Article 370 Hearing: 'शक्ति और शक्ति का गलत प्रयोग दो अलग-अलग बातें', SC ने की अहम टिप्पणी
Article 370 Hearing: जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने के बाद इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं पर देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई चल रही है। आज सुनवाई का 7वां दिन था, जिसमें आज सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम बात कही है।

अदालत ने कहा कि 'ये किसने कह दिया कि 'आर्टिकल 370 को संविधान में स्थायी दर्जा मिल गया है, ये कहना सही नहीं है।' आपको बता दे कि सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ (पांच जजों की संविधान पीठ) आर्टिकल 370 पर सुनवाई कर रही है।
राष्ट्रपति शासन की पूरी प्रक्रिया की जांच होना जरूरी
आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील राजीव धवन ने कोर्ट में कहा कि 'आर्टिकल 370 के मामले में राष्ट्रपति की रिपोर्ट संसद में पेश नहीं की गई है इसलिए राष्ट्रपति शासन की पूरी प्रक्रिया की जांच होना जरूरी है।' जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 'राष्ट्रपति के बाद आर्टिकल 356 के तहत ये अधिकार है कि वो संविधान के कुछ प्रावधानों को निलंबित कर सके इसलिए पावर और उसका दुरुपयोग दो अलग बातें हैं। '
क्या कहा राजीव धवन ने?
कोर्ट में राजीव धवन ने कहा कि 'संसद कानून बना सकता है लेकिन एक लिमिटेशन के तहत, नए राज्य में जो बदलाव हुए हैं उसे पहले राष्ट्रपति को राज्य विधानसभा में रेफर करना होता है लेकिन जब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू था तब राष्ट्रपति अनुच्छेद-3 का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं इसलिए इस बारे में सवाल उठ रहे हैं, जम्मू कश्मीर के लिए इस तरह से बिल नहीं लाया जा सकता था, यहां पावर का गलत इस्तेमाल हुआ है।
केंद्र ने मनमाने ढंग से आर्टिकल 370 को हटाया!
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद-370 के प्रावधानों में बदलाव कर जम्मू-कश्मीर के स्पेशल राज्य के दर्जे को खत्म कर दिया था। जिसके खिलाफ कुल 23 याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई हैं, जिसमें कहा गया है कि केंद्र ने मनमाने ढंग से आर्टिकल 370 को हटाया है।
जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया
फिलहाल केंद्र के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। जहां केंद्र सरकार का कानून वैसे ही लागू होता है, जैसे कि देश के दूसरे राज्यों में होता है। सरकार का कहना है कि सही वक्त आने पर इसे विशेष राज्य का भी दर्जा मिलेगा। कश्मीर के विकास के मद्देनजर यहां से आर्टिकल 370 को हटना काफी जरूरी था।












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