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सियांग नदी का पानी फिर हुआ मटमैला,अरुणाचल प्रदेश में चीन को लेकर क्या है आशंका ? जानिए

अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी का पानी फिर से मटमैला हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक इससे लगता है कि चीन अपने ऊपरी इलाके में कोई बड़े निर्माण के काम में जुटा हुआ है। चीन की ओर बढ़ रही आशंका को देखते हुए अरुणाचल के स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है। चीन की वजह से सियांग नदी के साथ पहली बार ऐसा नहीं हुआ है। पांच साल पहले विदेश मंत्री के स्तर पर भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। लेकिन, चीन की संदिग्ध हरकतों के चलते कभी नदी का पानी मटमैला हो जाता है तो कभी काला पड़ जाता है। भारत में कई गांव वाले इसका पानी पीने के लिए भी इस्तेमाल कर लेते हैं। इस वजह से चिंता बढ़नी स्वाभाविक है। साथ ही साथ यह भी आशंका है कि कहीं चीन नदी के ऊपरी हिस्से में कोई बांध वगैरह तो नहीं बना रहा है?

कोई बारिश नहीं, फिर भी सियांग नदी का पानी हुआ मटमैला

कोई बारिश नहीं, फिर भी सियांग नदी का पानी हुआ मटमैला

अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के डिप्टी कमिश्नर तायी तग्गु ने कहा है कि चीन में सियांग नदी को यार्लुंग त्सांग्पो कहा जाता है। हो सकता है कि वहां 'किसी तरह से मिट्टी काटने का काम' चल रहा है, जिसकी वजह से नदी के पानी के साथ कीचड़ आ रहा है। लेकिन, इसके चलते भारत के सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप की स्थिति है। पूर्वी सियांग जिले के मुख्यालय पासीघाट में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक यह नदी अरुणाचल का मुख्य जलमार्ग है, लेकिन तीन दिन पहले इसका रंग अचानक बदल गया और यह मटमैला हो गया। तग्गु के मुताबिक 'पानी में कीचड़ आ रहा है, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में किसी तरह की वर्षा नहीं होने के चलते यह बहुत ही असामान्य बात है। हम जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मदद से हालात की निगरानी कर रहे हैं।'

लोगों की आजीविका का टेंशन

लोगों की आजीविका का टेंशन

डिप्टी कमिश्नर का कहना है, 'ऐसा लगता है कि नदी की ऊंचाई वाले इलाके में किसी तरह के निर्माण का काम चल रहा है, जो कि चीन से ही निकलती है। ऊंचे क्षेत्रों में भूस्खलन भी इसका कारण हो सकता है।' लेकिन, जबतक इसका कारण स्पष्ट नहीं होता, स्थानीय लोग खासकर मछुआरे और किसान सियांग नदीं के पानी का रंग बदलने से चिंतित हो गए हैं। पासीघाट में एक स्थानीय निवासी मिगोम पर्टिन ने कहा, 'पानी में भारी स्लैग से जलीय जीव मर सकते हैं। किसान भी नदी से जल लेते हैं। नदी का पानी हमारे मवेशी भी पीते हैं। हमें चिंता है कि कहीं इसके कारण लोगों की आजीविका ना प्रभावित हो जाए। '

चीन की वजह से बार-बार बदलता है नदी के पानी का रंग

चीन की वजह से बार-बार बदलता है नदी के पानी का रंग

चीन की वजह से सियान नदी के साथ पहले भी ऐसे हालात पैदा हो चुके हैं। 2017 के दिसंबर में इस नदी का पानी अचानक काला हो गया था, जिससे राज्यभर में सनसनी फैल गई थी। उस समय अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा था कि वह निजी तौर पर हालात पर नजर रख रहे हैं और केंद्र से भी इसपर ध्यान देने का अनुरोध किया था। जिसके बाद भारत की ओर से तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन में अपने समकक्ष वांग यी के सामने यह मामला उठाया था। 2020 में भी अभी की तरह ही इस नदी का पानी असामान्य रूप से गंदा हो गया था।

हम नहीं जानते, लेकिन अब हम चिंतित हैं- स्थानीय

हम नहीं जानते, लेकिन अब हम चिंतित हैं- स्थानीय

एक स्थानीय गांव वाले नाथन डोले ने नदी के पानी के मटमैला होने पर कहा है, 'इस असामान्य बदलाव का कारण क्या है, हम नहीं जानते, लेकिन अब हम चिंतित हैं। हमारे मवेशी इसका पानी पीते हैं और कुछ गांव वाले तो सियांग का ही पानी पीने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।' उसने कहा है, 'हम नहीं जानते कि ऊपर कुछ हुआ है। पिछले कुछ दिनों से कोई बारिश नहीं हुई है और जल स्तर में कई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन पानी का रंग अचानक बदल गया।'(पहली दो तस्वीरें छोड़कर बाकी सब फाइल)

चीन सियांग के साथ कर रहा है कोई खेल ?

चीन सियांग के साथ कर रहा है कोई खेल ?

सियांग नदी ब्रह्मपुत्र नदी की ही एक सहायक नदी है, जो 1,600 किलोमीटर लंबी है और चीन में यार्लुंग त्सांग्पो कहलाती है। यह दक्षिणी तिब्बत से निकलकर भारत में प्रवेश करती है, जिसके बाद सियांग कहलाती है और इसके नाम पर अरुणाचल प्रदेश के जिले का भी नाम है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि चीन किसी ना किसी बांध-निर्माण के काम में जुटा हुआ है, जिसके चलते सियांग नदी इस तरह से प्रदूषित हो रही है। (इनपुट-पीटीआई और एएनआई)

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