Assam Flood: 15 लाख लोगों का जनजीवन बाढ़ से प्रभावित, 7 की मौत, सरकारी स्कूल की बिल्डिंग बही
नई दिल्ली। असम में भारी भारिश की वजह से हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। मानसून की बारिश की वजह से प्रदेश में बाढ़ ने काफी तबाही मचा रखी है। भारी बारिश और बाढ़ की वजह से अब तक प्रदेश में कुल सात लोगों की जान जा चुकी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बाढ़ से तकरबीन 15 लाख लोग प्रभावित हैं। असम के 33 जिलों में से 25 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में होने वाली बारिश की वजह से हालात और भी बदतर हो सकते हैं। राहत और बचाव का कार्य में प्रदेश में एनडीआरएफ की टीम जुटी हुई है। एनडीआरएफ की टीम बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने की लगातार कोशिश कर रही है। वहीं केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को बाढ़ से निपटने के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग बही
वहीं भारी बारिश और बाढ़ की वजह से मोरीगांव जिले के तेंगागुरी इलाके में प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग पानी में बह गई। ब्रम्हपुत्र नदी में लगातार बढ़ते जल स्तर की वजह से यहां बाढ़ आई हुई है, जिससे जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है। अभी तक बाढ़ग्रस्त इलाकों से कुल 20000 लोगों को बचाया जा चुका है और उन्हें 68 अलग-अलग राहत कैंप में शिफ्ट किया गया है। असम का बारपेट सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित इलाका है।
अगले 48 घंटे और भी बारिश की संभावना
आने वाले दिनों में भारी बारिश की वजह से स्थिति और भी विकट हो सकती है। पड़ोसी राज्य मेघायल में आने वाले 48 घंटों में और भी भारी बारिश की संभावना है। मुख्यमंत्री सर्बदानंद सोनवाल ने बाढ़ के हालात के बारे में गृहमंत्री अमित शाह को जानकारी दी है। जिसके बाद अमित शाह ने उच्च स्तरीय बैठक की और असम सहित देश के अन्य राज्यों में बाढ़ के हालात का जायजा लिया।
52 गांव बाढ़ से प्रभावित
खबर के अनुसार तकरीबन 52 गांव मोरल जिला के सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित हैं। लोगों का कहना है हमे बाढ़ से बचने का समय तक नहीं मिला। प्रदेश में 10 नदियों का जल स्तर काफी अधिक बढ़ गया है। ब्रम्हपुत्र नदी का पानी खतरे के स्तर से उपर पहुंच चुका है। यही नहीं काजीरंगा नेशनल पार्क तकरीबन 70 फीसदी पानी में डूब चुका है, यहां जानवर अपनी जान बचाने के लिए जंगल में बनाए गए शेल्टर प्लेटफॉर्म पर पहुंच रहे हैं। बाढ़ की वजह से कृषि की हालत काफी खराब हो गई है। 27000 हेक्टेअर से अधिक की फसल बर्बाद हो चुकी है।












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