केरल में पहली बार खुला BJP का खाता: त्रिशूर सीट पर ऐतिहासिक जीत, वोट शेयर भी बढ़े, जानिए कैसे हुआ बदलाव

BJP win Thrissur Suresh Gopi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केरल में उल्लेखनीय प्रगति की है, त्रिशूर निर्वाचन लोकसभा सीट जीत लिया है। इतना ही नहीं 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने वोट शेयर में वृद्धि की है। ​​राजनीति में कदम रखने वाले जाने-माने अभिनेता और भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी ने त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है।

यह घटनाक्रम केरल के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव का प्रतीक है, जिस पर परंपरागत रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)-लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) का दबदबा रहा है।

BJP win Thrissur Suresh Gopi

राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव

2011 के विधानसभा चुनावों के बाद से केरल धीरे-धीरे त्रिध्रुवीय परिदृश्य की ओर बढ़ रहा है। केरल में भाजपा के उदय का श्रेय उसकी "सबाल्टर्न हिंदुत्व" रणनीति को दिया जाता है, जो झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में प्रभावी रही है। केरल में पार्टी की सफलता इस रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है।

वोट शेयर में बढ़ोतरी

भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का वोट शेयर 2019 में 15% से बढ़कर 2024 में लगभग 20% हो गया। भाजपा ने 37.8% वोटों के साथ त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र जीता। तिरुवनंतपुरम में, भाजपा 35.52% वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। पार्टी ने अटिंगल और अलप्पुझा में भी वोट शेयर में वृद्धि देखी।

मतदाता की बदलती प्राथमिकताएं

विश्लेषकों का मानना ​​है कि भाजपा की सफलता का श्रेय अल्पसंख्यक ईसाइयों, कांग्रेस के पारंपरिक समर्थकों और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को जाता है। ये समूह, जो कभी वामपंथ के समर्पित मतदाता थे, अब भाजपा के प्रति समर्थन दिखा रहे हैं। अल्पसंख्यकों, ओबीसी और दलितों के बीच पार्टी की व्यापक अपील प्रभावी रही है।

रणनीतिक दृष्टिकोण

केरल और तमिलनाडु में "धार्मिक कट्टरता" को दरकिनार कर व्यापक मतदाता आधार को आकर्षित करने की भाजपा की रणनीति कारगर साबित हुई है। इस दृष्टिकोण ने मतदाताओं के बीच दुश्मनी को कम किया है और राज्य में पार्टी की स्वीकार्यता को बढ़ाया है।

वामपंथ का फोकस और मतदाता निष्ठा

मुस्लिम नेताओं को खुश करने पर वामपंथियों के ध्यान ने हिंदू मतदाताओं की वफादारी में बदलाव किया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) जैसी नीतियों के माध्यम से मुस्लिम वोटों को सुरक्षित करने के प्रयास ईसाई समुदाय के साथ प्रतिध्वनित नहीं हुए। यूडीएफ और वामपंथियों दोनों को अपनी धर्मनिरपेक्ष साख से समझौता करते हुए देखा गया।

व्यक्तिगत बनाम राजनीतिक विजय

त्रिशूर में सुरेश गोपी की जीत को राजनीतिक से ज़्यादा व्यक्तिगत माना गया, क्योंकि ईसाई समुदाय ने उनके परोपकारी कार्यों के कारण उन्हें सामूहिक रूप से वोट दिया। विश्लेषकों का मानना ​​है कि केरल के मतदाताओं से पूरी तरह से स्वीकृति पाने के लिए भाजपा को अभी भी काम करना है, लेकिन पार्टी का नया दृष्टिकोण आशाजनक है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+