लॉटरी खरीदने के लिए SBI के बैंक मैनेजर ने 84 लाख रुपए के सिक्के उड़ाए
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बैंक मैनेजर की ऐसी हरकत सामने आई है जिसपर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल है। यहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर तारक जयसवाल ने बैंक को 84 लाख रुपए का चूना लगाया है। 35 वर्षीय तारक कोलकाता से तकरीबन 80 किलोमीटर दूर मेमारी स्थित एसबीआई की ब्रांच में पिछले 17 महीने से बतौर वरिष्ठ असिस्टैंट मैनेजर तैनात है, लिहाजा उनके पास करेंसी चेस्ट को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है, जिसका फायदा उठाते हुए उन्होंने बैंक से 84 लाख रुपए उड़ा दिए। गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरा पैसा उन्होंने चिल्लर यानि सिक्कों के तौर पर बैंक से उड़ाया है।

पुलिस ने किया गिरफ्तार
गौर करने वाली बात यह है कि सिक्कों में सबसे बड़े मूल्य का सिक्क 10 रुपए का है ऐसे में 84 लाख रुपए उड़ाने के लिए तकरीबन 840000 सिक्कों को उड़ाने की जरूर है। यानि 17 महीने पर नजर डाले तो इस लिहाज से तारक ने हर महीने बैंक को 50 हजार सिक्के की चपत लगाई है। यानि महीने में तकरीबन 25 दिन बैंक खुलते हैं इस लिहाज से तारक हर रोज 200 सिक्के अपने साथ ले जाते थे और इस बात की किसी को भनक नहीं लगी। लेकिन जल्द ही तारक की चोरी पकड़ी गई और शुक्रवार को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद उन्होंने अपने गुनाह को कबूल भी कर दिया। शनिवार को स्थानीय कोर्ट ने तारक को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

गिनती में आई बात सामने
ईस्ट बर्धमान के एसपी भाष्कर मुखर्जी ने बताया कि जयसवाल ने अपने जुर्म को कबूल कर लिया है और दावा किया है कि उन्होंने यह पूरा पैसा लॉटरी के टिकट खरीदने में लगा दिए। हम अभी भी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या जयसवाल के इस जुर्म में उनका किसी और ने भी साथ दिया है। ऑडिट के दौरान यह बात सामने आई कि बड़ी संख्या में नोट और सिक्के पड़े थे, जिसकी 29 नवंबर को गिनती शुरू हुई। जयसवाल को इस बात का अंदाजा लग गया था कि वह शायद पकड़ा जा सकता है, लिहाजा उसने बैंक आना छोड़ दिया था।

जुर्म कबूला
सिक्कों की संख्या में आए भारी अंतर के बाद ऑडिटर को पता चला कि बड़ी हेराफेरी की गई है। करेंसी चेस्ट की पूरी जिम्मेदारी तारक जयसवाल पर थी, लिहाजा सबसे पहले उसपर ही शक गया। जब ऑडिटर्स ने जयसवाल को बैंक बुलाया तो उसने अपनी पत्नी को चेस्ट की चाभी लेकर बैंक भेज दिया। क्षेत्रीय मैनेजर तरुन कुमार साहा ने इसके बाद मेमारी पुलिस स्टेशन पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि हमने शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि बड़ी संख्या में सिक्के गायब हैं। जिसके बाद पूछताछ के दौरान जयसवाल ने अपने जुर्म को कबूल करते हुए कहा कि उन्हो्ंने ही सिक्के गायब किए जिसकी मदद से लॉटरी खरीदी और उनकी इस काम में किसी ने मदद नहीं की।
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