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पुतिन विरोधी रूसी एंकर ने कहा, 'उस रात मैं नहीं भागती तो ज़िंदा नहीं बचती'

रूस पुतिन विरोध यूक्रेन युद्ध
Reuters
रूस पुतिन विरोध यूक्रेन युद्ध
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पिछले साल अक्टूबर की बात है. रूस की पत्रकार और एंकर मैरिना ओव्स्यानिकोवा पर यूक्रेन पर रूस के हमले की आलोचना करने का मुक़दमा दर्ज़ हो चुका था. लेकिन उसकी सुनवाई से एक हफ़्ते पहले ही एक रात मैरिना ने अपनी बेटी को उठाया और बॉर्डर की तरफ़ भाग निकलीं.

उस रात मैरिना अपने घर में नज़रबंद थीं और उनके हाथ में एक इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट भी लगाया गया था.

ऐसा उन्होंने अपने वकील के कहने पर किया था. मैरिना ने पिछले हफ़्ते पेरिस के एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसकी जानकारी दी.

मैरिना ने बताया, "मेरे वकील ने मुझसे कहा, जल्दी से भाग जाओ यहां से, वो तुम्हें जेल में डालने जा रहे हैं."

मैरिना पिछले मार्च में तब सुर्ख़ियों में आई थीं जब उन्होंने रूस के मुख्य सरकारी चैनल पर अपने शो के दौरान एक पोस्टर दिखाते हुए यूक्रेन पर हमले का विरोध किया था.

मैरिना के हाथों में उस पोस्टर पर जो लिखा था, हिंदी में उसका मतलब कुछ ऐसा था- 'ये जंग ठीक नहीं. इसे रोको. इनकी किसी बात का यक़ीन मत करो, ये सारे लोग यहां झूठ बोल रहे हैं.'

उस दिन को याद करते हुए मैरिना बताती हैं, "वो पोस्टर दिखाने के बाद एफ़एसबी (रूसी सिक्योरिटी सर्विस) उन्हें अकेले में ले गई. मुझसे उनके बॉसेज़ (चैनल के) ने पूछताछ शुरू कर दी."

उस दिन किसी ने भी उनका यक़ीन नहीं किया कि रूसी टेलीविज़न पर इस तरह सरकार के फ़ैसले का विरोध उन्होंने बिल्कुल अपनी मर्ज़ी से किया था.

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रूस पुतिन विरोध यूक्रेन युद्ध
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अपने बच्चों की ख़ातिर

बीबीसी से बातचीत में मैरिना ने बताया कि जब वो अपने दफ़्तर से अपना सामान समेट रही थीं, तब उनके कई साथी कर्मियों को उनसे सहानुभूति हुई, मगर वो उन्हें हैरानी से देख रहे थे.

मैरिना आगे बताती हैं, "गुडबाय कहते हुए वो लोग मुझे आंखें फाड़-फाड़ कर देख रहे थे, जैसे उन्हें ये पक्का लग रहा था कि अब वो मुझे कभी नहीं देखेंगे."

उस रात मैरिना जर्मनी भागने में कामयाब हो गई थीं. लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा ताकि अपने बच्चों की कस्टडी ले सकें.

इस दौरान वो लगातार रूस के ख़िलाफ़ जंग विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होती रहीं. इनमें से एक प्रदर्शन जुलाई में रूसी संसद के सामने हुआ था.

इसी प्रदर्शन में शामिल होने पर उनके खिलाफ़ नए रूसी क़ानूनों के तहत मुकदमा दर्ज हुआ. इसके तहत सेना के ख़िलाफ़ कोई ग़लत बात फैलाना अपराध है.

इसी क़ानून के तहत रूस ने यूक्रेन पर हमले को क़ानूनी क़रार दिया और सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया को ये निर्देश दिया कि वो इसे हमले की जगह 'स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन' कहें.

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'बोलो, मदद चाहिए तो हम यहां हैं'

मैरिना ने उस दिन का पूरा ब्योरा दिया जिस दिन उन्होंने मॉस्को से भागने का फ़ैसला किया था. वो एक वीकेंड था. मैरिना को अचानक ये ख़्याल आया कि इस वक्त पुलिस उन्हें लेकर कम सक्रिय होगी.

मॉस्को से निकलने के बाद मैरिना को बॉर्डर के क़रीब पहुंचने के लिए सात गाड़ियां बदलनी पड़ीं. इसके बाद वो पैदल बॉर्डर तक पहुंचीं.

उस सफ़र को याद करते हुए मैरिना ने बताया, "हमारी कार कीचड़ में फंस गई थी. हमारे सेलफ़ोन में नेटवर्क बंद था. तब हमने तारों को देखकर रास्ता पता करने की कोशिश की. वो बहुत ख़तरनाक़ और थका देने वाला था."

बॉर्डर पर पहुंचने के बाद भी उन्हें काफ़ी देर पर छिपे रहना पड़ा ताकि बॉर्डर पर निगरानी करने वाली रूसी फ़ौज की नज़र उन पर न पड़े. कई घंटों की लुका-छिपी के बाद वो किसी तरह बॉर्डर पार करने में कामयाब हुईं.

मैरिना इस तरह नहीं बच निकल पातीं, अगर उनके संस्थान के कुछ रिपोर्टर्स ने सहयोग नहीं किया होता.

इस बारे में मैरिना के डायरेक्टर क्रिस्टोफ़ डेलोयर तफ़्सील से बताते हैं, "जिस दिन मैरिना ने रूसी टेलीविज़न पर आकर विरोध जताया, मैंने उसी दिन उसे मैसेज भेजा था- अगर तुम्हें हेल्प चाहिए, तो हम पूरा साथ देंगे."

लेकिन मैरिना ने सितंबर तक उस मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया. बाद में एक मध्यस्थ के ज़रिए भागने में मदद के लिए उन्होंने अपने संस्थान को संदेश भेजा.

क्रिस्टोफ़ कहते हैं, "हमने कहा ठीक है, क्योंकि हमें पता है कि इस हाल में बच कर भागना कितना मुश्किल है."

वो आगे बताते हैं, "उस वक्त मैरिना अपने घर में नज़रबंद की गई थीं. उनके पड़ोसी और रिश्तेदार सब पुतिन के समर्थक थे. इसलिए वो पुलिस को फ़ोन कर बता सकते थे कि मैरिना अपने घर में नहीं हैं. उन्हें हाथ में एक इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट भी पहनाया गया था. लेकिन वो कामयाब हुईं."

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मैरिना अब भी हैं आशंकित

44 वर्षीय मैरिना अब पेरिस में रहती हैं. लेकिन जान का डर अब भी कम नहीं हुआ है.

मैरिना कहती हैं, "बेशक ये डर अब भी है, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के ख़िलाफ़ इस तरह लड़ाई जारी रखकर ख़ुद के नेतृत्व को ख़तरे में डाल रहे हैं. रूस का संपन्न तबका हर बात बहुत अच्छी तरह समझता है."

वो कहती हैं, "आम जनता भले ही सरकारी प्रोपेगैंडा के जाल में फंसी हो, लेकिन संपन्न तबका जिसने इस युद्ध में अपने हवाई जहाज़ और यॉट खोए, वित्तीय नुक़सान सहे, वे सारा सच जानते हैं."

मैरिना यहां तक कहती हैं कि, 'यूक्रेन जैसे ही जीत की तरफ़ बढ़ेगा, रूस का ये तबका पुतिन के ख़िलाफ़ खुल कर सामने आ जाएगा.'

लेकिन मैरिना के रूस विरोधी प्रदर्शन और इसे लेकर सुर्ख़ियों में रहने के बावजूद उनके ही देश के यूक्रेनी मूल के पत्रकारों और पुतिन विरोधियों का एक तबका उन्हें संदेह की नज़र से देखता है.

इसकी वजह है उनका रूस के सरकारी टेलीविज़न से जुड़ा होना. इसकी वजह से ये लोग उन्हें रूसी सरकार की प्रवक्ता की तरह देखते हैं.

पिछली गर्मियों में ही जब मैरिना एक जर्मन अख़बार के लिए न्यूज़ स्टोरी करने यूक्रेन गई थीं, तब वहां के लोगों ने उनका विरोध किया और फ़ौरन वापस जाने की मांग की.

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