TDP को फर्श से अर्श तक ले जाने में नारा लोकेश की रही अहम भूमिका, क्यों कहा जा रहा इन्हें आंध्रा का 'अखिलेश'?
Nara Lokesh: विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद आज तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। जन सेना पार्टी प्रमुख और 'पावर स्टार' पवन कल्याण ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। पवन कल्याण के साथ-साथ चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश समेत 23 अन्य ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) द्वारा 2019 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में अपनी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की हार के बाद मंगलागिरी निर्वाचन क्षेत्र हारने के बाद, इस बार उन्होंने जोरदार वापसी की है।

नारा लोकेश ने न केवल इस विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की बल्कि इन चुनावों में उसी सीट पर 91,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की जहां 2019 के दौरान उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बता दें, 91,000 वोटों से जीतने के साथ ही नारा लोकेश ने इतिहास रचा है क्योंकि राज्य में ये सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीत है। लोकेश राज्य में अपनी पार्टी की आवाज के रूप में भी उभरे हैं।
आंध्र प्रदेश के 'अखिलेश' नारा लोकेश
इन सभी घटनाक्रम के बीच चंद्रबाबू नायडू के बेटे, नारा लोकेश की तुलना उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से की जा रही है। इसके पीछे की वजह है नारा लोकेश का अखिलेश यादव की तरह अपनी पार्टी को एक बार फिर मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा करना। दिलचस्प बात ये है कि अखिलेश की सपा की तरह नारा लोकेश की पार्टी यानी टीडीपी का भी चुनाव चिन्ह साइकिल है।
नारा लोकेश ने टीडीपी को दिया नया जीवन
कई लोगों को लग रहा है कि चंद्रबाबू नायडू के बीजेपी और पवन कल्याण की जन सेना पार्टी के साथ गठबंधन के कारण उन्हें इस विधानसभा चुनाव में जीत मिली है। लेकिन इस जीत के पीछे चंद्रबाबू नायडू के बेटे और टीडीपी नेता नारा लोकेश का बहुत बड़ा रोल है।
2019 में वाईएसआरसीपी के हाथों टीडीपी को बहुत बुरी हार का सामना करना पड़ा था। उस हार को इस विधनसभा में जीत में बदलने के लिए नारा लोकेश के जी तोड़ मेहनत की है। उनकी तुलना अखिलेश यादव से होने का यह एक बड़ा कारण है। अखिलेश यादव ने जैसे इस लोकसभा चुनाव में नए तरीके से प्रचार करते हुए पार्टी को जबरदस्त सफलता दिलाई ठीक वैसे ही नारा लोकेश ने भी आंध्र प्रदेश में टीडीपी की जीत की कहानी लिखने में अहम भूमिका निभाई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि टीडीपी के महासचिव के रूप में नारा लोकेश ने पार्टी की रणनीति और नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान और 400 दिनों की पदयात्रा सहित उन्होंने टीडीपी को नया जीवन देने के लिए काफी मेहनत की है। अपनी इस परिश्रम से वो चुनाव अभियान के दौरान और फिर टीडीपी की जीत में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं।
नारा लोकेश ने जनवरी 2023 में पदयात्रा शुरू की थी। 400 दिनों की इस यात्रा में उन्होंने 4,000 किलोमीटर का सफर तय किया। उनकी यह यात्रा कुप्पम से शुरू होकर इच्छापुरम तक गई थी। अपनी पद यात्रा के दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश की जनता खासकर युवाओं से जुड़ने और राज्य के विकास के लिए टीडीपी के दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक ले जाने की कोशिश की। चुनाव परिणाम में उनकी यह कोशिश रंग लाती दिखी और टीडीपी ने जनादेश हासिल कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
टीडीपी की 23 सीटों से 135 सीटों तक का सफर
आंध्र प्रदेश के विधनसभा चुनाव में इस बार चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने 135 सीटें जीती हैं। आंध्रा विधानसभा चुनाव में एनडीए ने कुल 164 सीटें जीती हैं, इसमें सबसे बड़ा हिस्सा टीडीपी को प्रचंड बहुमत देने वाली 135 सीटों का है। पिछले चुनावों में टीडीपी को केवल 23 सीटों पर ही जीत मिली थी। साथ ही साथ टीडीपी ने इस लोकसभा चुनाव में 16 सीटें जीती हैं, जिसकी वजह से वो केंद्र में भी सरकार गठन के लिए अहम पार्टी बनकर उभरी।












Click it and Unblock the Notifications