सत्ता पलटने का जारी है दौर, 2014 के बाद कुछ सीएम ही बचा पाए अपनी कुर्सी
नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के रुझान लगातार सामने आ रहे हैं। इन रुझानों की मानें तो चार राज्यों में सत्ता परिवर्तन होता दिख रहा है। 2014 के बाद से जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं अब तक अधिकतर राज्यों में सत्ता परिवर्तित होती दिखी है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार और मिजोरम में कांग्रेस की हार भी इसी ट्रेंड का नतीजा है। वहीं तेलंगाना में टीआरएस अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रही। ऐसा ही कुछ पिछले साल गुजरात के चुनावों में भी देखने को मिला था। जहां बीजेपी कांग्रेस के कड़ी टक्कर के बाद सत्ता में वापसी करने में कामयाब हुई थी।

तीनों राज्यों में बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर
अगर बात करें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तो यहां पर बीजेपी पिछले 15 सालों से सत्ता में है लेकिन राजस्थान में 2013 में हुए चुनावों में वसुंधरा राजे सिंधिया ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की थी। तीनों राज्यों में बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर थी। जहां छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ वापसी कर रही है तो वहीं मध्य प्रदेश में अभी भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। वहीं राजस्थान में कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ दिया लेकिन अभी भी वह बहुमत के आंकड़े से दूर दिखाई दे रही है।

2014 के बाद जहां पर भी चुनाव हुए हैं वहां पर सत्ता विरोधी लहर देखने को मिली
हम बात कर रहे हैं कि 2014 के बाद जहां पर भी चुनाव हुए हैं वहां पर सत्ता विरोधी लहर देखने को मिली है। जिसके चलते सत्ता में कबिज सरकारें अपनी कुर्सी बचाने में नाकामयाब रही। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद पहला चुनाव दिल्ली में हुआ था, जहां पर सत्ता में 15 साल के कांग्रेस की शीला दीक्षित की सरकार थी। जिसे पहली बार सत्ता में उतरी आम आदमी पार्टी ने पटखनी दी थी। हाल ये हुआ था कि कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी।

यूपी में अखिलेश यादव को इसी ट्रेंड की वजह से सत्ता गंवानी पड़ी
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए हैं. इन सभी राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं और उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। जिसके चलते कांग्रेस ने सभी राज्यों में हार गई। वहीं, पंजाब में अकाली दल और बीजेपी गठबंधन की सरकार को सत्ता के खिलाफ चली लहर का सामना करना पड़ा और यूपी में अखिलेश यादव को इसी ट्रेंड की वजह से सत्ता गंवानी पड़ी।

कुछ सीएम ही बचा पाए अपनी सत्ता
हालांकि कुछ राज्यों में सत्ता विरोधी लहर का कोई असर नहीं हुआ। सत्ता में काबिज सीएम अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। ओडिशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजेडी और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता में जबरदस्त वापसी कर दिखा दिया कि उनके खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं थी। यहीं हाल कुछ 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जब नीतीश कुमार ने लालू की पार्टी आरजेडी के साथ गठजोड़ करके बिहार में अपनी सत्ता बचा ली। हालांकि ये गठबंधन दो साल से भी कम समय में टूट गया। वहीं कर्नाटक एक मात्र राज्य रहा जहां कांग्रेस गठबंधन बनाकर सत्ता में वापसी करने में कामयाब रही।












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