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'तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नहीं...', बहादुरी का दूसरा नाम थे कर्नल मनप्रीत,आतंकी बुरहान वानी का किया था खात्मा

Colonel Manpreet Singh Story: 'जमाने भर में मिलते हे आशिक कई ,मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नहीं होता'

महान देशभक्त भगत सिंह की इन लाइनों को पूरी तरह से चरितार्थ कर दिया कर्नल मनप्रीत सिंह ने, जिन्होंने अपना जीवन देश के नाम न्यौछावर कर दिया। अनंतनाग में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए कर्नल मनप्रीत सिंह का ये बलिदान ये देश कभी नहीं भूल पाएगा।

Martyr Colonel Manpreet Singh

बहादुरी का दूसरा नाम थे कर्नल मनप्रीत

आंतंकियों के खात्मा करते वक्त देश के लिए सीने पर गोली खाने वाले कर्नल मनप्रीत सिंह बहादुरी का पर्याय थे। मूलरूप से पंचकुला के रहने वाले मनप्रीत के खून में देशभक्ति थी, उनके पिता, दादा और चाचा तीनों ही सेना में थे। देश के लिए मर-मिटने का जूनून उन्हें बचपन से ही था।

आतंकवादी बुरहान वानी को मार गिराया था

उन्होंने साल 2016 में घाटी को नफरत की आग में सुलगाने वाले आतंकवादी बुरहान वानी को ढ़ेर किया था और साल 2021 में भी उन्होंने कई आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा था।

कश्मीर के युवाओं को भड़काता था वानी

आपको बता दें कि बुरहान हिजबुल मुजाहीद्दीन का आतंकी था, जो कि कश्मीर के युवाओं को भारत के खिलाफ हथियार उठाने को कहता था, वो घाटी में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय था।

सेना अवॉर्ड से नवाजा गया था

उनके अदम्य साहस की वजह से ही उन्हें सेना अवॉर्ड से नवाजा गया था। उनका पूरा परिवार इस वक्त मोहाली में रहता है और इसी वजह से आज उनका पार्थिव शरीर मोहाली स्थित उनके आवास पर ले जाया जा रहा है।

अपनी पत्नी ओर दो छोटे बच्चों को छोड़ गए

अपने पीछे वो अपनी पत्नी ओर दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके बड़े बेटे की उम्र मात्र 6 साल और बेटी की आयु 2.5 साल की है। बूढ़ी मां और पत्नी कीं आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं तो वहीं स्थानीय लोगों को भी भरोसा नही हो रहा कि अब उनका वीर कर्नल इस दुनिया में नहीं है।

केंद्रीय विद्यालय में की थी स्कूली पढ़ाई

मालूम हो कि स्वभाव से हंसमुख और काम के प्रति गंभीर मनप्रीत बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे। उनकी स्कूली पढ़ाई मुल्लांपर स्थित एयरफोर्स स्टेशन के पास बने केंद्रीय विद्यालय में हुई थी। तो वहीं साल 2003 में वो सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे।

कई स्पेशल ऑप्रेशन को अंजाम दिया

उनकी बहादुरी की ही वजह से सेना में उनका कद बढ़ता ही चला गया और उन्होंने कई स्पेशल ऑप्रेशन को अंजाम दिया। वो 2019 - 2021 तक सेना में सेकंड इन कमांड थे लेकिन बाद उन्हें कमांडिंग अफसर बना दिया गया था।

कर्नल मनप्रीत सिंह ने किया आतंकियों के नाक में दम

आपको बता दें कि सेना को अनंतनाग में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके लिए सर्च ऑप्रेशन चलाया गया था, इसी की निगरानी करने कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल मनप्रीत सिंह वहां पहुंचे थे लेकिन वो जैसे ही गाड़ी से उतरे आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया।

मेजर आशीष धोनैक और डीएसपी हुमायूं भट भी हुए शहीद

उन पर कायरों ने कई राउंड गोलिया बरसाई, जिससे उनका काफी ब्लड बह गया और अस्पताल पहुंचने से पहले ही वो वीरगति को प्राप्त हो गए। इस एनकाउंटर में कर्नल के अलावा मेजर आशीष धोनैक और डीएसपी हुमायूं भट भी शहीद हुए हैं।

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