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Arif Mohammad Khan का नाम भी उपराष्ट्रपति की रेस में, बीजेपी के इस फैसले के पीछे है बड़ी प्लानिंग

Arif Mohammad Khan: जगदीप धनखड़ ने मानसून सत्र के पहले दिन अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। अब उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है और इस पद के लिए कई नए दावेदारों के नाम चल रहे हैं। इसमें बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का नाम भी जोर शोर से चर्चा में है। माना जा रहा है कि बिहार चुनाव से पहले बीजेपी यह बड़ा दांव खेल सकती है। राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए लालू यादव से लेकर कांग्रेस और टीएमसी के लिए भी समर्थन देना मजबूरी बन सकती है।

आरिफ मोहम्मद खान अभी बिहार के गवर्नर हैं और इससे पहले केरल के राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक करियर में वह कई बार विवादों में भी रहे हैं। पिछले एक दशक से मुसलमानों में वैज्ञानिक सोच के विस्तार और तकनीकी शिक्षा जैसी बातों की खुलकर वकालत करते हैं। जानें कैसे बीजेपी उन्हें राष्ट्रपति बना एक साथ कई मोर्चे पर संतुलन साध सकती है।

Arif Mohammad Khan

Arif Mohammad Khan के जरिए बीजेपी साधेगी विपक्ष को

बीजेपी पर विपक्षी दल अक्सर हिंदुत्ववादी पार्टी होने का आरोप लगाते हैं। मुसलमानों के कम प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठाए जाते हैं। आरिफ मोहम्मद खान को उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी एक साथ कई समीकरण साध सकती है। राजनीति में सक्रिय पारी खेलने के साथ ही आरिफ मोहम्मद खान की पहचान प्रगतिशील मुस्लिम बुद्धिजीवी के तौर पर रही है।

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बिहार के सामाजिक-राजनीतिक समीकरण में यह आम तथ्य है कि यादव और मुस्लिम वोटर्स आरजेडी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। टीएमसी पर भी मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते हैं। अब एक बड़े संवैधानिक पद पर मुसलमान चेहरे को बिठाकर बीजेपी एक साथ कई विपक्षी पार्टियों को साध सकती है। साथ ही, बिहार चुनाव से पहले यह बड़ा सांकेतिक कदम भी साबित हो सकता है। अगले साल केरल और बंगाल में चुनाव हैं और वहां भी चुनावी हार-जीत में मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका होती है।

वक्फ बिल जैसे मुद्दों पर बनेंगे सरकार की प्रभावी आवाज

आरिफ मोहम्मद खान के राजनीतिक-सामाजिक जीवन को देखा जाए, तो वह चुनिंदा मुस्लिम हस्तियों में हैं जो खुलकर इस्लाम में सुधार की बात करते हैं। मोदी सरकार ने सत्ता में रहते हुए तीन तलाक कानून, वक्फ संशोधन बिल जैसे अहम मुद्दों पर काम किया है। शाह बानो मामले में राजीव गांधी सरकार की खुले तौर पर आलोचना करनेवालों में आरिफ मोहम्मद शामिल थे। बीजेपी उन्हें बड़ा पद देकर मुस्लिम समुदाय से जुड़े सुधारों और कानूनों के लिए सामाजिक सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे पर उठ रहे सवाल

मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ ने बतौर उपराष्ट्रपति राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया था। रात में अचानक उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस पर लंबा पोस्ट लिख सरकार से आग्रह किया है कि उनका इस्तीफा नामंजूर किया जाए। दूसरी ओर मीडिया में ऐसी खबरें भी हैं कि बीजेपी अध्यक्ष और नेता सदन जेपी नड्डा से मतभेदों की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है। नड्डा ने स्प्ष्ट कर दिया है कि उनके धनखड़ के साथ अच्छे संबंध हैं और कोई विवाद नहीं है।

यह भी पढ़ें: धनखड़ का इस्तीफा, कौन चलाएगा राज्यसभा? उपराष्ट्रपति का काम कैसे होगा, चुनाव कब होंगे, क्या कहता है संविधान?

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