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मेहुल चोकसी डॉमिनिका में पकड़े गए, क्या अब प्रत्यर्पण होगा आसान?

चोकसी
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29 नवंबर, 2011 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक ख़बर आई कि यहां भारत का पहला गोल्ड एटीएम लगाया गया है. लोग इस एटीएम से सोने-चांदी के सिक्के और तमाम क़िस्म के जवाहरात ख़रीद सकते थे. लेकिन ये मशीन लोगों को लुभा नहीं पाई. आसपास के दुकानदारों ने बताया कि बमुश्किल ही कोई ग्राहक इसका इस्तेमाल करता है.

एक वक़्त भारत के हीरा कारोबार के पोस्टर बॉय रहे मेहुल चोकसी पर निगाह डालें, तो उनकी कहानी भी इस एटीएम जैसी ही नज़र आती है. उनकी हर शुरुआत हीरे जैसी चमकदार थी. उनके तौर-तरीक़े हमेशा सोने जैसे लचीले रहे. लेकिन, नतीजा हर बार ऐसा, जैसे कोई गहनों की दुकान पर ठग लिया गया हो.

आप पूछ सकते हैं कि उस एटीएम से मेहुल चोकसी क्यों याद आते हैं. जवाब ये है कि वो एटीएम मेहुल की कंपनी गीतांजलि ने लगाया था. अगला सवाल होगा कि मेहुल चोकसी ही क्यों याद आते हैं. इसके कई जवाब हैं.

मेहुल ने पिता चीनूभाई चोकसी के हीरों के सिर्फ़ कटिंग-पॉलिशिंग के कारोबार को विदेशी कंपनियां ख़रीदने तक का रास्ता दिखाया. पर एक वक़्त आया, जब कंपनी की बदनामी से कर्मचारियों को ही नौकरी के लाले पड़ गए.

बहन के नाम पर बनी उनकी कंपनी गीतांजलि ने 2006 में आईपीओ में क़दम रखा, तो 330 करोड़ रुपए इकट्ठा किए. फिर 2013 में वो वक़्त आया, जब सेबी ने मेहुल की फ़र्म को हेर-फ़ेर के शक में 6 महीने के लिए स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग से रोक दिया.

2008 में कटरीना कैफ़ ने उनके हीरों का प्रचार किया, तो एक साल में कंपनी की बिक्री 60 फ़ीसदी बढ़ गई. फिर 2018 में कंपनी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव ने आरोप लगाए कि गीतांजलि अपने ग्राहकों को नकली हीरे बेचती रही.

2013 में जहां गीतांजलि का शेयर 600 रुपए का बिक रहा था, वहीं फ़रवरी 2018 में ये 33.80 रुपए पर आ गया था. पंजाब नेशनल बैंक का कथित घोटाला खुलने की भनक लगने से पहले ही वो परदेस की नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके थे. उन्होंने मुल्क भी ऐसा चुना, जहां एक लाख डॉलर निवेश करके नागरिकता मिल सकती थी. आज उसी मुल्क के प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मेहुल चोकसी हमारे लिए शर्म का सबब बन गए हैं.

एक वक्त था, जब भारत के सबसे ताक़तवर शख़्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से खड़े होकर चोकसी को 'मेहुल भाई' कहा था. फिर वो समय भी आया, जब मोदी सरकार के मंत्री रविशंकर प्रसाद को उनका तार्रुफ़ 'मेहुल चोकसी... वही नाम है न उनका...' कहकर कराना पड़ा.

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चोकसी के डॉमिनिका पहुंचने पर उठते सवाल

भारतीय इतिहास के कथित सबसे बड़े बैंक घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी अब भगोड़े कारोबारी कहलाते हैं. उनके बारे में सबसे ताज़ा ख़बर ये है कि वो एंटीगा, जहां की उन्होंने नागरिकता ली थी, वहां से पड़ोस के देश डॉमिनिका चले गए और पकड़ लिए गए. इसका पता चलने पर एंटीगा के प्रधानमंत्री ने डॉमिनिका को सलाह दी कि मेहुल को सीधे भारत के हवाले कर दिया जाए.

भारत वैसे भी महीनों से चोकसी के प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटा है. हालांकि, मेहुल के वकील का कहना है कि उनसे बात होने पर ही पता चलेगा कि उन्हें एंटीगा से डॉमिनिका 'कैसे ले जाया गया'. चोकसी के डॉमिनिका पहुंचने पर ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या अब चोकसी को प्रत्यर्पित करना आसान होगा या और मुश्किल हो जाएगा.

ज़रा पिछली कहानी याद कर लेते हैं

जनवरी 2018 में मेहुल चोकसी भारत छोड़कर चले गए. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसकी ठीक-ठीक तारीख़ 4 जनवरी 2018 बताती हैं. इसी महीने के आख़री हफ़्ते में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने मेहुल चोकसी, उनके भतीजे नीरव मोदी और अन्य साथियों के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी की पहली तहरीर दी. बैंक ने इन पर 280 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था.

31 जनवरी आते-आते सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया. 14 फ़रवरी को पीएनबी अपनी अंतरिम जांच पूरी करके बॉम्बे स्टॉक एक्सजेंच पहुंचा. वहां बैंक ने बताया कि उसकी साउथ मुंबई की एक ब्रांच में 11,380 करोड़ के 'फ़र्ज़ी और अनधिकृत लेनदेन' पाए गए हैं. 15 फ़रवरी को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने केस दर्ज किया. 23 फ़रवरी को मुंबई के रीजनल पासपोर्ट ऑफ़िसर ने चोकसी का पासपोर्ट रद्द किया. दो महीने की जांच के भीतर घोटाले का अनुमान 13,578 करोड़ रुपए पहुंच गया.

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मेहुल चोकसी पर आरोप क्या हैं?

शुरुआती जांच में पता चला कि चोकसी और नीरव मोदी ने बैंक के कुछ अधिकारियों से सांठ-गांठ करके फ़र्ज़ी लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग यानी LOU जारी कराए थे. ये दस्तावेज़ एक क़िस्म की गारंटी होता है, जो बैंक अपने ग्राहक को जारी करता है. फिर ग्राहक इस गारंटी के बूते किसी और भारतीय बैंक की विदेशी ब्रांच से पूंजी ले सकता है. इसे कम मियाद के लिए हासिल की गई एक निश्चित क्रेडिट समझ सकते हैं. पर इसके बदले ग्राहक को कुछ पैसा बैंक में जमा करना होता है.

चोकसी और मोदी के मामले में आलम ये था कि न तो कोई पैसा जमा कराया गया था और न क्रेडिट की कोई लिमिट थी. आमतौर पर ग्राहक LOU के आधार पर किसी और बैंक से पूंजी लेते हैं, लेकिन इस मामले में LOU भी पीएनबी जारी कर रहा था और पैसा भी पीएनबी की ही विदेशी ब्रांच से निकाला जा रहा था. फिर जो पैसा ज़्यादा से ज़्यादा 90 दिनों में वापस आ जाना चाहिए था, वो कभी आया भी नहीं.

केस खुलने के बाद ईडी ने चोकसी पर प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया था.

https://twitter.com/ANI/status/1397634721509609472

एंटीगा की नागरिकता कैसे मिलती है?

जब चैनलों पर 'देश के कथित सबसे बड़े घोटाले' की पट्टियां दौड़ रही थीं, तब सबकी निगाहें चोकसी और नीरव मोदी को खोज रही थीं. चोकसी देश तो पहले ही छोड़ चुके थे. हैरानी तब हुई, जब पता चला कि वो नवंबर 2017 में ही एंटीगा की नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके थे. 15 जनवरी, 2018 को तो उन्हें एंटीगा के नागरिक की शपथ भी दिलवा दी गई थी.

हेनली ऐंड पार्टनर्स के मुताबिक़ एंटीगा की नागरिकता पाने के चार तरीक़े हैं. पहला, आप एंटीगा के नेशनल डेवलपमेंट फ़ंड में एक लाख अमेरिकी डॉलर दान कीजिए. दूसरा, आप यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्ट इंडीज़ में डेढ़ लाख अमेरिकी डॉलर दान कीजिए. तीसरा, सरकारी इजाज़त वाले रियल एस्टेट में दो लाख अमेरिकी डॉलर इन्वेस्ट कीजिए. चौथा, नागरिकता पाने के लिए तय किए गए किसी बिज़नेस में डेढ़ लाख अमेरिकी डॉलर इन्वेस्ट कीजिए.

इसके अलावा कुछ फ़ीस भी लगती हैं. फिर अगर आप ये सिद्ध कर पाए कि आपका रिकॉर्ड साफ़ है, कोई मुकदमा वगैरह नहीं है और एंटीगा को आप भले व्यक्ति लगे, तो आपको तीन से छ: महीने में नागरिकता मिल जाएगी.

एंटीगा का नागरिक एक साथ दो नागरिकता रख सकता है. वहीं सुरक्षा के लिहाज़ से एंटीगा दूसरे मुल्कों को किसी शख़्स के नागरिकता लेने के बारे में सूचित नहीं करता है. हां, 2014 में वहां की सरकार ने ये फ़ैसला ज़रूर लिया था कि नागरिकता लेने वाला अपना नाम नहीं बदल सकता. हेनली ऐंड पार्टनर्स की लिस्ट में एंटीगा का पासपोर्ट दुनिया का 28वां सबसे ताक़तवर पासपोर्ट है, जिसके बूते आप 151 देशों में बिना वीज़ा यात्रा कर सकते हैं.

मोदी
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चोकसी का प्रत्यर्पण इतना मुश्किल क्यों?

किसी अभियुक्त के प्रत्यर्पण के लिए दो देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि यानी एक्सट्रडीशन ट्रीटी होना ज़रूरी है. यानी दो देशों ने समझौता किया हो कि अगर उन्हें अपने देश में दूसरे देश का वॉन्टेड व्यक्ति मिलेगा, तो वो उसे वापस भेज देंगे. प्रत्यर्पण संधि न भी हो, तो एक्सट्रेडीशन अरेंजमेंट से काम बन जाता है. इसमें दोनों देश अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के आधार पर आरोपी को एक-दूसरे को सौंप देते हैं.

चोकसी के एंटीगा में होने की बात पता चलने पर भारत सरकार ने कोशिशें शुरू तो कीं. लेकिन, एंटीगा न तो उन 47 देशों में शामिल है, जिनके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है और न उन 11 देशों में, जिनके साथ प्रत्यर्पण अरेंजमेट है. उधर मामला बढ़ता देख चोकसी ने जुलाई 2018 एंटीगा की हाईकोर्ट से गुज़ारिश की कि उनके पास संविधान के आधार पर नागरिकता है, इसलिए एंटीगा सरकार को उन्हें पकड़ने और प्रत्यर्पित करने से रोका जाए.

फिर हुई कानूनी लिखा-पढ़ी

3 अगस्त 2018 को भारतीय विदेश मंत्रालय बिना किसी हल्ले-गुल्ले के एक नोटिफ़िकेशन जारी करता है. इसमें लिखा था कि एंटीगा के कानून के आधार पर भारत को कॉमनवेल्थ देश माना जाएगा और भारत के प्रत्यर्पण कानून 1962 के तीसरे चैप्टर के अलावा बाकी नियम-कानून दोनों देशों के बीच लागू होंगे.

असल में इस तीसरे चैप्टर में ही दूसरे देश से किसी अभियुक्त के प्रत्यर्पण के नियमों का ज़िक्र है और एंटीगा कॉमनवेल्थ क़ानूनों के मुताबिक़ ही चोकसी को प्रत्यर्पित कर सकता था.

जब भारत-एंटीगा के बीच बात बनती दिख रही थी, तब सितंबर 2018 में मेहुल पहली बार सामने आए. उन्होंने एक वीडियो में कहा ईडी के आरोप आधारहीन हैं, उनकी संपत्ति गैर-कानून तरीक़े से ज़ब्त की गई थी और जब उनका पासपोर्ट रद्द ही कर दिया गया, तो पासपोर्ट सरेंडर करने का सवाल ही नहीं उठता.

चोकसी एंटीगा के लिए सिरदर्द कैसे बने?

मेहुल चोकसी को लेकर एंटीगा सरकार और इसके प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन क्या महसूस कर रहे थे, ये सितंबर 2019 में पता चला.

एक अंतरराष्ट्रीय समारोह में जब ब्राउन से चोकसी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'हमारी मेहुल को रखने की कोई इच्छा नहीं है. वो हमारे किसी काम के नहीं हैं. लेकिन मेहुल के बारे में भारतीय अधिकारियों ने ही स्वीकृति दी थी कि वो अच्छे व्यक्ति हैं. भारत ने हमें ग़लत जानकारी दी और इसकी ज़िम्मेदारी भारतीय अधिकारियों को लेनी होगी. हमने भारतीय अधिकारियों की दी जानकारी के आधार पर मेहुल को नागरिकता दी और अब वो कह रहे हैं कि मेहुल धोखेबाज़ हैं.'

वैसे 2019 के मध्य में ब्राउन एक बार ये ज़रूर कह चुके थे कि जब एंटीगा में चोकसी के सारे कानूनी विकल्प ख़त्म हो जाएंगे, तो वो चोकसी को भारत प्रत्यर्पित कर देंगे.

ब्राउन की यही तल्खी चोकसी के डॉमिनिका में पकड़े जाने के बाद भी दिखी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'हमने डॉमिनिका से कहा है कि वो गैर-कानून रूप से घुसने के आरोप में चोकसी को पकड़ें और भारत को सौंप दें. हम उन्हें नहीं चाहते हैं. एंटीगा से चोकसी का निकलना बहुत बड़ी ग़लती थी. डॉमिनिका सरकार एंटीगा और भारत सरकार की मदद कर रही है. डॉमिनिका ने चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने पर सहमति दी है.'

क्या चोकसी को डॉमिनिका से लाना आसान होगा

इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने विदेश मामलों पर निगाह रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल से बात की.

आदित्य बताते हैं, "हमें एंटीगा के पीएम ब्राउन की मंशा समझनी चाहिए, जो चोकसी को मुसीबत की तरह देखते हैं और चाहते हैं कि चोकसी एंटीगा वापस न आएं. ब्राउन के मुताबिक़ डॉमिनिका भी चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए राज़ी है. हां, कानूनी मसला ज़रूर आड़े आ सकता है, क्योंकि भारत और डॉमिनिका के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है."

पर इस मामले में 'वैक्सीन डिप्लोमेसी' का भी ज़िक्र आता है, जिसके बारे में एंटीगा के प्रधानमंत्री से भी सवाल पूछे जा चुके हैं.

आदित्य कहते हैं, "हमें नहीं भूलना चाहिए भारत ने वैक्सीन मैत्री के तहत डॉमिनिका को कोविशील्ड की हज़ारों डोज़ मुहैया कराई थीं. इसके बाद वहां के पीएम रूज़वेल्ट स्केरिट ने भावुक होकर कहा था कि भारत ने उनकी गुहार सुनी. इससे पहले 2011, 2015 और 2017 में भी भारत डॉमिनिका की मानवीय आधार पर मदद की थी. ज़ाहिर है कि डॉमिनिका इसे ज़ेहन में रखेगा."

आदित्य बताते हैं, "पोर्ट ऑफ़ स्पेन में पदस्थ भारतीय हाई कमिश्नर अरुण कुमार साहू डॉमिनिका, एंटीगा और इंटरपोल के साथ संपर्क में हैं. जिस तरह छोटा राजन और क्रिश्चियन माइकल के दूसरे देश के नागरिक होने के बावजूद प्रत्यर्पण में भारत को सफलता मिली थी, उसी तरह इस केस में भी मिल सकती है."

मार्च 2021 में भारत ने एंटीगा को भी 40 हज़ार वैक्सीन दी थीं, जिन्हें ख़ुद प्रधानमंत्री ब्राउन ने एयरपोर्ट पर रिसीव किया था.

16 हज़ार करोड़ से ज़्यादा कारोबारी, जो इंटरपोल के निशाने पर आया

2017 तक भारत में चोकसी के ख़िलाफ़ कोई केस नहीं था. इसी आधार पर मुंबई ने उन्हें 'अच्छे व्यक्ति' का वेरिफ़िकेशन सर्टिफ़िकेट दिया था, जिसके आधार पर उन्होंने एंटीगा की नागरिकता ली. पर दूसरी सूरत ये है कि चोकसी इंटरपोल की तरफ़ से जारी रेड कॉर्नर नोटिस का सामना कर रहे हैं, जिसकी वजह से उन्हें डॉमिनिका में पकड़ना और आसान हो गया था.

तीन दिनों के नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब वो डॉमिनिका पुलिस के कब्ज़े में तो आ गए हैं. अब देखना ये है कि उन्हें प्रत्यर्पित करने के लिए भारत सरकार को फिर लंबी ज़ोर-आजमाइश करनी होगी या चोकसी की किस्मत फिर उस गोल्ड एटीएम जैसी साबित होगी.

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