कुछ इस तरह से आप ने बदली पंजाब की राजनीति, अब केंद्र पर होगी नजर, जानिए क्या होगा अगला कदम
अमृतसर, 10 मार्च। आम आदमी पार्टी ने जब तकरीबन 10 साल पहले राजनीति में आने का ऐलान किया था तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह पार्टी पहले ना सिर्फ दिल्ली में ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी बल्कि पंजाब जैसे प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी जहां तकरीबन 70 साल से अकाली और कांग्रेस सरकार चलाती आ रही हैं। लेकिन हर किसी को चौंकाते हुए आम आदमी पार्टी ने इस बार ना सिर्फ पंजाब में जबरदस्त जीत दर्ज की बल्कि लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विकल्प देने की ओर बढ़ती नजर आ रही है।

क्यों अलग है आप का अभियान
चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल से वोटों की गणित के बारे जब पंजाब के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि मुझे गणित समझ नहीं आती है, मुझे सिर्फ एक बात समझ आती है, मैं देश को उन्नति करते देखना चाहता हूं। पिछले सात सालों में हमने यह साबित किया है कि स्कूलों को बेहतर किया जा सकता है, गरीबी को दूर किया गया जा सकता है, अस्पतालों की स्थिति को बेहतर किया जा सकता है, बिजली को 24 घंटे मुहैया कराया जा सकता है, देश की सड़कों को अच्छा किया जा सकता है। पिछले 70 सालों में इन लोगों ने जानबूझकर पंजाब को पिछे रखा है। या तो ये दल स्थिति को बेहतर करेंगे और हमारी जरूरत को खत्म करेंगे या फिर लोग हमे वोट करेंगे।

केजरीवाल की रणनीति में बदलाव
2013 में आम आदमी पार्टी की शुरुआत करने वाले अरविंद केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली का चुनाव लड़ा और 70 में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की, खुद केजरीवाल ने तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को चुनाव में मात दी। उसके बाद से ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हालांकि वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ हार के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी महत्वाकांक्षा को रोक दिया, लेकिन इस ओर विचार करना बंद नहीं किया। पंजाब में जीत दर्ज करके केजरीवाल ने दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर से जरूरत बहुत जोर से टक्कर मारी है और इसको लेकर भाजपा, कांग्रेस समेत कई दलों को चुनौती दी है जो केंद्र की राजनीति में खुद को विकल्प के तौर पर पेश करती हैं।
Recommended Video

क्षेत्रीय दल का ठप्पा खत्म
दो राज्यों में सरकार के गठन के बाद आम आदमी पार्टी ने कई क्षेत्रीय दलों से भी कहीं अधिक और इतने कम समय में हासिल किया है। आम आदमी पार्टी भाजपा, कांग्रेस और लेफ्ट के बाद चौथी ऐसी पार्टी बन गई है जिसने दो राज्यों में सरकार बनाई है। इस मामले में सपा, बसपा, जनता दल, एलजेपी, डीएमके, एआईएडीएमके, टीएमसी, शिवसेना, एनसीपी जैसे दल भी आप से पीछे हैं। ऐसे में साफ तौर पर आम आदमी पार्टी खुद को केंद्रीय राजनीति में विकल्प के तौर पर पेश करना चाहेगी।

केजरीवाल का प्रचार स्टाइल
आम आदमी पार्टी के चुनावी अभियान की बात करें तो उसने पंजाब, गोवा, उत्तराखंड में जमकर प्रचार किया और एक ही पैटर्न को यहां प्रचार में फॉलो किया। अरविंद केजरीवाल ने हर किसी के दिल-दिमाग में अपने भाषण, पोस्टर, होर्डिंग, टीवी विज्ञापन, अखबार में विज्ञापन के जरिए जगह बनाने की कोशिश की। सही उम्मीदवारों की पहचान की, मुख्यमंत्री चेहरे को चुनने में सावधानी बरती। पंजाब में दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह और राघव चड्ढा को 2020 में ही चुनाव इंचार्ज बना दिया और लगातार बेहतर करने के लिए इसपर रिसर्च करते रहे। आप ने अपने चुनाव प्रचार को साधारण रखा और मूलभूत जरूरतों को ही आगे बढ़ाते रहे। पार्टी को पता था कि पंजाब में बाहरी के टैग से वह बचना चाहती है, जिसके चलते भगवंत मान को सीएम उम्मीदवार बनाया गया।

सबसे ताकतवर क्षेत्रीय दल
आम आदमी पार्टी की इस जीत को कई मायनों में खास माना जा रहा है। आप से पहले कई भी क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर सका। टीएमसी की बात करें तो वह त्रिपुरा में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रही है, गोवा में भी पार्टी ने चुनाव लड़ा लेकिन कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं हुई। ऐसे ही बसपा ने भी पंजाब सहित कई प्रदेशों में चुनाव लड़ा लेकिन कुछ विधायकों की जीत तक ही सीमित रही। सपा ने भी महाराष्ट्र, बिहार में चुनाव लड़ा उनका भी हश्र कुछ ऐसा ही रहा। शिवसेना की भी यही कहानी रही।

जनता से जुड़े मुद्दों से बनाई पैठ
आप की सफलता की एक बड़ी वजह यह है कि वह आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, भ्रष्टाचार मुक्त सरकार जैसे मुद्दों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। पंजाब में जीत से पहले आप के पास सिर्फ दिल्ली में ही सरकार चलाने का अनुभव है। पार्टी के पास एक पुर्ण राज्य नहीं रहा जिससे वह साबित कर सके कि वो एक बेहतर विकल्प दे सकते हैं। ऐसे में पंजाब में जीत के बाद पार्टी के पास लोगों के सामने उदाहरण पेश करने का अच्छा अवसर है कि वह राष्ट्रीय राजनीति में विकल्प साबित हो सकते हैं।

कांग्रेस का विकल्प आप
आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर विकल्प के तौर पर खुद को पेश करने का अब अच्छा मौका है। पंजाब में अगले दो साल तक बेहतर सरकार चलाकर पार्टी उदाहरण पेश कर सकती है। इसके साथ ही आने वाले सालों में अगर पार्टी लगातार अच्छा करती है और अन्य राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करती है तो निसंहेद पार्टी भाजपा और कांग्रेस को केंद्र में चुनौती देती नजर आएगी। खुद आप नेता राघव चड्ढा ने पंजाब में जीत के बाद है कि कांग्रेस के विकल्प के तौर आम आदमी पार्टी अपने आप उभरकर सामने आई है।












Click it and Unblock the Notifications