APJ Abdul Kalam: 'मैं तीन बेटों का बाप', अविवाहित कलाम ने क्यों कही थी ये बात? अटल बिहारी भी रह गए थे हैरान
APJ Abdul Kalam: देश के प्रिय राष्ट्रपति और बच्चों के चहेते देश के मिसाइल मैन डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम का आज जन्मदिन है, जिसे कि 'वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे' के रूप में मनाया जाता है। अब्दुल कलाम भले ही आज हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं लेकिन उनके विचार लोगों के दिलों में जिंदा हैं, उनकी बातें लोगों को हौसला देती हैं आगे बढ़ने का। कलाम का व्यक्तित्व सिखाता है कि इंसान का सबसे बड़ा गहना उसकी सच्चाई है और उसके अंदर की ईमानदारी ही उसे ताकतवर बनाती है।
दुनिया में कोई चीज भी असंभव नहीं बस उसे पाने के लिए आप शिद्दत से मेहनत कीजिए। कलाम तो कुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते थे। वो अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और कौशल के लिए जितने ज्यादा लोकप्रिय हैं, उससे कहीं ज्यादा वो हाजिरजवाबी के लिए भी मशहूर रहे हैं।

बच्चों से बइंतहा प्यार करने वाले अब्दुल कलाम के बारे में कई रोचक किस्से हैं, जिन्हें सुनकर आप हैरान भी रह जाएंगे और पेट पकड़कर भी हंसेंगे भी। एक ऐसा ही रोचक किस्सा राष्ट्रपति भवन का है, जो कि काफी दिनों तक सुर्खियां बना था, जिसे जानने के बाद देश के पूर्व पीएम अटल बिहार बाजपेयी ने कहा कि 'ये अद्भुत है, मैं भी निशब्द हो गया।'
'ये अद्भुत है, मैं भी निशब्द हो गया' (APJ Abdul Kalam)
दरअसल एक सुबह दस बजे के आस-पास राष्ट्रपति भवन में अब्दुल कलाम बहुत सारे बच्चों से घिरे हुए थे। वो बच्चों को उनके सवालों का जवाब दे रहे थे, वो भी उनके उत्सुक और खुश थे जितने बच्चे।
'आपसे किसने कह दिया कि मेरे बच्चे नहीं है?' (APJ Abdul Kalam)
ऐसे में वहां बैठे एक पत्रकार ने अब्दुल कलाम से कहा कि 'आप कितने अच्छे से बच्चों से बात करते हैं, लगता ही नहीं आपके बच्चे नहीं है।' इस पर कलाम ने उनकी ओर देखा और झट से कहा कि 'आपसे किसने कह दिया कि मेरे बच्चे नहीं है?' वो पत्रकार एकदम से सकते में आ गया, उसने तुरंत कहा 'अरे मुझे तो यही पता है कि आपकी शादी नहीं हुई इसलिए बोला कि आपके बच्चे नहीं है।'
'शादी से बच्चों का क्या-लेना देना, मैं तीन बेटों का पिता' (APJ Abdul Kalam)
इस पर कलाम ने फिर कहा कि 'शादी से बच्चों का क्या-लेना देना, मैं तीन बेटों का पिता हूं। अब तो पत्रकार की शक्ल देखने लायक थी। केवल वो ही नहीं वहां उस वक्त भवन में उपस्थित सभी लोग हैरान होकर कलाम की ओर देख रहे थे, वो समझ ही नहीं पा रहे थे कि डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम ऐसे केसै बोल रहे हैं?'

'पृथ्वी, अग्नि, और ब्रह्मोस मेरे बच्चों का नाम'
पत्रकार की शक्ल देखने के बाद डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम ने मुस्कुराते हुए कहा 'अरे मित्र, मेरे तीन बेटे हैं, जिनका नाम है -'पृथ्वी, अग्नि, और ब्रह्मोस'। इतना कहना था कि सब जोर-जोर से हंस पड़े। दरअसल ये तीनों ही मिसाइल के नाम हैं, जिसे जन्म देने वाले डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम ही थे। कलाम की बात सुनकर पत्रकार की बोलती बंद हो गई लेकिन वो भी मुस्कुराए बिना नहीं रह पाया।
'जनता के राष्ट्रपति के रूप में लोकप्रिय APJ Abdul Kalam'
तो ऐसे थे डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम, बेहद पाक-साफ, खुशमिजाज और बिंदास। दिल में वही जो जुबां पर, बच्चों से बेहद ही प्यार करने वाले, क्योंकि वो मानते थे कि बच्चे दिल के साफ होते हैं। उन्हें 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में जाना जाता है।
तिरुचिरापल्ली से भौतिक विज्ञान में स्नातक किया
गौरतलब है कि डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम (तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम के स्कूल से प्राप्त की और बाद में सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिक विज्ञान में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
'इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP)'
डॉ. कलाम ने अपने करियर की शुरुआत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से की। बाद में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़े और वहां उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-III के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने 'इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP)' का नेतृत्व किया, जिसके तहत अग्नि, पृथ्वी जैसी मिसाइलों का सफल विकास हुआ। इसी वजह से उन्हें 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' कहा गया।
'पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जो राष्ट्रपति बने'
उन्होंने भारत के पोखरण-II परमाणु परीक्षण (1998) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया। वे पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जो राष्ट्रपति बने। उनका कार्यकाल जनता में अत्यंत लोकप्रिय रहा क्योंकि वे हमेशा युवाओं, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने की बात करते थे।
डॉ. कलाम को उनके असाधारण योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख हैं -
- भारत रत्न (1997) - भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
- पद्म भूषण (1981)
- पद्म विभूषण (1990)
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार (1997)
- किंग चार्ल्स यूनिवर्सिटी का मानद डॉक्टरेट (2007) सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मान
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