Atal Bihari Vajpayee: 'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा', जोश भर देती हैं अटल की कविताएं
Atal Bihari Vajpayee: आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती है, पूरा देश आज अपने पूर्व पीएम को याद कर रहा है। राजनेता के रूप में तो अटल बिहारी ने बहुत ख्याति प्राप्त की थी लेकिन उनके अंदर एक संवेदनशील कवि भी बसता था, अपनी लेखनी से वो भारी से भारी बातों को भी बड़े ही सरलता से कह देते थे और इसी वजह से उनकी कही बातों पर विपक्ष भी ताली बजाने को विवश हो जाता था।
वैसे तो उनकी कलम ने बहुत सारी कविताएं लिखी हैं लेकिन कुछ कविताएं ऐसी हैं जो कि इंसान को अंदर जोश तो भरती ही हैं साथ ही जीवन के मूल मंत्र को भी समझाती हैं। जिनमें से कुछ का जिक्र निम्नलिखित है..

Atal Bihari Vajpayee Poem: 'मौत से ठन गई'
- मौत से ठन गई
- ठन गई!
- मौत से ठन गई!
- जूझने का मेरा इरादा न था,
- मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था
- रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
- यों लगा जिंदगी से बड़ी हो गई
- मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
- जिंदगी-सिलसिला, आज-कल की नहीं
- मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
- लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?
- तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ,
- सामने वार कर फिर मुझे आजमा
- मौत से बेखबर, जिंदगी का सफर,
- शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर
- बात ऐसी नहीं कि कोई गम ही नहीं,
- दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं
- प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
- न अपनों से बाकी है कोई गिला
- हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,
- आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए
- आज झकझोरता तेज तूफान है,
- नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है
- पार पाने का कायम मगर हौसला,
- देख तेवर तूफां का, तेवरी तन गई,
- मौत से ठन गई।
Atal Bihari Vajpayee Poem: 'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा'
- टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
- पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
- झरे सब पीले पात
- कोयल की कुहुक रात
- प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं
- गीत नया गाता हूं।
- टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी
- अंतर को चीर
- व्यथा पलकों पर ठिठकी
- हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा
- काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं
- गीत नया गाता हूं।
Atal Bihari Vajpayee Poem: आओ फिर से दिया जलाएं
- आओ फिर से दिया जलाएं, आओ फिर से दिया जलाएं
- भरी दुपहरी में अंधियारा, सूरज परछाई से हारा
- अंतरतम का नेह निचोड़ें बुझी हुई बाती सुलगाएं।
- आओ फिर से दिया जलाएं
- हम पड़ाव को समझे मंजिल, लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
- वतर्मान के मोहजाल में आने वाला कल न भुलाएं।
- आओ फिर से दिया जलाएं।
- आहुति बाकी यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा
- अंतिम जय का वज़्र बनाने नव दधीचि हड्डियां गलाएं।
- आओ फिर से दिया जलाएं।
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