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Assam Election: राहुल मनाने में लगे, हिमंत बोले BJP ज्वाइन कीजिए, भूपेन बोरा ने अब इस्तीफे की बताई सच्चाई

Assam Election 2026 ( Bhupen Kumar Borah): असम की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के इस्तीफे ने न सिर्फ कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि राज्य की राजनीति को भी एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

पहली बार भूपेन बोरा ने खुलकर अपनी नाराजगी, शर्तें और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान पर बात की है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें बीजेपी ज्वाइन करने का खुला ऑफर देकर सियासी हलचल और तेज कर दी है।

Bhupen Kumar Borah

भूपेन बोरा ने इस्तीफे पर चुप्पी तोड़ी, लेकिन फैसला अब भी अधर में

भूपेन बोरा ने साफ किया है कि उनका इस्तीफा कोई भावनात्मक फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि आलाकमान के कहने पर उन्होंने आखिरी फैसले के लिए थोड़ा वक्त जरूर लिया है, लेकिन इस्तीफा वापस लेना तय नहीं है। भूपेन बोरा का कहना है कि वह कोई भी कदम उठाने से पहले अपने शुभचिंतकों, सहयोगियों और अपने गृह जिला लखीमपुर के लोगों से राय लेना चाहते हैं। उनके मुताबिक मंगलवार (17 फरवरी) रात तक स्थिति साफ हो सकती है।

कांग्रेस दो गुटों में बंटी? APCC बनाम APCC (R)

बोरा के बयान का सबसे विस्फोटक हिस्सा कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर है। उन्होंने बिना नाम लिए धुबरी से सांसद Rakhiul Hussain पर निशाना साधते हुए कहा कि वह APCC में काम करने को तैयार हैं, लेकिन APCC (R) में नहीं। बोरा के मुताबिक पार्टी के भीतर एक ऐसा गुट हावी हो गया है, जिससे कई नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मौजूदा स्थिति में असम कांग्रेस का स्वरूप AGP, NCP और TMC जैसी पार्टियों से मिलता-जुलता नजर आने लगा है।

भूपेन कुमार बोरा कहते हैं,

"कल (16 फरवरी) नागांव से MP प्रद्युत बोरदोलोई और CLP लीडर देबब्रत सैकिया मेरे घर आए। उनके सामने, मैंने बाकी सभी नेताओं से कहा कि वे मेरा इस्तीफा देख लें और मैंने प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया को यह अधिकार दिया कि अगर इन दोनों नेताओं को यकीन हो जाता है कि भूपेन कुमार बोरा गलत हैं, और हां, भविष्य में ऐसा कभी नहीं होगा, तो मैं अपना इस्तीफा वापस ले लूंगा। आज सुबह, प्रद्युत बोरदोलोई ने मुझे फोन किया। मैं पूरा दिन इंतजार करूंगा और अगर प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया मुझे यकीन दिला पाते हैं कि हां, यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी है, तो मैं अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए तैयार हूँ...यह APCC नहीं है, यह अब APCCR है। इसलिए मैं APCC(R) में काम करने के लिए तैयार नहीं हूं। अभी यह मेरी जानकारी और जमीर के हिसाब से APCC नहीं है। यह AGPP, NCP, TMC जैसा APCC है। यह R ब्रैकेट में APCC है। आप जाकर एनालाइज करें।''

दो नेताओं पर छोड़ा फैसला, मनाने की आखिरी कोशिश

भूपेन बोरा ने नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया को मध्यस्थ बनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर ये दोनों नेता उन्हें यह यकीन दिला पाते हैं कि उनकी नाराजगी गलत है और भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनेगी, तो वह इस्तीफा वापस लेने पर विचार कर सकते हैं। बोरा का कहना है कि वह पूरे दिन इन दोनों नेताओं की दलीलों का इंतजार करेंगे।

टिकट विवाद बना नाराजगी की बड़ी वजह

बोरा की नाराजगी की एक अहम वजह सामगुरी विधानसभा उपचुनाव का टिकट भी बताया जा रहा है। उनका दावा है कि कई वरिष्ठ नेताओं ने उनका नाम आगे बढ़ाया था, लेकिन टिकट Tanjil Hussain को दिया गया, जो बाद में चुनाव हार गए। बोरा के मुताबिक यह फैसला पार्टी के भीतर असंतोष की बड़ी वजह बना।

हिमंत बिस्वा सरमा का दांव, बीजेपी का खुला दरवाजा

इसी बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बयान देकर सियासी तापमान और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के दरवाजे भूपेन बोरा के लिए पूरी तरह खुले हैं। इतना ही नहीं, सरमा ने यह तक कह दिया कि अगर बोरा बीजेपी में आते हैं, तो उन्हें एक सुरक्षित सीट से विधानसभा भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री के बोरा से मुलाकात की अटकलों ने कांग्रेस खेमे की बेचैनी और बढ़ा दी है।

राहुल-खड़ेग की बात, लेकिन बोरा अड़े

कांग्रेस के राज्य प्रभारी जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत के बाद बोरा मान गए हैं। हालांकि खुद बोरा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ समय मांगा है, इस्तीफा वापस नहीं लिया है।

2026 से पहले कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा

भूपेन बोरा का यह रुख कांग्रेस के लिए 2026 के चुनाव से पहले एक बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर यह संकट नहीं सुलझा, तो असम कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। अब सबकी नजरें बोरा के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह मामला सुलह पर खत्म होगा या असम की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा।

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