ पठान और जगदीश चंद्र बर्मा जैसे चेहरों को मैदान में उतारने का फैसला भी उन्हीं की रणनीति का हिस्सा माना जाता है। इन नेताओं की जीत के बाद पार्टी में अभिषेक बनर्जी का प्रभाव और मजबूत हुआ है।
चुनावी रण में TMC पूरी ताकत से मैदान में
कुल मिलाकर, अभिषेक बनर्जी की यह महीने भर की यात्रा टीएमसी के लिए सिर्फ एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि 2026 विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने का अहम आधार मानी जा रही है। बांग्ला अस्मिता, संगठनात्मक मजबूती, टिकट बंटवारा और भाजपा को घेरने की रणनीति इन सभी पहलुओं पर इस यात्रा का गहरा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस अभियान का बंगाल की सियासत पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ता है।












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