#BadTouch: ‘भाई के सामने आने से भी कतराने लगी थी...
यौन शोषण के इर्द-गिर्द घूमती बीबीसी हिंदी की ख़ास सिरीज़ #BadTouch की तीसरी कड़ी में आज अपनी कहानी बता रही हैं रोशनी और सुमन
रोशनी, 22 साल (बदला हुआ नाम)
बचपन के दिन हँसने-खेलने के होते हैं लेकिन इन्हीं दिनों होने वाले कुछ हादसे आपकी पूरी ज़िंदगी बदल कर रख देते हैं.
इस वाकये को बीते कई साल हो चुके हैं लेकिन अब तक यह हाल है कि मुझे प्यार, रिलेशनशिप और शादी का नाम सुनकर ही डर-सा लगने लगता है.
उस वक़्त मेरी उम्र 11-12 साल रही होगी. वो पड़ोस में किराए पर कमरा लेकर रहता था, दूसरे शहर से पढ़ने आया था. स्टूडेंट था इसलिए जब-तब ठंडा पानी, नमक, चीनी वगैरह लेने हमारे घर आ जाया करता था.
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मेरे घर वाले उस पर बहुत भरोसा करने लगे थे. मैं और मेरा चचेरा भाई उससे ट्यूशन पढ़ने जाने लगे. एक बार किसी टेस्ट में मेरे बहुत कम नंबर आए. उस दिन उसने मुझे लंबा सा जवाब याद करने को दिया और मेरे भाई को आसान सा.
भाई ने कुछ देर में याद करके सुना दिया. उसने उसे छुट्टी दे दी और ये कहकर घर भिजवा दिया कि जब तक रोशनी को जवाब याद नहीं होगा इसे छुट्टी नहीं मिलेगी.
अब कमरे में सिर्फ मैं और वो थे. थोड़ी देर में मैंने देखा कि वो पैंट खोल कर अपना प्राइवेट पार्ट सहला रहा था, उसने मुझे जबरदस्ती इधर-उधर छूना शुरू कर दिया.
मैं घबराकर रोने लगी थी. उसने चुप कराते हुए धमकी दी कि अगर मैंने घर में कुछ बताया तो वो घर पर मेरे कम नंबरों के बारे में बता देगा फिर मुझे खूब मार पड़ेगी.
मैं देर तक रोती रही. उसने चुप कराने की बहुत कोशिश की पर जब देखा कि मेरी हालत बिगड़ रही है तो खुद ही मुझे अपने साथ घर ले गया और घर में बताया कि नंबर कम आने की वजह से उसने मुझे बहुत डांटा है इसलिए मैंने रो-रो के बुरा हाल कर लिया है.
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मुझे याद है, इसके बाद मैं बहुत बीमार पड़ गयी थी वो रोज़ मेरी तबीयत पूछने आता था, या शायद ये खबर लेने कि कहीं मैंने घर में कुछ बताया तो नहीं. लेकिन घर का माहौल शांत था क्योंकि मैंने किसी से कुछ नहीं कहा था.
उसके बाद मेरा ये हाल हो गया था कि अपने भाई का सामना करने से भी बचती थी. जब बड़ी हुई तो पता चला कि मेरे साथ यौन अपराध हुआ है.
शुक्र है कि कुछ वक़्त बाद वो दूसरे शहर चला गया था लेकिन आज भी जब उस बारे में ख़याल आता है तो मन में घिन और सिहरन सी उठती है.
सुमन, 33 साल (बदला हुआ नाम)
बात तब की है जब मैं चौथी या पांचवीं क्लास में पढ़ती थी. बाकी बच्चों की तरह हम भी गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाया करते थे.
चूँकि नानी गांव में अकेले ही रहती थीं और वहां जब हम चार भाई-बहन पहुंचते तो दिक्कतें भी बहुत होती थीं लेकिन नानी के यहां जाने का चाव इतना था कि हम हर साल वहां पहुंच जाते.
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नानी के घर के बगल में हमारे चचेरे नाना का घर था. हम उनके घर जाकर उनके बच्चों के साथ खेलते, टीवी देखते और खूब मौजमस्ती करते.
एक रात बहुत गर्मी पड़ रही थी, लाइट भी नहीं थी. बाहर बिछाने के लिए चारपाइयां कम थीं. जब चारपाई कम पड़ गयी तो उन्होंने कहा कि सुमन को मेरे घर भेज दो. उस दिन उनके घर में कोई और नहीं था.
मुझे चचेरे नाना के घर सोने के लिए भेज दिया. उन्होंने मुझे चारपाई पर लिटाया और मुझे पढ़ने के लिए एक किताब दी. मुझे कहानियां पढ़ने का शौक था इसलिए जो भी किताब हाथ लगती सब पढ़ डालती थी.
उन्होंने मुझसे एक कहानी को एक निश्चित जगह से पढ़ने के लिए कहा. मैं पढ़ने में होशियार थी, अपना टैलेंट दिखाने का मौका मिला था तो फटाफट पढ़ने लगी.
पढ़ते-पढ़ते एक शब्द आया, 'ब्रा'. उन्होंने पूछा, "जानती हो ब्रा क्या होता है? तेरी मम्मी पहनती हैं?"
यह कहते हुए उनका हाथ मेरी टी-शर्ट के अंदर पहुंच चुका था. मुझे लगा कि मेरे साथ कुछ ग़लत हो रहा है. मैं रोते हुए किताब फेंक कर वहाँ से भागी, मेरे पीछे वो भी आए.
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मैं रोती रही लेकिन किसी से बता नहीं सकी कि मेरे साथ क्या हुआ है. जब समझदार हुई तो अपनी छोटी बहनों को इस बारे में बताया, ताकि अगर उनके साथ ऐसा कुछ हो तो वो किसी से बता सकें.
माँ से आज तक नहीं कह सकी क्योंकि मेरी मां ने फिर कभी मुझे सीने से लगाकर नहीं पूछा कि उस रात क्या हुआ था.
(बीबीसी संवाददाता सिन्धुवासिनी से बातचीत पर आधारित)
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