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Article 35A: जानिए कौन कैसे पका रहा है, अनुच्छेद 35A के नाम पर स्वार्थ की खिचड़ी

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दिल्ली- अनुच्छेद 35A (Article 35A) की संवैधानिकता का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लटका हुआ है और जल्द ही इसपर सुनवाई होनी है। लेकिन, इसको लेकर जम्मू-कश्मीर की सियासत में अचानक इतना ज्यादा उबाल क्यों आ गया है? इसे हवा देने के लिए आतंकवादी संगठनों से लेकर पाकिस्तान तक क्यों कूद पड़े हैं? आइए इसके पीछे की राजनीति को समझने की कोशिश करते हैं।

हिजबुल में क्यों मची हड़कंप?

हिजबुल में क्यों मची हड़कंप?

अनुच्छेद 35A (Article 35A) हटाए जाने को लेकर चल रहे कयासों के बीच इसके विरोध में हिजबुल मुजाहिदीन जैसा आतंकवादी संगठन भी कूद पड़ा है। खबरों के मुताबिक इसके ऑपरेशनल चीफ रियाज नाइकू ने एक ऑडियो जारी करके इसे हटाने पर कश्मीर में रह रहे गैर-कश्मीरियों को गंभीर परिणाम भुगतने के धमकी दी है। हिजबुल को लगता है कि ऐसा करके उसे एकबार फिर वही परिस्थितियां पैदा करने का मौका मिलेगा, जैसा 1989-90 के दौरान हुआ था। उसे भरोसा है कि इस मुद्दे पर वह फिर से आम कश्मीरियों का विश्वास जीत सकता है। इसके लिए उसने अभी से कश्मीरी पुलिस और राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी भड़काने का प्रयास शुरू कर दिया है। ऑडियो में नाइकू को यह कहते सुनाया गया है कि,"यह पुलिसकर्मियों को भी प्रभावित करेगा, उन्हें ड्यूटी छोड़ देनी चाहिए और सरकारी कर्मचारियों को भी ऐसा ही करना चाहिए।"

पाकिस्तान की खलबली का क्या है कारण?

पाकिस्तान की खलबली का क्या है कारण?

पुलवामा हमले के बाद आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को आम कश्मीरियों के दिलों से भी उठ जाने का खतरा सताने लगा है। ऐसे में उसे भी अनुच्छेद 35A (Article 35A)के बहाने कश्मीरियों को भड़काने का अच्छा मौका दिख रहा है। इसलिए उसने एकबार फिर से भारत के आंतरिक मामले में दखल देने की कोशिश की है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान जारी कर अनुच्छेद 35A (Article 35A) को हटाने की किसी भी कोशिश को अंतरराष्ट्रीय कानून और कश्मीर के मूल निवासियों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि "पाकिस्तान ऐसे किसी भी प्रयास की निंदा करता है, क्योंकि यह स्पष्ट तौर पर इसका लक्ष्य जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफी बदलना है।" पुलवामा हमले में स्थानीय आत्मघाती हमलावर के सामने आने के बाद कश्मीरी जनता के एक वर्ग में पाकिस्तान के प्रति गहरी नाराजगी पैदा हुई है। ऐसे में उसे लगता है कि अनुच्छेद 35A (Article 35A) के बहाने अपने दाग धो सकता है।

नेताओं को सियासी जमीन खिसकने का डर

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियों की सियासत ही अनुच्छेद अनुच्छेद 35A(Article 35A) या धारा 370 (Article 370) के ईर्द-गीर्द टिकी है। इसलिए इन्होंने खुद में कभी भी अखंड भारत की सोच ही विकसित नहीं होने दी। शायद उन्हें इस बात का डर है कि अगर कश्मीर में भारत के दूसरे हिस्सों के भारतीयों को बसने की इजाजत मिल जाएगी, तो उनका तो जनाधार ही संकट में पड़ जाएगा। शायद यही वजह है राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकीं महबूबा मुफ्ती इसको लेकर चेतावनी भरे अंदाज में बातें कर रही हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि " जो लोग इसे हटाने की बात करते हैं, उन्हें इस तरह के फैसले के बाद पैदा होने वाले हालातों के लिए कश्मीरियों को दोष नहीं देना चाहिए।" यही नहीं बीजेपी के सहयोगी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी कहा है कि अनुच्छेद 35A(Article 35A) से किसी तरह की छेड़छाड़ कश्मीर में मुख्यधारा की सोच की हत्या करने जैसी होगी। कश्मीर की राजनीति में कांग्रेस की राजनीति शुरू से ही बीजेपी की विचारधारा से दूर और स्थानीय पार्टियों की सोच के करीब रही है। इसलिए, सरकार द्वारा औपचारिक तौर पर फिलहाल इस तरह के किसी भी कदम से इनकार किए जाने के बावजूद यह पार्टी बीजेपी के खिलाफ हमलावर है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जी ए मीर के मुताबिक इस तरह का कोई भी कदम उठाना तो दूर, उसपर विचार करना भी विनाशकारी साबित होगा। कांग्रेस को पता है कि कश्मीर की राजनीति करनी है, तो इस तरह के मुद्दों में पड़ने का मतलब जानबूझकर अपना हाथ जलाने के समान है।

बीजेपी का 'गेमप्लान'

बीजेपी का 'गेमप्लान'

बीजेपी को पता है कि अनुच्छेद 35A(Article 35A) का मुद्दा जितना उछलेगा, उसे जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश में यह संदेश देने का मौका मिलेगा कि वैचारिक तौर पर वह पूरी तरह से इन्हें हटाना चाहती है। वैसे भी धारा 370 (Article 370) को किनारे रखने के कारण उसका अपना एक खास वोट बैंक पहले से ही मायूस है। ऐसे में वो किसी तरह एक असमंजस की स्थिति बनाए रखना चाहती है। राज्य में सुरक्षा बल के जमावड़े को लेकर जम्मू-कश्मीर की सरकार कहती है कि यह चुनाव की तैयारियों के लिए किया जा रहा है। आधिकारिक तौर पर जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से ये भी साफ कर दिया गया है कि अनुच्छेद 35A(Article 35A) पर राज्य सरकार का स्टैंड फिलहाल नहीं बदला है, और इसपर कोई भी फैसला चुनी हुई सरकार को ही लेना है। लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी इस तरह के किसी भी प्रयास को खारिज किए जाने संबंधी कोई बयान नहीं दे रही। क्योंकि, विपक्ष अनुच्छेद 35A(Article 35A)को हटाने के नाम पर जितना बवाल करेगा, बीजेपी के लिए राष्ट्रवाद का कार्ड खेलना उतना ही आसान रहेगा।

इसे भी पढ़ें- ऑफिसर्स की बेटियां कश्‍मीर में तैनात सुरक्षाबलों के मानवाधिकार के लिए पहुंची सुप्रीम कोर्ट

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English summary
Article 35A a fodder for political parties,pakistan & even terrorists
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