अलीगढ़ में सीएए-विरोधी महिला प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन स्थल खाली किया
नई दिल्ली- अलीगढ़ में एक जगह पर पिछले 6 दिनों से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने प्रदर्शन वाली जगह को पुलिस के समझाने-बुझाने पर खाली कर दिया है। ये महिलाएं जीवनगढ़ बायपास रोड पर धरना दे रही थीं, लेकिन जिले के बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में अब उन्होंने धरना स्थल को खाली कर दिया है। प्रदर्शन के लिए रोड पर पुलिस ने जो बैरिकेड लगाए थे, वह भी शनिवार रात को ही हटा ली गई थी। जिसके चलते यातायात फिर से शुरू होने से वहां से गुजरने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।

एसएसपी मुनिराज ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को 5 प्वाइंट का एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें जीवनगढ़ और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन करने वालों से मुकदमा वापस लेने की मांग की गई है। जिले के अधिकारियों ने कुछ राजनीतिक नेताओं और समाज के अन्य नेताओं की सहायता से प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि वह उनकी मांगों पर राज्य सरकार के साथ चर्चा करेंगे।
अलीगढ़ के डीएम चंद्र भूषण सिंह ने घोषणा की है कि प्रदर्शनकारियों की एक मांग तो पहले ही मंजूर कर ली गई है, जिसमें पिछले रविवार को ऊपरी कोट इलाके में गंभीर रूप से जख्मी हुए युवक को वित्तीय सहायता दिए जाने की मांग की गई थी। तारिक मुन्नवर को हिंसा के दौरान गोली लगी थी, जिसे 2 लाख रुपये की वित्तीय मदद दी गई है। मुन्नवर के शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो चुका है और उसका जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में मुफ्त इलाज की व्यवस्था की जाएगी।
आगरा जोन के एडीजी अजय आनंद ने बताया कि जीवनगढ़ में धरने पर बैठी महिलाओं से बातचीत हुई थी, जिसमें उन्हें समझाया गया था कि ईदगाह मैदान में एक महीने से ज्यादा समय से महिलाएं पहले से ही सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है, वो चाहें तो वहां प्रदर्शन में शामिल हो सकती है। इसके लिए बायपास रोड पर ट्रैफिक रोकने की क्या आवश्यकता है। बता दें कि पिछले 5 हफ्ते से बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं ईदगाह में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं।












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