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Asaduddin Owaisi: 'हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी भारत की PM', ओवैसी पर भड़के सरमा, कह-जहर ना घोलें

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने हिजाब विवाद और नागरिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर देश की सियासत गरमा दी है। सोलापुर में आगामी निकाय चुनावों के लिए एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने भविष्यवाणी की कि भारत में भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला देश की प्रधानमंत्री बनेगी, जिस पर अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पलटवार किया है।

उन्होंने कहा कि 'संवैधानिक रूप से भारत में कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र और मुझे पूरा भरोसा है कि इडिया में हमेशा हिंदू पीएम ही होगा। उन्होंने औवेसी पर भड़कते हुए कहा कि कुछ लोग यहां पर केवल जहर घोलने का काम करते हैं।'

क्या कहा था असदुद्दीन ओवैसी ने?

बता दें कि ओवैसी ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा रचित संविधान की दुहाई देते हुए कहा कि 'हमारा लोकतंत्र हर नागरिक को शीर्ष पद तक पहुंचने का समान अवसर देता है। इसी रैली के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "नरेंद्र मोदी की गोद में बैठने वाला" नेता बताया। साथ ही, ओवैसी ने उमर खालिद और शरजील इमाम की लंबी जेल अवधि के बहाने कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।'

Asaduddin Owaisi

हिजाब और भविष्य का नेतृत्व, सोलापुर से ओवैसी का संदेश

ओवैसी ने सोलापुर की रैली में संविधान की समावेशी प्रकृति पर जोर दिया। ओवैसी ने कहा, "मेरा सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बने।" उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान जैसे देशों में धर्म नेतृत्व की सीमा तय करता है, लेकिन भारत का संविधान किसी भी जाति या धर्म के व्यक्ति को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बनने से नहीं रोकता।

ओवैसी ने अजित पवार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे वक्फ संशोधन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भाजपा का साथ दे रहे हैं। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि 'घड़ी' (NCP) को वोट देना सीधे तौर पर भाजपा को मजबूत करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-शिवसेना-एनसीपी की 'महायुति' नफरत की बुनियाद पर शासन कर रही है, जो लंबे समय तक नहीं टिकेगी।

UAPA और कांग्रेस पर हमला, "चक्रव्यूह के रचयिता आप हैं"

ओवैसी ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि आज जो युवा बिना सजा के साढ़े पांच साल से जेल में हैं, उसकी पटकथा कांग्रेस ने लिखी थी।

चिदंबरम के कार्यकाल का जिक्र

ओवैसी ने पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान UAPA में किए गए संशोधनों को इन कष्टों की जड़ बताया। उन्होंने कहा:

  • अस्पष्ट परिभाषाएं: 2008 के संशोधनों में 'आतंकवाद' की परिभाषा को इतना लचीला बनाया गया कि विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर भी इसे आसानी से लगाया जा सका।
  • सांसदों की चुप्पी: ओवैसी ने याद दिलाया कि जब उन्होंने संसद में इन धाराओं का विरोध किया था, तब अन्य विपक्षी दल मौन थे।

ये भी पढ़ें: Umar Khalid: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जेल में ही रहेंगे उमर-शरजील, 5 अन्य आरोपियों को मिली जमानत

संसद की वो चेतावनी जो सच साबित हुई

ओवैसी ने याद दिलाया कि उन्होंने 2007-08 में संसद के पटल पर इन संशोधनों का विरोध किया था। उन्होंने कहा, "SC ने 2 युवाओं को जमानत देने से मना कर दिया, क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में पी. चिदंबरम ने एक कानून में आतंकवाद को परिभाषित किया था... 2019 में, अमित शाह ने UAPA एक्ट में संशोधन किया, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली में बैठा NIA अधिकारी नागपुर में किसी को भी आतंकवादी घोषित कर सकता है। इस एक्ट को कांग्रेस ने सपोर्ट किया था। मैंने इसका विरोध किया और वोटिंग करवाना चाहता था। कांग्रेस फिर भी पीछे नहीं हटी..."

  • परिभाषा पर सवाल: ओवैसी ने तब कहा था कि कानून की धारा 15(a) में "किसी अन्य माध्यम से" जैसे शब्दों का इस्तेमाल खतरनाक है।
  • दुरुपयोग की आशंका: उन्होंने आशंका जताई थी कि इन अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल भविष्य में किसी भी लेखक या कार्यकर्ता को फंसाने के लिए किया जा सकता है।
  • रिकॉर्ड पर बात: उन्होंने दावा किया कि लोकसभा के रिकॉर्ड में उनकी यह चेतावनी दर्ज है कि इस कानून के तहत अल्पसंख्यकों को बिना चार्जशीट के 180 दिनों तक कैद में रखा जाएगा।

उमर-शरजील को क्यों नहीं मिली जमानत?

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उमर खालिद और शरजील इमाम की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वे अन्य आरोपियों के समान पायदान पर नहीं हैं।

पक्ष विवरण
अदालत की टिप्पणी रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया (Prima Facie) साजिश में इनकी केंद्रीय भूमिका दर्शाती है।
UAPA की धारा 43D(5) इस धारा के तहत अगर आरोप पहली नजर में सही लगते हैं, तो जमानत पर वैधानिक रोक लग जाती है।
विभेद का आधार कोर्ट ने माना कि खालिद और इमाम की भूमिका 'गुणात्मक रूप से भिन्न' है, इसलिए उन्हें 'समानता' (Parity) का लाभ नहीं मिल सकता।

किसे मिली राहत और क्या हैं शर्तें?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को राहत दी है, जो लंबे समय से जेल में बंद थे।

  • गुलफिशा फातिमा
  • मीरान हैदर
  • शिफा उर रहमान
  • मोहम्मद सलीम खान
  • शादाब अहमद

अदालत ने इन्हें जमानत देते समय 11 कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें दिल्ली से बाहर न जाना, गवाहों से संपर्क न करना और किसी भी सार्वजनिक रैली या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले पर टिप्पणी न करना शामिल है।

"क्या कांग्रेस का कोई नेता इतने साल जेल में रहा?"

ओवैसी ने कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या आजादी के बाद से कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता बिना किसी सजा के इतने लंबे समय (साढ़े पांच साल) तक जेल में रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ऐसे कानून बनाए जिनसे आम नागरिक और छात्र पिस रहे हैं, जबकि कानून बनाने वाले खुद इसके दायरे से सुरक्षित रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता की बातें हो रही हैं, लेकिन ओवैसी के इस रुख ने साफ कर दिया है कि UAPA और नागरिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर वे कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।

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