कुछ ही घंटे बाद पृथ्वी के पास से गुजरेगा उल्कापिंड, मिले इससे पहली इंसानी मौत के सबूत
नई दिल्ली। कल यानी 29 अप्रैल को एक उल्कापिंड पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है। इसको लेकर कई तरह के मैसेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि नासा ने लोगों से साफ किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है। इसके धरती से टकराने की आंशका नहीं है। वहीं इस बीच एक शोध में दावा किया गया है कि उल्कापिंड से पहली इंसानी मौत के सबूत मिल गए हैं।
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इराक में हुई थी पहली मौत
मेटियोराइटिक्स एड प्लेनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, तुर्की राज्य लेखागार के जनरल डायरेक्टरेट से मिले दस्तावेजों के आधार पर यह जानकारी जुटाई गई है कि इराक के सुलेमानिया क्षेत्र में अगस्त 1888 को एक उल्का पिंड के धरती पर टकरनाने से एक व्यक्ति की जान गई थी। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उल्कापिंड से किसी व्यक्ति की होने वाली मौत का पहला उपलब्ध प्रमाण है। इससे पहले इस तरह की सबसे पुरानी घटना नवंबर 1954 की मानी जाती रही थी। जब एक संतरे के आकार का सेलाकुआगा उल्कापिंड अमेरिका में 34 साल की महिला से टकराया था।

बुधवार सुबह गुजरेग उल्कापिंड
29 अप्रैल की सुबह 1998 OR2 नाम का उल्कापिंड धरती के पास से गुजरेगा, जिसकी गति अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार 19000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। वहीं इससे घबराहट को लेकर नासा ने कहा है कि इस उल्कापिंड के धरती से टकराने की संभावना ना के बराबर है। इसलिए किसी अफवाह पर ध्यान ना दें।

उल्का पिंड है क्या
दरअसल आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए या पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का यानी कि meteor कहा जाता है और उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुंचता है उसे उल्कापिंड यानी कि meteorite कहा जाता है, हर रात को उल्काएं अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं लेकिन इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या बेहद कम होती है।












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