क्या ये राज्य हैं देश में कोविड वैक्सीन के हाहाकार के जिम्मेदार ? RTI में तमिलनाडु का नाम सबसे ऊपर
नई दिल्ली, 20 अप्रैल: भारत में पिछले 16 जनवरी से वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू होने के बाद से इसकी बहुत बड़ी मात्रा बर्बाद हो चुकी है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मार्च महीने में मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में इसपर गंभीर चिंता जता चुके हैं। हाल में कई राज्यों से वैक्सीन की किल्लत को लेकर हाहाकार की खबरों ने कई बार केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति पैदा कर दी है। कई राज्यों ने वैक्सीन के पर्याप्त डोज उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए, कई वैक्सीनेशन सेंटर पर ताले भी लगाए थे। लेकिन, अब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह जानकारी सामने आई है कि सबसे ज्यादा वैक्सीन की बर्बादी करने वाले राज्यों में तमिलनाडू सबसे टॉप पर है।

वैक्सीन की बर्बादी में तमिलनाडु,हरियाणा,पंजाबा और तेलंगाना आगे-आरटीआई
एक आरटीआई के सवाल के जवाब में जानकारी मिली है कि बीते 11 अप्रैल तक देश में वैक्सीन की बर्बादी करने वाले राज्यों में 12 फीसदी के साथ तमिलनाडु सबसे ऊपर था। इसके बाद हरियाणा (9.74%), पंजाब (8.12%), मणिपुर (7.8%) और तेलंगाना (7.55%) का नंबर है। गौरतलब है कि हाल ही में वैक्सीन की किल्लत को लेकर केंद्र की बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के शासित महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों के बीच खूब राजनीति हो चुकी है। इन राज्यों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने उनकी आबादी की तुलना में भाजपा-शासित गुजरात जैसे राज्यों को ज्यादा डोज सप्लाई की है। जबकि, केंद्र सरकार ने हमेशा से कहा है कि उसने प्रभावी टीकाकरण अभियान चलाने वाले राज्यों का ख्याल रखा है और उसने वैक्सीन की किल्लत के नाम पर बेवजह की राजनीति करने का भी आरोप लगाया है। दरअसल, आरटीआई से पता चला है कि 16 जनवरी को शुरू हुए टीकाकरण अभियान से लेकर 11 अप्रैल तक 10 करोड़ वैक्सीन की खुराक में से 44 लाख डोज की बर्बादी हुई है।
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केरल, बंगाल, हिमाचल और गोवा ने किया कमाल
हालांकि, आरटीआई से यह भी पता चला है कि कुछ राज्यों ने कमाल करके दिखाया है, जिनमें कोरोना वैक्सीन की 'शून्य बर्बादी' दर्ज की गई है। ये राज्य हैं केरल, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, गोवा के अलावा केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव, अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप। बता दें कि पिछले दिनों जब वैक्सीन को लेकर कुछ राज्यों ने केंद्र को आपात संदेश भेजा था तो केंद्र का यही कहना था कि यह सबकुछ वैक्सीन के प्रबंधन में कमी और उसकी बर्बादी के चलते ज्यादा हो रहा है। पिछले हफ्ते केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था, 'समस्या बढ़िया प्लानिंग की है, वैक्सीन डोज की कमी की नहीं। हम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय-समय पर वैक्सीन की डोज उपलब्ध करवा रहे हैं और जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि बड़े राज्यों को हम चार दिन की सप्लाई एक ही बार में दे देते हैं और चौथे-पांचवें दिन हम फिर से आपूर्ति करते हैं। छोटे राज्यों के लिए हम एकबार में 7-8 दिनों के लिए वैक्सीन डोज की सप्लाई करते हैं और सातवें या आठवें दिन उसे दोहराते हैं।' उन्होंने कहा था कि सभी राज्य सरकारों को कोल्ड चेन प्वाइंट पर पता करना पड़ेगा कि कितनी डोज बिना इस्तेमाल की पड़ी हुई हैं।

1 मई से 18 साल से ज्यादा के लोगों को लगेगा टीका
इस बीच सोमवार को केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आने वाले एक मई से 18 साल से ज्यादा के सभी लोगों की वैक्सीनेशन की इजाजत दे दी है। वैसे राज्यों को यह छूट है कि वह अपने हिसाब से 18 साल से ऊपर की उम्र सीमा तय कर सकते हैं। यही नहीं राज्य सरकारें अब सीधे कंपनियों से और विदेशों से भी वैक्सीन खरीद सकती हैं। इस दौरान वैक्सीन के उत्पादन में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने कंपनियों को 4,500 करोड़ रुपये की एडवांस पेमेंट की है। इनमें से 3,000 करोड़ रुपये कोविशील्ड बनाने वाली सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को और 1,500 करोड़ रुपये देसी वैक्सीन कोवैक्सिन बनाने वाली भारत बायोटेक को दी गई है।












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