कौन हैं लोको पायलट गुणानिधि मोहंती, जो चला रहे थे कोरोमंडल एक्सप्रेस, परिवार को नहीं पता कहां हैं वो
Odisha train accident loco pilot Gunanidhi Mohanty: ओडिशा में बालासोर ट्रेन हादसे के दो हफ्ते बाद भी कोरोमंडल एक्सप्रेस के गंभीर रूप से घायल लोको पायलट के परिवार ने कहा है कि वह अभी तक उनसे मिल नहीं पाए हैं। परिवार के इस दावे के बाद लोको पायलट गुणानिधि मोहंती चर्चाओं में आ गए हैं।
कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट के परिवार ने कहा है कि वह हादसे के बाद उनसे मिल नहीं पाए हैं। नाहीं उनकी स्थिति के बारे में उन्हें बताया गया है। उनका कहना है कि उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई है।

ओडिशा बालासोर ट्रेन एक्सीडेंट में 291 लोगों की मौत हो चुकी है और 900 से अधिक लोग घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। हादसे में तीन ट्रेन शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841), बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस 12864) और मालगाड़ी आपस में टकरा गई थी।
चेन्नई जाने वाली कोरोमंडल एक्सप्रेस के 49 वर्षीय लोको पायलट गुणानिधि मोहंती और 36 वर्षीय सहायक लोको पायलट हजारी कुमार बेहरा हादसे के वक्त कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट केबिन में थे। उनके सिर, छाती और पीठ पर गंभीर चोटें आई थीं।
2 जून 2023 की शाम को बालासोर जिले के बहनागा बाजार स्टेशन की लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी को कोरोमंडल एक्सप्रेस ने टक्कर मारी थी। ट्रेन सिग्नल सिस्टम में संदिग्ध हस्तक्षेप के बाद 128 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही कोरोमंडल मालगाड़ी से टकरा गई थी।
गुणानिधि मोहंती को हादसे के बाद भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में तीन टूटी हुई हड्डियों और सिर पर चोटों के साथ भर्ती कराया गया था। गुणानिधि और सह-पायलट बेहरा पहले 10 दिनों तक राज्य पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों की कड़ी निगरानी में थे।
बेहरा को अपने बाएं पैर में फ्रैक्चर और रीढ़ की हड्डी की चोट सहित कई खरोंचों के साथ चोटें आईं। उनकी पत्नी गोलप बेहरा भी ईस्ट कोस्ट रेलवे में सहायक लोको पायलट हैं।
कौन हैं लोको पायलट गुणानिधि मोहंती?
-गुणानिधि मोहंती भारतीय रेलवे में बतौर लोको पायलट काम करते हैं और यात्री ट्रेनों को चलाते हैं। गुणानिधि मोहंती कटक जिले के नाहरपाड़ा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम बिष्णु चरण मोहंती है। जो कि एक पूर्व सैनिक हैं।
- गुणानिधि मोहंती ने 1996 में एक मालगाड़ी के ड्राइवर के रूप में भारतीय रेलवे में अपनी नौकरी शुरू की थी। उन्होंने कुछ सालों पहले से यात्री ट्रेन चलाना शुरू किया था।
कहां हैं लोको पायलट गुणानिधि मोहंती
गुणानिधि मोहंती के पूर्व सैनिक पिता बिष्णु चरण मोहंती और बड़े भाई संजय मोहंती काफी परेशान हैं। पिता और बड़े भाई दोनों गुणानिधि मोहंती की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता में हैं। उनका आरोप है कि उन्हें उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
गुणानिधि मोहंती के बड़े भाई संजय मोहंती ने कहा, ''दुर्घटना के दो-चार दिन बाद ही मैं उनसे मिलने गया था। वह बुरी तरह जख्मी था और बात नहीं कर पा रहा था। तब वे आईसीयू में थे। उसके बाद हमें उनसे मिलने नहीं दिया गया। अब पता नहीं वह कैसा है।''
हालांकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि गुणानिधि की पत्नी को उनसे मिलने की अनुमति दी गई थी या नहीं।
गुणानिधि मोहंती के बड़े भाई संजय मोहंती ने कहा, ''हम एक अनिश्चित स्थिति में हैं। सभी को लगता है कि हादसा मेरे भाई की गलती से हुआ जबकि सच तो यह है कि लोको पायलट का इस बात पर कोई कंट्रोल नहीं होता है कि ट्रेन किस ट्रैक पर चलेगी। यह ऑन-ड्यूटी स्टेशन मास्टर का काम है। जो किसी विशेष ट्रेन को उस लाइन पर यात्रा करने की अनुमति देता है। वैसे भी कोरोमंडल एक्सप्रेस को उस सेक्शन पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करने की अनुमति थी, जबकि वास्तविक गति 128 किमी प्रति घंटा थी।''
संजय मोहंती ने कहा, ''1996 में मालगाड़ी चालक के रूप में शामिल होने के बाद गुणानिधि मोहंती ने कुछ साल पहले यात्री ट्रेनों को चलाना शुरू किया था। उनके साथ अब तक कोई दुर्घटना नहीं हुई थी।''
हालांकि एएमआरआई अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि लोको पायलट और सहायक लोको पायलट दोनों को चार से पांच दिन पहले डिस्चार्ज कर दिया गया था। लेकिन फिर भी गुणानिधि मोहंती का परिवार नहीं जानता कि वह कहां हैं और कैसे हैं।












Click it and Unblock the Notifications