#Ayodhya: राम मंदिर पर सिब्‍बल का पैंतरा, शियाओं ने भी चला बड़ा दांव, 5 facts

नई दिल्‍ली। बाबरी मस्जिद विध्वंस की 25वीं वर्षगांठ से ठीक एक दिन पहले मंगलवार (5 दिसंबर 2017) को सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद पर सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी। फिलहाल सुनवाई टाल दी गई है और अब 8 फरवरी 2018 को इसकी अगली सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने मामले की सुनवाई 2019 तक टालने तक कही है। कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जब भी इस मामले की सुनवाई होती है तो कोर्ट के बाहर गंभीर प्रतिक्रियाएं आती हैं। इसलिए कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वह खुद कोर्ट से गुजारिश करते हैं कि सभी याचिकाएं पूरी होने के बाद 15 जुलाई 2019 से इस मामले की सुनवाई शुरू करें। वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सभी दस्तावेज पूरे करने की मांग की है। आईए आपको बताते हैं आज की सुनवाई की 5 बड़ी बातें।

कपिल सिब्‍बल ने कहा- राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के 2014 के घोषणापत्र में शामिल है

कपिल सिब्‍बल ने कहा- राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के 2014 के घोषणापत्र में शामिल है

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल की ओर से कोर्ट में कहा गया कि इस मामले की जल्द सुनवाई सुब्रमण्यम स्वामी की अपील के बाद शुरू हुई, जो कि इस मामले में कोई पार्टी भी नहीं हैं। सिब्बल बोले कि राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के 2014 के घोषणापत्र में शामिल है, ये मामला राजनीतिक हो चुका है। देश का माहौल अभी ऐसा नहीं है कि इस मामले की सुनवाई सही तरीके से हो सके।

7 जजों की बेंच बनाने की मांग

7 जजों की बेंच बनाने की मांग

इससे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की स्पेशल बेंच मामले की सुनवाई शुरू की। कपिल सिब्बल ने मांग की है कि मामले की सुनवाई 5 या 7 जजों बेंच को 2019 के आम चुनाव के बाद करनी चाहिए। हालांकि सिब्बल की दलील को कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं किया गया है।

शिया वक्फ बोर्ड ने किया मंदिर बनाने का समर्थन

शिया वक्फ बोर्ड ने किया मंदिर बनाने का समर्थन

सुनवाई के दौरान सबसे पहले शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से दलीलें पेश की गईं। शिया बोर्ड के वकील ने विवादित स्थल पर मंदिर बनाए जाने का समर्थन किया। दूसरी तरफ शिया वक्फ बोर्ड की इस दलील का सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कड़ा विरोध किया। सुन्नी बोर्ड ने कहा कि अभी मामले से जुड़े सारे दस्तावेज पेश नहीं हो पाए हैं। इस पर अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) तुषार मेहता ने सुन्नी बोर्ड के दावे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट में सारे कागजात जमा हैं। सुनवाई कर रही स्पेशल बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं।

इतनी जल्‍दी कैसे फाइल हो गए अनुवाद

इतनी जल्‍दी कैसे फाइल हो गए अनुवाद

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अभियुक्तों पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि 19000 पेजों के दस्तावेज इतने कम समय में फाइल कैसे हो गए। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्हें और अन्य याचिकाकर्ताओं को याचिका के प्रासंगिक दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। उल्‍लेखनीय है कि हजारों पन्नों के अदालती दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर पांच दिसंबर से सुनवाई करने का निर्णय लिया था। अनुवाद अब पूरा हो चुका है। अदालत ने सभी पक्षकारों को हिन्दी, पाली, उर्दू, अरबी, पारसी, संस्कृत आदि सात भाषाओं के अदालती दस्तावेजों का 12 हफ्ते में अंग्रेजी में अनुवाद करने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार को विभिन्न भाषाओं के मौखिक साक्ष्यों का अंग्रेजी में अनुवाद करने का जिम्मा सौंपा गया था।

दस्‍तावेत अधूरे हैं यह कहना सही नहीं

दस्‍तावेत अधूरे हैं यह कहना सही नहीं

यूपी सरकार की तरफ से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) तुषार मेहता ने सिब्बल की दलील का विरोध किया। मेहता ने कहा-सभी सबंधित दस्तावेज कोर्ट के रिकॉर्ड में हैं। सुप्रीम कोर्ट के सामने सारे अहम दस्तावेज लाये जा चुके हैं लिहाजा यह कहना कि दस्तावेज अधूरे हैं सही नहीं है।

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