केजरीवाल के यूनीक आईडिया ने उड़ाई मोदी की नींद
[अजय मोहन] मैं छोटा था, मेरे पिताजी और बाबा दोनों जेल विभाग में कार्यरत थे, उसके बावजूद जब भी मैं कुछ गलत करता, तो मुझसे कहा जाता, "बेटा अगर गलत काम करोगे तो पुलिस पकड़ ले जायेगी।" बचपन में ये शब्द आपने भी जरूर सुने होंगे। लेकिन आज पहली बार किसी इंसान को कहते सुन रहा हूं, "गलत काम बढ़ रहा है, मुझे पुलिस को पकड़ना है, प्रधानमंत्री जी मुझे पुलिस को पकड़ने की इजाजत दीजिये।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हू-ब-हू यही शब्द तो नहीं कहे, लेकिन बड़ी ही विनम्रता के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वे दिल्ली सरकार की कमान राज्य सरकार के हाथों में दे दें। सच पूछिए तो केजरीवाल के इस यूनीक आईडिया ने प्रधानमंत्री की रातों की नींद उड़ा दी है।
ऐसा पहली बार हुआ
अगर आप यह सोच रहे हैं कि यूनीक कैसे तो जवाब टेलीविजन पर दिख रहा केजरीवाल का विजन है। आपने निश्चित तौर पर केजरीवाल का वो विज्ञापन जरूर देखा होगा, जिसमें मीनाक्षी कांड के बाद केजरीवाल ने पीएम से दिल्ली पुलिस की कमान दिल्ली सरकार को सौंपने की डिमांड की है। जरा सोचिये, क्या भारत के इतने लंबे इतिहास में कभी किसी मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से टेलीविजन पर इस तरह की कोई मांग की है? उत्तर है नहीं! इस विज्ञापन के बाद आज अगर दिल्ली में काई भी घटना घटी, तो लोग उंगली केजरीवाल पर नहीं मोदी पर उठायेंगे।
अब तक मुख्यमंत्री या तो पत्र लिखते थे, या अपने प्रतिनिधियों को केंद्र की बैठकों में भेजते थे। हम यहां उन्हें नहीं गिन रहे हैं, जो रैलियों में बड़े-बड़े दावे ठोककर मांगें उठाकर चले गये।
इस वक्त संसद में मॉनसून सत्र जारी है, तमाम सारे विधेयक हैं, जो पास होने हैं। ऐसे में अगर दिल्ली में एक भी बड़ी आपराधिक घटना घटती है, तो सीधी जिम्मेदार केंद्र सरकार को माना जायेगा। जनता भी ठीकरा मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर ही फोड़ेगी। ऐसा हुआ तो कांग्रेस व अन्य विरोधी दल सदन में हंगामा करने में जरा भी देर नहीं लगायेंगे।
केजरीवाल समझें- सबकुछ मोदी के हाथ में नहीं
दिल्ली के सीएम केजरीवाल को यह समझना होगा कि दिल्ली पुलिस कोई नरेंद्र मोदी की निजी संपत्ति नहीं है, जो वो सीधे उठाकर दे देंगे। पुलिस की कमान राज्य सरकार के हाथ में देने के लिये बाकायदा एक विधेयक लाना होगा। विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद ही दिल्ली पुलिस की कमान दिल्ली सरकार को सौंपी जा सकेगी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाथ में अगर इस वक्त दिल्ली पुलिस की कमान है, तो वह किसी नियमावली के तहत है। उस नियमावली का तोड़ निकाले बगैर पुलिस की कमान केजरीवाल को सौंपी नहीं जा सकती है।













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