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अयोध्या केस: क्या होता है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ? जिसपर सुप्रीम कोर्ट में आखिरी दिन हो सकती है सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में देश के सबसे चर्चित मामलों में एक अयोध्या भूमि विवाद पर रोजाना सुनवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इस मामले में बुधवार को होने वाली सुनवाई आखिरी हो सकती है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्षकार अपनी तरफ से अंतिम दलीलें रखेंगे। मुस्लिम पक्ष को जवाब देने के लिए एक घंटे का वक्त दिया जाएगा। इसके बाद सभी पक्षकारों को 45-45 मिनट का समय दिया जाएगा। आज की सुनवाई के दौरान अयोध्या मामले में 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' पर भी चर्चा हो सकती है, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रखा जा सकता है। आइए जानते हैं क्या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ, जिसपर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर 40वें दिन हो सकती है बहस

मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर 40वें दिन हो सकती है बहस

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अयोध्या मामले में 40वें दिन की सुनवाई के दौरान 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' पर बहस हो सकती है। दरअसल, 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' का प्रावधान सिविल सूट वाले मामलों के लिए होता है। खासकर मालिकाना हक वाले मामलों में इसका जिक्र आता है। वकील विष्णु जैन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट संविधान के आर्टिकल 142 और सीपीसी की धारा 151 के तहत इस अधिकार का इस्तेमाल करता है। 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' का मतलब हुआ कि याचिकाकर्ता ने जो मांग कोर्ट से की है अगर वो नहीं मिलती है तो विकल्प क्या है जो उसे दिया जा सके।

क्या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ

क्या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ

यानी, दो दावेदारों के विवाद वाली भूमि का मालिकाना हक किसी एक पक्ष को दिए जाने पर दूसरे पक्ष को क्या मिलेगा। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले पर सुनवाई हो सकती है। 38वें दिन की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कहा था कि 6 दिसंबर 1992 के पहले वाली हालत में मस्जिद की इमारत चाहिए। वहीं, हिंदू पक्ष का कहना है कि राम जन्मस्थान पर उनका हक है। फिलहाल, इस मामले की सुनवाई आखिरी चरण में है और अब बुधवार को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकीं हैं।

एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा जाए- हिंदू पक्षकार

एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा जाए- हिंदू पक्षकार

इसके पहले, 39वें दिन की सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने पूछा कि अगर सूट प्रॉपर्टी नष्ट हो गई तो फैसला किस आधार पर दिया जाएगा? इसपर हिंदू पक्षकार के. परासरण ने कहा कि मैं नहीं मानता कि मस्जिद हमेशा मस्जिद रहती है लेकिन मेरी दलील है कि मंदिर हमेशा मंदिर रहता है। फिर चाहे वहां पर भवन, मूर्ति हो या नहीं। उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को नष्ट करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। हिंदू पक्षकार के वकील के. परासरण ने कहा कि एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा जाए।

अयोध्या में धारा 144 लागू

अयोध्या में धारा 144 लागू

वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को नष्ट करने के ऐतिहासिक गलत काम को रद्द करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई शासक भारत में आकर ये नहीं कह सकता है कि मैं सम्राट बाबर हूं और कानून मेरे नीचे है, जो मैं कहता हूं वही कानून है। दूसरी तरफ, इस मामले में आखिरी चरण की सुनवाई को देखते हुए अयोध्या में धारा 144 लागू है जो 10 दिंसंबर तक रहेगी।

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