Andhra Pradesh Capital केस: SC से सीएम जगन को बड़ा झटका! हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं, जानिए पूरा मामला
आंध्र प्रदेश कैपिटल केस यानी तीन राजधानियों के प्रस्ताव वाले मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी समेत आंध्र प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने की बात सामने आई है। जानिए क्या है पूरा मामला

आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों (Andhra Pradesh Capital) मामले पर प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी- वाईएसआर कांग्रेस और खुद मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी भी बड़े मजबूत इरादों के साथ कार्रवाई की दिशा में बढ़ रहे हैं। हालांकि, इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश राजधानी मामले में सख्ती दिखाई है। देश की सबसे बड़ी अदालत का रूख सीएम जगन मोहन रेड्डी के लिए झटके की तरह देखा जा रहा है। जानिए पूरा मामला
राजधानियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है। इस संबंध में एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी सरकार को झटका देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मार्च से उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने के राज्य के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। इसमें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार को छह महीने के भीतर अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए कहा गया था।
न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न ने कहा कि अदालत 11 जुलाई को इस मुद्दे से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ अनुरोध पर सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति जोसेफ 16 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और इस मुद्दे के जुलाई में नई पीठ के समक्ष आने की उम्मीद है।
बता दें कि मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने राज्य विधानसभा में घोषणा की थी कि वह जुलाई से विशाखापत्तनम में शिफ्ट होंगे और तटीय शहर से काम करेंगे। इस शहर को सिटी ऑफ डेस्टिनी भी कहा जाता है।
गौरतलब है कि 2014 में तत्कालीन आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना का गठन किया गया था। दोनों को 10 वर्षों के लिए हैदराबाद को राजधानी के रूप में साझा करना था, लेकिन चंद्रबाबू नायडू आंध्र के मुख्यमंत्री चुने गए और उन्होंने घोषणा की कि वह अमरावती में एक विश्व स्तरीय ग्रीनफील्ड राजधानी का निर्माण करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास समारोह में भी गए थे। हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया और नई राजधानी के निर्माण के साथ बड़ी योजनाएं तैयार की गईं। हालांकि, इस योजना में फंड की कमी जैसी बातें भी सामने आईं।
मई 2019 में नायडू की पार्टी चुनाव हार गई। जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने। इनकी सरकार ने भूमि अधिग्रहण में बड़े रियल एस्टेट घोटाले का आरोप लगाया और अमरावती में नई राजधानी की योजना भी बनाई। सीएम जगन की सरकार ने एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीसीआरडीए ) को खत्म कर दिया।
अमरावती के साथ तीन राजधानियों का फॉर्मूला पेश करते हुए सीएम जगन ने विकेंद्रीकरण की घोषणा करते हुए एक नया कानून पारित किया और कहा कि राज्य की तीन राजधानियां होंगी। कुरनूल को न्यायिक राजधानी, अमरावती में विधायी राजधानी और Vizag यानी विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी बनाने का ऐलान हुआ। ये महत्वाकांक्षी योजना कानूनी पचड़े में फंस गई। सरकार ने अपना विकेंद्रीकरण बिल वापस ले लिया। नवंबर में एपीसीआरडीए को भी रद्द कर दिया।
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बता दें कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने मार्च 2022 में अमरावती के किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसमें छह महीने में राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम में दिए गए मास्टर प्लान के अनुसार अमरावती में राजधानी बनाने को कहा गया। इसके खिलाफ जगन सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची किसानों की तरफ से दायर कई याचिकाओं में एपीसीआरडीए अधिनियम को रद्द करने को चुनौती दी गई थी। इन लोगों ने राजधानी के लिए भूमि का योगदान दिया था। एपीसीआरडीए कानून अमरावती में एक भव्य राजधानी विकसित करने के लिए चंद्रबाबू नायडू सरकार ने अपने कार्यकाल में पारित कराया था।
आंध्र प्रदेश में मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने विकेंद्रीकरण अधिनियम और आंध्र प्रदेश एपीसीआरडीए अधिनियम को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना अंतिम फैसला सुनाया था। इसके बाद नवंबर में, राज्य सरकार ने एपी विकेंद्रीकरण अधिनियम और एपीसीआरडीए कानून को वापस ले लिया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ याचिकाकर्ताओं की दलील है कि एपीसीआरडीए अधिनियम से जुड़े और भी अनसुलझे मुद्दे हैं। इनमें भूमि मालिकों को डेवलपर से भूखंड वापस मिलने जैसे सवाल शामिल हैं। हाईकोर्ट को बताया गया कि राजधानी के लिए अधिग्रहित जमीन में कई प्लॉट ऐसे हैं जो कृषि भूमि, विकास या बुनियादी ढांचे जैसी संरचना हैं और इन्हें बैंकों के पास गिरवी रखा गया है। इन सवालों पर उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है, अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।












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