Balasore train accident: कोरोमंडल एक्सप्रेस दुर्घटना की आंखों देखी, लोको ड्राइवर,गार्ड और TTE की जुबानी
Balasore train accident:शुक्रवार शाम में ओडिशा में जो भयानक ट्रेन हादसा हुआ था, उसके तीन महत्वपूर्ण चश्मदीदों का पक्ष सामने आया है। उन्होंने रेलवे बोर्ड से कहा है कि वहां हुआ क्या था।

ओडिशा में हुए भयानक ट्रेन हादसे के दौरान वहां कितना भयानक मंजर था, रविवार को यह बयां किया है रेलवे बोर्ड की मेंबर (ऑपरेशन एंड बिजनेस डेवलपमेंट) जया वर्मा सिन्हा ने। इस हादसे में आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक 275 यात्रियों की जान चली गई है। रेलवे बोर्ड की मेंबर ने वह बातें बताई हैं, जो दुर्घटना के तुरंत बाद लोको ड्राइवर, गार्ड और टीटीई ने बताई है। उन्होंने ये भी बताया है कि इस हादसे में हताहतों की संख्या इतनी ज्यादा होने का क्या कारण है?

कोरोमंडल के ड्राइवर ने देखा भयानक मंजर
रेलवे बोर्ड की मेंबर जया वर्मा सिन्हा ने कहा है, 'हमनें कोरोमंडल के ड्राइवर से बात की। वह तब होश में थे, जब बताया कि उन्हें ग्रीन सिग्नल मिला था।' वह बहुत ही गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। जानकारी के मुताबिक कोरोमंडल एक्सप्रेस लूप लाइन पर आ गई थी।

मालगाड़ी के गार्ड की बाल-बाल बची जान
वो बोलीं, 'मैंने लौह अयस्क ट्रेन के गार्ड से भी बात की। यह ईश्वर की कृपा थी कि उनकी जान बच गई। ट्रेन के इंजन ने गार्ड के ब्रेक वैन को कुचल दिया। अगर गार्ड उसके अंदर होते, तो उनकी जान चली जाती। दुर्घटना के समय लौह अयस्क वाली ट्रेन के गार्ड बाहर से ट्रेन की छानबीन कर रहे थे।'

हावड़ा यशवंतपुर एक्सप्रेस के टीटीई भी भाग्यशाली रहे
उनके मुताबिक दुर्घटना के 15 मिनट बाद ही उन्हें सूचना मिल गई। वो बोलीं, 'मैंने दूसरी ट्रेन हावड़ा यशवंतपुर एक्सप्रेस के ए1 कोच के टीटीई से भी बात की। उसने मुझे बताया कि उसने पीछे से एक तेज असामान्य आवाज सुनी। उसे लगा कि किसी तरह का अवरोध है। ए1 कोच के पीछे दो जेनरल कोच और गार्ड केबिन था। ए1 के पीछे वाले दोनों कोच ए1 से पूरी तरह से अलग हो गए और ट्रैक से दूर जा गिरे, जबकि ए1 कोच सुरक्षित रहा और आगे खिसक गया।'

सिर्फ कोरोमंडल एक्सप्रेस हुई दुर्घटना का शिकार-रेलवे बोर्ड
रेलवे बोर्ड की मेंबर ने यह भी बताया कि बालासोर में सिर्फ कोरोमंडल एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार हुई, जिसमें 275 यात्रियों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में सिग्नलिंग को लेकर कुछ मुद्दे सामने आए हैं और बोर्ड कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की डिटेल रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहा है।
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लौह अयस्क से भरी ट्रेन से टकराने से हताहतों की संख्या ज्यादा-रेलवे बोर्ड
उन्होंने कहा,'ट्रेन के ड्राइवर जो गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, उन्होंने कहा कि ट्रेन ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही आगे बढ़ी। न तो उन्होंने किसी सिग्नल को जंप किया और ना ही ट्रेन तय सीमा से ज्यादा तेज चल रही थी।' हादसे के वक्त ट्रेन की रफ्तार 128 किलोमीटर प्रति घंटे थी। उन्होंने यह भी कहा है कि 'मालगाड़ी पटरी से नहीं उतरी। क्योंकि मालगाड़ी पर लौह अयस्क लदा हुआ था, इसलिए कोरोमंडल एक्सप्रेस को अधिकतम नुकसान हुआ। इतनी ज्यादा संख्या में मौतें और घायल होने का कारण यही है।'

यशवंतपुर एक्सप्रेस की अंतिम दो बोगियों से टकराई कोरोमंडल एक्सप्रेस
रेलवे बोर्ड की मेंबर के मुताबिक 'कोरोमंडल एक्सप्रेस की बोगियां डिरेल होकर डाउनलाइन पर आ गईं और यशवंतपुर एक्सप्रेस की अंतिम दो बोगियों से टकरा गईं, जो कि उस समय डाउनलाइन पर 126 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से डाउनलाइन पर गुजर रही थी।'
इस हादसे में पहले 288 लोगों की मौत की खबरें आई थीं। लेकिन, ओडिशा के चीफ सेक्रेटरी प्रदीप जेना ने स्पष्ट किया कि मरने वालों की संख्या 275 है। उनका कहना कि कुछ शवों को दो-दो बार गिने जाने से यह दिक्कत आई थी। (इनपुट-एएनआई)












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