3.9 लाख करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम की नीलामी को मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज स्पेक्ट्रम के लिए अगले दौर की नीलामी को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बाबत जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट ने 700, 800, 900, 1800, 2100, 2300 और 2500 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी बैंडविद के लिए नीलामी को मंजूरी दे दी है। स्पेक्ट्रम की यह नीलामी 20 वर्षों के वैद्यता के लिए की जाएगी, जिसमे कुल 2251.25 मेगाहर्ट्ज की बैंडविद नीलाम की जाएगी और इसकी कुल कीमत 392332.70 करोड़ रुपए होगी। बैंडविद की नीलामी के लिए आवेदन इसी महीने से स्वीकार किए जाएंगे और मार्च 2021 तक स्पेक्ट्रम की नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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बता दें कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की ओर से 5.22 लाख करोड़ रुपए की स्पेक्ट्रम नीलामी की सिफारिश की गई थी, जिसके बाद आज मोदी कैबिनेट ने स्पेक्ट्रम की नीलामी को हरी झंडी दे दी। मौजूदा समय में रक्षा मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग पहले से कुछ स्पेक्ट्रम की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं रिलायंस जियो की ओर से कहा गया था कि दूरसंचार विभाग के पास नीलामी के लिए 3.92 लाख करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल के लिए खाली पड़ा है, लिहाजा इसे इसके इस्तेमाल के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। यहां अहम बात यह है कि 5जी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी शामिल नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए अभी टेलीकॉम कंपनियों को इंतजार करना होगा। ट्राई की ओर से 3300-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड के 5जी स्पेक्ट्रम के लिए प्रति मेगाहर्ट्ज 492 करोड़ रुपए की राशि की सिफारिश की गई है। ऐसे में 100 मेगाहर्ट्ज के 5जी स्पेक्ट्रम के लिए तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च करनी होगी। बता दें कि सरकार की ओर से 2020 तक 5जी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन कोरोना के चलते इसमे विलंब होता नजर आ रहा है।












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