विधानसभा चुनाव: केवल ग्रामीण इलाकों में ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में भी बीजेपी को मिली शिकस्त
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी के हार का विश्लेषण करते समय कइयों ने पार्टी को ग्रामीण इलाकों में खराब प्रदर्शन की ओर इशारा किया है लेकिन सच तो यह है कि शहरी सीटों पर भी पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और प्रदर्शन की भी निराशाजनक रहा है। बता दें कि इन तीनों राज्यों की गिनती हिंदी राज्यों के रूप में होती है और इन्हें भाजपा का गढ़ माना जाता था। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने 90 सीटों में 49 पर जीत दर्ज की थी जबकि राजस्थान में 200 सीटों में से 163 पर और मध्य प्रदेश में 230 में से 165 पर जीत दर्ज की थी।

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी वोटरों ने भी नकारा
2013 में इन राज्यों में विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का असर साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला है। वह भी तब जब मोदी लहर थी। बीजेपी ने इन तीनों राज्य के कुल 65 लोकसभा सीटों में से 62 सीटों पर जीत दर्ज की। राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ संदीप शास्त्री बताते हैं कि इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में बीजेपी पूरी तरह से हार गई है। इसके साथ-साथ शहरी सीटें भी हाथ से चली गईं। लेकिन इन तीनों राज्यों की ग्रामीण सीटें ज्यादा प्रभावित की है इसलिए यहां पार्टी को गुजरात के विपरित भारी नुकसान दिखता है।

2013 की तुलना में इतनी गिरावट
मध्यप्रदेश के मामले में, 2013 में शहरी इलाकों में सीट हिस्सेदारी 90% से घटकर 55 हो गई। छत्तीसगढ़ में भी शहरी सीट शेयर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। यह 2013 में 75 प्रतिशत से घटकर 2018 में 25 प्रतिशत हो गया। शहरी इलाकों में राजस्थान में गिरावट भी काफी अधिक थी। 2013 में 95 प्रतिशत की तुलना में 2018 में सीट शेयर 63 प्रतिशत पर आ गई है। शहरी इलाकों में गिरावट बीजेपी को और चिंता में डाल दी है क्योंकि शहरी सीटों पर पार्टी मजबूत रही है।

पार्टी के लिए नई मुश्किल?
ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी सीटों पर खराब प्रदर्शन ने बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि पार्टी को उम्मीद ही नहीं थी कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश उसके हाथ से निकला जाएगा। राजस्थान में कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी और जीत हासिल की लेकिन छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बीजेपी को जिस तरह से हाल झेलनी पड़ी है उसको लेकर मंथन शुरू हो गया है।












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