असम में परिसीमन के मसौदा प्रस्ताव को लेकर क्यों भड़का विपक्ष? जानिए

20 जून, 2023 को चुनाव आयोग ने असम के विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के लिए परिसीमन का मसौदा प्रस्ताव जारी किया है। इसको लेकर वहां सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है।

कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग मसौदा प्रस्ताव जारी करने से पहले 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली परिसीमन से संबंधित सुनवाई का इंतजार कर सकता था। पार्टी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह सत्ताधारी बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है।

politics on delimitation in assam

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला
असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा है कि परिसीन प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। उन्होंने सवाल किया, 'भारतीय चुनाव आयोग ने बिना सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किए परिसीमन पर एक मसौदा दस्तावेज जारी कर दिया। क्या इससे यह नहीं पता चलता कि चुनाव आयोग बीजेपी की एक शाखा की तरह काम कर रहा है? पहले दो सीटें थीं जो अल्पसंख्यक-बहुल थे, अब तीन लोकसभा सीटें हो गई हैं। तो असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा किसके फायदे के लिए काम कर रहे हैं।'

परिसीमन मसौदे में लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बरकरार
तथ्य यह है कि चुनाव आयोग ने असम में परिसीमन का जो मसौदा दस्तावेज तैयार किया है, उसमें सीटों की संख्या विधानसभा में 126 और लोकसभा में 14 बरकार रखी गई हैं। इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। लेकिन, कई सारे चुनाव क्षेत्रों में अन्य परिवर्तन जरूर किए गए हैं।

रिजर्व सीटों की बढ़ाई गई संख्या
जैसे अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र 8 से बढ़ाकर 9 कर दिए गए हैं। वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व सीट की संख्या 16 से 19 किए जाने का प्रस्ताव है। बोडोलैंड जिले में भी विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 16 से 19 करने का प्रस्ताव है।

संसदीय क्षेत्र के नाम भी बदले
एक संसदीय क्षेत्र 'दीफू' अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व है, जिसके 6 विधानसभा क्षेत्रों में से तीन स्वायत्त जिलों से हैं। 2 संसदीय क्षेत्र बराक वैली के जिलों को दिए गए हैं। जैसे कछार, हैलाकांडी और करीमगंज जिलों को। एक संसदीय क्षेत्र का नाम काजीरंगा कर दिया गया है।

कलियाबोर खत्म, काजीरंगा की एंट्री
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया है कि उनके लोकसभा क्षेत्र को राजनीतिक वजहों से खत्म कर दिया गया है। कलियाबोर लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रहा है और गोगोई वहां 2014 से जीत रहे हैं। लेकिन, परिसीमन के मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक यह अब विश्व विख्यात काजीरंगा लोकसभा क्षेत्र से जाना जाएगा।

हिमंत सरमा ने कांग्रेस पर किया पलटवार
जहां कांग्रेस ने इस मसौदे के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए आरोप लगाया है कि कुछ लोग इसे सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार कर कहा है कि सब जानते हैं कि पार्टी को वोट कहां से मिलता है।

कुछ लोग सांप्रदायिक मुद्दा बनाना चाहते हैं- हिंमता बिस्वा सरमा
उनका कहना है, 'यहां तक की मेरी भी सीट चली गई है, लेकिन मैं कोई मुद्दा नहीं बना रहा हूं। इस परिसीमन में उनकी सीट में बदलाव या उसके खत्म होने को कुछ लोग सांप्रदायिक मुद्दा बनाना चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि जनता मुझे आशीर्वाद देगी और मैं जिस भी चुनाव क्षेत्र से लड़ूंगा, वहां से मुझे चुनेंगे।'

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