Belagavi dispute: उद्धव की शिवसेना से भिड़ी कांग्रेस, आदित्य ठाकरे की किस मांग से सिद्दारमैया हुए अपसेट?
Belagavi dispute between Karnataka and Maharashtra: महाराष्ट्र चुनाव में महा विकास अघाड़ी (MVA) की करारी हार के बाद कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच आई तल्खी अब बेलगावी सीमा विवाद को लेकर तकरार में बदल गई है। शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने बेलगावी को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग की तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इसे 'बचकाना' कह दिया।
बेलगावी (बेलगाम) दशकों से महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद की वजह रहा है। हर साल जब कर्नाटक विधानसभा का सत्र बेलगावी में आयोजित होता है, दोनों प्रदेशों के नेताओं की ओर से इसपर बयानबाजी शुरू हो जाती है।

बेलगावी को लेकर कांग्रेस-शिवसेना (यूबीटी) भिड़ी
इसी कड़ी में सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र की सीमा से सटे बेलगावी शहर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग की तो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की अगुवाई कर रहे सीएम सिद्दारमैया भड़क गए।
...तो क्या हम चुप बैठेंगे?- सिद्दारमैया
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा, 'यह एक बचकाना बयान है। महाजन रिपोर्ट फाइनल है। इसलिए न तो हमें किसी चीज की मांग करनी चाहिए और न ही उन्हें करनी चाहिए। इसे केंद्र शासित प्रदेश कैसे घोषित किया जा सकता है? और अगर महाराष्ट्र एकीकरण समिति प्रदर्शन करता है, क्या हम चुप बैठेंगे?'
इससे पहले महाराष्ट्र एकीकरण समिति की ओर से बेलगावी में 9 दिसंबर को आयोजित मराठी सम्मेलन के लिए महाराष्ट्र के सभी प्रमुख दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था। लेकिन, कर्नाटक सरकार ने 'बाहरी' नेताओं के बेलगावी आने पर कथित तौर पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह सम्मेलन बेलगावी में सोमवार से शुरू हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र के विरोध के तौर पर आयोजित किया गया था।
शिवसेना (यूबीटी) ने बेलगावी को UT बनाने की मांग की है
इसी दौरान सोमवार को आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखकर बेलगावी को केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाने के लिए एक प्रस्ताव आगे भेजने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बेलगावी में मराठी-भाषी लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।
ठाकरे बार-बार भड़काने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?-बीजेपी नेता
यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसको लेकर दोनों प्रदेशों के दलों के नेता अपने-अपने राज्य का पक्ष लेते हैं। मसलन, कर्नाटक के बीजेपी नेता सीएन अश्वस्थ नारायण ने भी ठाकरे के रवैए का विरोध किया है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने कहा, 'महाजन आयोग पहले ही एक साफ रिपोर्ट दे चुका है। वे (आदित्य ठाकरे)बार-बार भड़काने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? उन्होंने इस बात पर फोकस करना चाहिए कि महाराष्ट्र के लोगों की मदद कैसे की जाए?'
बेलगावी सीमा विवाद क्या है?
बेलगावी को लेकर सीमा विवाद 1957 से चल रहा है। भाषाई आधार पर राज्यों का बंटवारा हुआ था। बेलगावी पहले बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था, जहां बड़ी तादाद में मराठी-भाषी लोग रहते हैं। आज भी 800 से ज्यादा ऐसे मराठी-भाषी गांव हैं,कर्नाटक में हैं। इसी आधार पर महाराष्ट्र इस इलाके पर अपना दावा जताता है।
कर्नाटक का कहना है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत भाषाई आधार पर सीमाओं का निर्धारण किया गया और इसको लेकर 1967 की महाजन आयोग की रिपोर्ट फाइनल है। महाजन आयोग ने कुछ मराठी-भाषी गांवों को महाराष्ट्र को देन की सिफारिश की थी, लेकिन बेलगावी को कर्नाटक के ही हिस्से में छोड़ दिया।
इसके सियासी और आर्थिक महत्त्व को देखते हुए दोनों ही राज्य इसे अपनी नाक का सवाल बनाए हुए हैं। इसको लेकर 2004 में सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई, लेकिन इसपर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है। (एजेंसियों के इनपुट के साथ)












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